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Monday, 25 October 2021

वास्तु अनुसार घर के परदे के रंग कैसे लगाऐं

वास्तु के मुताबिक कैसे हों परदों के रंग वास्तु के मुताबिक, यह केवल दीवारों के रंग ही नहीं बल्कि कमरे में मौजूद सारे रंग हमें प्रभावित करते हैं. परदों के मुफीद रंग भी कमरे को सुकूनभरा बनाते हