ज्योतिष और वास्तु समाधान जैसे दुकान,ऑफ़िस,फ़ैक्ट्री,बिवाह में देरी ,शिक्षा,प्रेम बाधा, मांगलिक दोष, कोट केस, भुत प्रेत बाधा, इत्यादि,। Numerology, raki hiling, color therapy द्वारा समाधान सम्भव है । आप अपनी जन्म तिथि और जन्म तारीख़ और जन्म स्थान बता कर समस्या का समाधान पा सकते हैं । हमारे WhatsApp no. 9333112719 पर संपर्क कर सकते हैं ।
Monday, 25 October 2021
वास्तु अनुसार घर के परदे के रंग कैसे लगाऐं
घर में भूलकर भी नहीं कराएं एसे रंग जो बर्बादी के कारण बने
Sunday, 24 October 2021
घर में कौन सा रंग शुभ रहेगा
किस कमरे में हो कौन सा रंग शुभ रहेगा
विशेषज्ञों का कहना है कि आपके घर के हर कमरे में ऊर्जा, आकार और दिशा के मुताबिक रंगों की जरूरत होती है. आपके होम सेक्शन की रंग आवश्यकता उसके उपयोग के अनुसार होनी चाहिए. एस्ट्रोन्यूमरोलॉजिस्ट ने कहा, ”घर में रहने वाले लोगों को कमरों के रंग चुनते वक्त इन बातों का ध्यान रखना चाहिए”.
मास्टर बेडरूम: दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और इसलिए इसमें नीला रंग करवाना चाहिए। बेडरूम आराम करने की जगह है. इसलिए यह जरूरी है कि इस जगह में सकारात्मक प्रभामंडल हो. इसलिए बेहतर यही है कि इस जगह को आप सुखदायक टोन वाले हल्के और ठंडे रंगों से रंगें. वास्तु के मुताबिक, नीले रंग के फर्नीचर और दरवाजे के साथ ऑल वाइट कलर पैटर्न इस जगह के लिए सबसे मुफीद रहेगा. इसके अलावा, बेडरूम में कोई भी लाइट या पेस्टल शेड काम कर सकता है. भारी और गहरे रंगों से बचें क्योंकि इससे जगह में उदासी का अहसास हो सकता है.
गेस्ट रूम/ड्राइंग रूम: घर में आए रिश्तेदारों के लिए गेस्ट रूम/ड्राइंग रूम उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इसलिए इस दिशा में अगर गेस्ट रूम है तो उसमें सफेद रंग होना चाहिए।
बच्चों का कमरा: उत्तर-पश्चिम उन बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ दिशा है, जो बड़े हो गए हैं और पढ़ाई करने के लिए बाहर जाते हैं। चूंकि उत्तर-पश्चिम दिशा पर चंद्रमा का राज है, इसलिए इस दिशा में स्थित बच्चों के कमरे में सफेद रंग कराना चाहिए।
किचन: दक्षिण-पूर्व दिशा किचन के लिए बेस्ट है, इसलिए किचन की दीवारों का रंग संतरी या लाल होना चाहिए. किचन आग का प्रतिनिधित्व करता है. लिहाजा गहरे रंग अच्छे रहेंगे. आप पीला रंग चुन सकते हैं. गहरे रंग जैसे गुलाबी मोहब्बत और गर्मजोशी को दर्शाते हैं जबकि भूरा रंग भी किचन के लिए मुफीद है क्योंकि यह संतुष्टि को दर्शाता है. अगर किचन कैबिनेट्स हैं तो लेमन यलो, संतरी रंग अच्छे रहेंगे क्योंकि ये ताजगी, स्वास्थ्य और सकारात्मकता को दिखाते हैं. फर्श के लिए, मोज़ेक, संगमरमर या सिरेमिक टाइलें चुनें. हल्के रंग – बेज, सफेद या हल्का भूरा फर्श के लिए अच्छे होते हैं. वास्तु की सिफारिशों के अनुसार, रसोई के स्लैब प्राकृतिक रूप से उपलब्ध पत्थरों में सबसे अच्छे हैं, जिनमें ग्रेनाइट या क्वार्ट्ज शामिल हैं. नारंगी, पीले और हरे रंग रसोई के काउंटरटॉप्स के लिए अच्छा काम करते हैं.
बाथरूम: उत्तर-पश्चिम दिशा बाथरूम के लिए सबसे सही है और इसमें सफेद रंग होना चाहिए।
हॉल: आदर्श तौर पर हॉल नॉर्थ-ईस्ट या नॉर्थ वेस्ट दिशा में होना चाहिए और इसमें पीला या सफेद रंग करवाना चाहिए।
घर के बाहर का रंग: मालिकों के मुताबिक होना चाहिए। श्वेत-पीला, अॉफ वाइट, हल्का गुलाबी या संतरी रंग सभी राशि के लोगों के लिए अच्छा होता है।
पूजा घर: का मुंह नॉर्थ ईस्ट की दिशा में होना चाहिए, ताकि सूर्य के अधिकतम प्रकाश का दोहन किया जा सके. पीला आपके घर के इस हिस्से के लिए सबसे उपयुक्त रंग है, क्योंकि इससे इस प्रक्रिया में आसानी होगी. इस जगह को अपने घर का शांत क्षेत्र बनाने के लिए आपको इस क्षेत्र में गहरे रंगों से भी बचना चाहिए।
मेन डोर/एंट्रेंस: के लिए सॉफ्ट कलर्स का इस्तेमाल करें, जैसे वाइट, सिल्वर या वुड कलर. वास्तु के मुताबिक, गहरे रंग जैसे काला, लाल और गहरे नीले का इस्तेमाल न करें. ध्यान रहे कि मेन एंट्रेंस हमेशा घड़ी के घूमने की दिशा और अंदर की ओर खुलने चाहिए.
स्टडी रूम: अगर आपका ऑफिस-होम है तो वास्तु के मुताबिक ग्रीन, ब्लू, क्रीम और वाइट जैसे रंगों का इस्तेमाल करें. लाइट कलर्स से कमरा बड़ा सा लगता है. गहरे रंगों से बचें क्योंकि इससे जगह में उदासीनता बढ़ती है. आपके होम ऑफिस के लिए सोने, पीले, भूरे और हरे रंग के हल्के रंग, एक स्थिर कामकाजी माहौल सुनिश्चित करते हैं और उत्पादकता बढ़ाते हैं.
बालकनी/बरामदा: वास्तु के मुताबिक, बालकनी नॉर्थ या ईस्ट डायरेक्शन में होनी चाहिए. बालकनी में ब्लू, क्रीम और ग्रीन व पिंक के हल्के शेड्स कराएं. यही वो जगह होती है, जहां से लोग बाहरी दुनिया से कनेक्ट होते हैं. इसलिए गहरे रंगों से बचना चाहिए.
गैरेज: वास्तु के मुताबिक, गैरेज नॉर्थ वेस्ट दिशा में होना चाहिए. इसमें आप सफेद, पीला, ब्लू या कोई और लाइट शेड करा सकते हैं.
| कमरा | वास्तु के मुताबिक रंग | वास्तु के मुताबिक रंग |
| मास्टर बेडरूम | नीला | लाल के गहरे शेड्स |
| गेस्ट रूम | सफेद | लाल के गहरे शेड्स |
| ड्राइंग रूम/लिविंग रूम | सफेद | गहरे रंग |
| डाइनिंग रूम | ग्रीन, ब्लू और यलो | ग्रे |
| सीलिंग | वाइट या फिर ऑफ वाइट | ब्लैक और ग्रे |
| किड्स रूम | सफेद | गहरा नीला और लाल |
| किचन | संतरी या लाल | डार्क ग्रे, ब्लू, ब्राउन और ब्लैक |
| बाथरूम | सफेद | किसी भी रंग का गहरा शेड |
| हॉल | पीला या सफेद | डीप शेड में कोई भी रंग |
| पूजा घर | पीला | लाल |
| घर का बाहरी हिस्सा | पीले-सफेद, ऑफ-व्हाइट, हल्का मौवे | काला |
| मेन डोर/एंट्रेंस | सफेद, सिल्वर या लकड़ी का रंग | लाल और डीप यलो |
| स्टडी रूम | हल्का हरा, नीला, क्रीम या सफेद | ब्राउन और ग्रे |
| बालकनी/बरामदा | नीला, क्रीम, गुलाबी और हरे रंग के हल्के शेड्स | ग्रे, ब्लैक |
| गैरेज | सफेद, पीला, नीला | ब्लैक, ब्राउन |
दीवार के वो रंग जो सकारात्मक ऊर्जा को पैदा करते हैं
अगर आप ऐसे दीवार के रंग ढूंढ रहे हैं, वो घर में सकारात्मकता लाते हैं, वो इन कलर पैलेट को चुन सकते हैं.
पीला
पीला रंग संचार, आत्म-सम्मान और शक्ति से जुड़ा होता है.
बैंगनी
बैंगनी स्थिरता के लिए एक शानदार वातावरण बनाता है. आरामदायक और सुकून भरी नींद के लिए आप लैवेंडर जैसे हल्के रंगों का चुनाव कर सकते हैं.
हरा
हरा रंग तनाव को शांत करता है। यह लकड़ी के तत्व से भी जुड़ा है और इसमें तनाव और डिप्रेशन को दूर करने के गुण हैं.
अधीक जानकारी प्राप्त करने हेतु संपर्क करें
https://asthajyotish.business.site
http://asthajyotish.in
दिशाओं के मुताबिक आपके घर के रंग दिशाओं और घर के मालिक की जन्मतिथि के मुताबिक तय किए जाने चाहिए। चूंकि हर दिशा का अपना एक खास रंग होता है, इसलिए हो सकता है, यह घर के मालिक से मेल न खाए। इसके लिए घर के मालिकों को वास्तु शास्त्र में लिखी बुनियादी गाइडलाइंस का पालन करना चाहिए। दिशा मुफीद रंग नॉर्थ-ईस्ट हल्का नीला पूर्व सफेद या हल्का नीला दक्षिण-पूर्व यह दिशा आग से जुड़ी है। इसलिए संतरी, गुलाबी या सिल्वर रंग ऊर्जा को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है उत्तर हरा और पिस्ता ग्रीन उत्तर-पश्चिम यह दिशा हवा से जुड़ी है। इसलिए सफेद, हल्का ग्रे और क्रीम रंग इसके लिए परफेक्ट है पश्चिम यह जगह ‘वरुण’ (जल) की है, इसलिए नीला और सफेद सर्वश्रेष्ठ है दक्षिण-पश्चिम आड़ू रंग, गीली मिट्टी का रंग, बिस्किट कलर और लाइट ब्राउन कलर दक्षिण लाल और पीला घर के मालिकों को काला, लाल और पिंक रंग चुनने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ये रंग हर किसी को सूट नहीं करते।Saturday, 16 October 2021
Diwali 2021 : कब है दीपावली पूजन और शुभ मुहूर्त
कब है दीपावली पूजन और शुभ मुहूर्त
2021 में।
https://sites.google.com/view/astro-vastu-solution/home
Diwali 2021: हिंदू धर्म में दिवाली के त्योहार का विशेष महत्व है. हिंदू कैलेंडर और पौराणिक कथाओं के अनुसार, दिवाली कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मनाई जाती है. इस साल कार्तिक अमावस्या 4 नवंबर 2021 को है. लोगों को हर साल दिवाली (Diwali 2021) के त्योहार का बेसब्री से इंतजार रहता है.
दशहरा (Dussehra 2021) खत्म होते लोग दिवाली की तैयारी में लग गए हैं. दशहरा के पर्व से 20 दिन बाद दिवाली का पर्व मनाया जाता है. दिवाली का त्यौहार लक्ष्मी जी को समर्पित है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है. ऐसे में लक्ष्मी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त (Diwali Shubh Muhurt) की जानकारी होनी बहुत जरूरी है.
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का समय
हिंदू कैलेंडर Diwali Muhurt in Calendar) के अनुसार, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का समय शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक का माना जा रहा है. पूजा की अवधि- 1 घंटे 55 मिनट की होगी. वहीं प्रदोष काल- शाम 17:34:09 बजे से रात 20:10:27 बजे तक जबकि, वृषभ काल- शाम 18:10:29 बजे से रात 20:06:20 बजे तक माना जा रहा है.
दिवाली पर निशिता काल मुहूर्त
निशिता काल- रात 23:39 बजे से 5 नवंबर रात 00:31 बजे तक
सिंह लग्न- 5 नवंबर रात 00:39 बजे से तड़के 02:56 बजे तक
दिवाली शुभ चौघड़िया मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त: 06:34:53 बजे से 07:57:17 बजे तक
सुबह का मुहूर्त: 10:42:06 बजे से दोपहर 14:49:20 बजे तक
सायंकाल मुहूर्त: शाम 16:11:45 बजे से रात 20:49:31 बजे तक
रात्रि मुहूर्त: रात 24:04:53 बजे से रात 01:42:34 बजे तक
एक ही राशि में होंगे चार ग्रह
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल दिवाली पर सूर्य, मंगल, बुध और चंद्रमा एक ही राशि पर विराजमान होंगे. माना जा रहा है कि तुला राशि में इन चारों ग्रहों के रहने से शुभ परिणाम देखने को मिलेंगे. बता दें कि तिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा, मंगल को ग्रहों का सेनापति, बुध को ग्रहों का राजकुमार और चंद्रमा को मन का कारक माना गया है.
लक्ष्मी पूजन की विधि
- दिवाली की सफाई बहुत जरूरी है. अपने घर के हर कोने को साफ करने के बाद गंगाजल छिड़कें.
- लकड़ी की चौकी पर लाल सूती कपड़ा बिछाएं और बीच में मुट्ठी भर अनाज रखें.
- कलश (चांदी/कांस्य का बर्तन) को अनाज के बीच में रखें.
- कलश में पानी भरकर एक सुपारी (सुपारी), गेंदे का फूल, एक सिक्का और कुछ चावल के दाने डाल दें. -कलश पर 5 आम के पत्ते गोलाकार आकार में रखें.
- केंद्र में देवी लक्ष्मी की मूर्ति और कलश के दाहिनी ओर (दक्षिण-पश्चिम दिशा) में भगवान गणेश की मूर्ति रखें.
- एक छोटी थाली लें और चावल के दानों का एक छोटा सा पहाड़ बनाएं, हल्दी से कमल का फूल बनाएं, कुछ सिक्के डालें और मूर्ति के सामने रखें.
- अब देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश को तिलक करें और दीपक जलाएं. कलश पर भी तिलक लगाएं.
- अब भगवान गणेश और लक्ष्मी को फूल चढ़ाएं.
- नारियल, सुपारी, पान का पत्ता माता को अर्पित करें.
- देवी की मूर्ति के सामने कुछ फूल और सिक्के रखें.
- थाली में दीया लें, पूजा की घंटी बजाएं और लक्ष्मी जी की आरती करें.
- 👉 अधीक जानकारी प्राप्त करने हेतु संपर्क करें
- WhatsApp 9333112719
Monday, 11 October 2021
करवा चौथ व्रत कैसे करें सरल विधि
करवा चौथ व्रत कैसे करें सरल विधि और सामग्री
स्त्रियां इस व्रत को पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है। भले ही इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर होता है, लेकिन सार सभी का एक होता है पति की दीर्घायु।
Saturday, 2 October 2021
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र
सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्:
नवरात्र में करें इसका पाठ, मिलेगा धन, विद्या, यश, सुख-शांति और सब कुछ
👉http://asthajyotish.in
👉🔯ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋
👉WP. 9333112719
👉एक पाठ से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती जैसा फल
एक पाठ से संपूर्ण दुर्गा सप्तशती जैसा फल
श्री दुर्गा सप्तशती में से हम आपको एक एसा पाठ बता रहे हैं, जिसके करने से आपकी सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। इस पाठ को करने के बाद आपको किसी अन्य पाठ की आवश्यकता नहीं होगी। यह पाठ है..सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्। समस्त बाधाओं को शांत करने, शत्रु दमन, ऋण मुक्ति, करियर, विद्या, शारीरिक और मानसिक सुख प्राप्त करना चाहते हैं तो सिद्धकुंजिकास्तोत्र का पाठ अवश्य करें। श्री दुर्गा सप्तशती में यह अध्याय सम्मिलित है। यदि समय कम है तो आप इसका पाठ करके भी श्रीदुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ जैसा ही पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। नाम के अनुरूप यह सिद्ध कुंजिका है। जब किसी प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा हो, समस्या का समाधान नहीं हो रहा हो, तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करिए। भगवती आपकी रक्षा करेंगी।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र की महिमा
भगवान शंकर कहते हैं कि सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करने वाले को देवी कवच, अर्गला, कीलक, रहस्य, सूक्त, ध्यान, न्यास और यहां तक कि अर्चन भी आवश्यक नहीं है। केवल कुंजिका के पाठ मात्र से दुर्गा पाठ का फल प्राप्त हो जाता है।
क्यों है सिद्ध
इसके पाठ मात्र से मारण, मोहन, वशीकरण, स्तम्भन और उच्चाटन आदि उद्देश्यों की एक साथ पूर्ति हो जाती है। इसमें स्वर व्यंजन की ध्वनि है। योग और प्राणायाम है।
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को अत्यंत सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए
संक्षिप्त मंत्र
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥ ( सामान्य रूप से हम इस मंत्र का पाठ करते हैं लेकिन संपूर्ण मंत्र केवल सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में है)
संपूर्ण मंत्र यह है
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ऊं ग्लौं हुं क्लीं जूं स: ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा।।
कैसे करें
सिद्ध कुंजिका स्तोत्र को अत्यंत सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए। प्रतिदिन की पूजा में इसको शामिल कर सकते हैं। लेकिन यदि अनुष्ठान के रूप में या किसी इच्छाप्राप्ति के लिए कर रहे हैं तो आपको कुछ सावधानी रखनी होंगी।
1. संकल्प: सिद्ध कुंजिका पढ़ने से पहले हाथ में अक्षत, पुष्प और जल लेकर संकल्प करें। मन ही मन देवी मां को अपनी इच्छा कहें।
2. जितने पाठ एक साथ ( 1, 2, 3, 5. 7. 11) कर सकें, उसका संकल्प करें। अनुष्ठान के दौरान माला समान रखें। कभी एक कभी दो कभी तीन न रखें।
3. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के अनुष्ठान के दौरान जमीन पर शयन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें।
4. प्रतिदिन अनार का भोग लगाएं। लाल पुष्प देवी भगवती को अर्पित करें।
5. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र में दशों महाविद्या, नौ देवियों की आराधना है।
सिद्धकुंजिका स्तोत्र के पाठ का समय
1. रात्रि 9 बजे करें तो अत्युत्तम।
2. रात को 9 से 11.30 बजे तक का समय रखें।
आसन
लाल आसन पर बैठकर पाठ करें
दीपक
घी का दीपक दायें तरफ और सरसो के तेल का दीपक बाएं तरफ रखें। अर्थात दोनों दीपक जलाएं
किस इच्छा के लिए कितने पाठ करने हैं
1.विद्या प्राप्ति के लिए....पांच पाठ ( अक्षत लेकर अपने ऊपर से तीन बार घुमाकर किताबों में रख दें)
2. यश-कीर्ति के लिए.... पांच पाठ ( देवी को चढ़ाया हुआ लाल पुष्प लेकर सेफ आदि में रख लें)
3. धन प्राप्ति के लिए....9 पाठ ( सफेद तिल से अग्यारी करें)
4.मुकदमे से मुक्ति के लिए...सात पाठ ( पाठ के बाद एक नींबू काट दें। दो ही हिस्से हों ध्यान रखें। इनको बाहर अलग-अलग दिशा में फेंक दें)
5. ऋण मुक्ति के लिए....सात पाठ ( जौं की 21 आहुतियां देते हुए अग्यारी करें। जिसको पैसा देना हो या जिससे लेना हो, उसका बस ध्यान कर लें)
6. घर की सुख-शांति के लिए...तीन पाठ ( मीठा पान देवी को अर्पण करें)
7.स्वास्थ्यके लिए...तीन पाठ ( देवी को नींबू चढाएं और फिर उसका प्रयोग कर लें)
8.शत्रु से रक्षा के लिए..., 3, 7 या 11 पाठ ( लगातार पाठ करने से मुक्ति मिलेगी)
9. रोजगार के लिए...3,5, 7 और 11 ( एच्छिक) ( एक सुपारी देवी को चढाकर अपने पास रख लें)
10.सर्वबाधा शांति- तीन पाठ ( लोंग के तीन जोड़े अग्यारी पर चढ़ाएं या देवी जी के आगे तीन जोड़े लोंग के रखकर फिर उठा लें और खाने या चाय में प्रयोग कर लें।
( पाठ में अधिक समय नहीं लगेगा। पांच या सात मिनट में पाठ पूरा हो जाता है)
सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्
सिद्धकुंजिकास्तोत्रम्
शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः भवेत् ॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम् ।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम् ॥२॥
कुंजिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत् ।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम् ॥३॥
गोपनीयं प्रयत्नेन स्वयोनिरिव पार्वति ।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम् ।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुंजिकास्तोत्रमुत्तमम् ॥४॥
अथ मन्त्रः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः
ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा
इति मन्त्रः॥
नमस्ते रुद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि ॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिन ॥२॥
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरुष्व मे ।
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका ॥३॥
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते ।
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी ॥४॥
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मंत्ररूपिण ॥५॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्नी वां वीं वूं वागधीश्वरी ।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देविशां शीं शूं मे शुभं कुरु ॥६॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी ।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः ॥७॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा ॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा ॥८॥
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मंत्रसिद्धिंकुरुष्व मे ॥
इदंतु कुंजिकास्तोत्रं मंत्रजागर्तिहेतवे ।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ॥
यस्तु कुंजिकया देविहीनां सप्तशतीं पठेत् ।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा ॥
इतिश्रीरुद्रयामले गौरीतंत्रे शिवपार्वती
संवादे कुंजिकास्तोत्रं संपूर्णम् ।।
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋
👉WP. 9333112719
https://sites.google.com/view/asthajyotish
Friday, 1 October 2021
मां दुर्गा शक्ति पूजा विधि
ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा
http://asthajyotish.in
किसी भी देवी देवता की पूजा में विधि विधान का ध्यान रखा जाता है। आइए जानते हैं मां दुर्गा की पूजा कैसे करें-
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋
👉WP. 9333112719
दुर्गा पूजन सामग्री-
दुर्गा पूजन से पहले यह सामग्री जुटा लें-
पंचमेवा, रोली, सिंदूर, कलावा, पंचमिठाई, रूई, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र, फूल, 5 सुपारी, लौंग, 5 पान के पत्ते, घी, चौकी, कलश, आम के पल्लव, समिधा, कमल गट्टे, कुशा, रक्त चंदन, श्रीखंड चंदन, जौ, तिल, प्रतिमा, आभूषण व श्रृंगार का सामान, फूल माला।
पंचामृत बनाएं- दूध, दही, घी, शहद, शर्करा को एक में मिलाकर तैयार करें।
ऐसे करें पूजन
दुर्गा प्रतिमा के सामने आसनी पर बैठ जाएं। बिना आसन, चलते-फिरते और पैर फैलाकर पूजा नहीं करना चाहिए। इसके बाद अपने आपको तथा आसन को इस मंत्र से शुद्धि करें -
"ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥"
इन मंत्रों से अपने ऊपर तथा आसन पर 3-3 बार कुशा या पुष्पादि से छींटें लगाएं फिर आचमन करें –
ऊं केशवाय नम: ऊं नारायणाय नम:, ऊं माधवाय नम:, ऊं गोविन्दाय नम:|
फिर हाथ धोएं, फिर आसन शुद्धि मंत्र बोलें -
ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता।
त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥
इसके पश्चात अनामिका उंगली से अपने मत्थे पर चंदन लगाते हुए यह मंत्र बोलें-
चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्,
आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।
संकल्प- हाथ में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर संकल्प मंत्र बोलें –
ऊं विष्णुर्विष्णुर्विष्णु:, ऊं अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे, अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते(वर्तमान संवत), तमेऽब्दे क्रोधी नाम संवत्सरे उत्तरायणे (वर्तमान) ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे (वर्तमान) मासे (वर्तमान) पक्षे (वर्तमान) तिथौ (वर्तमान) वासरे (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री दुर्गा पूजनं च अहं करिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये।
इस मंत्र के साथ करें पूजा
माता दुर्गा की आराधना के समय ‘‘ऊँ दुं दुर्गायैनमः'' मंत्र का जप करें।
नारियल का भोग लगाएं
माता दुर्गा की पूजा के दौरान नारियल का भोग जरूर लगाना चाहिए। मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने नारियल चढ़ाएं । कुछ देर बाद नारियल फोड़ दें। इसके बाद देवी को अर्पित कर भक्तों में बांट दें।
https://sites.google.com/view/asthajyotish
vastujyotish.samadhan
रत्न धारण कैसे करें?
Jyotishgurumk बृहद संहिता पुराणों पर आधारित आचार्य वाराहमिहिर द्वारा स्वरचित सुन्दर ग्रन्थ है। वाराहमिहिर के इस ग्रन्थ में रत्नों की उत्पत्...
-
Jyotishgurumk 2026 की सटीक भविष्यवाणी: अंक ज्योतिष से जानें कैसा रहेगा आपका भविष्य फल। नमस्कार दोस्तों, मैं हूँ Astro Manoj। क्या 2026 आप...
-
Jyotishgurumk ब्रेकअप के बाद अपने प्रेमी के वापस आने के योग -: जब किसी प्रेम प्रेमिकाओं के बीच में ब्रेकअप हो जाता है तो उस स्थिति में हमे...
-
ग्रह आपके करियर विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं? हमारी कुंडली और चार्ट में मौजूद ग्रह और उनके स्थान हमारे करियर विकल्पों को काफी हद त...


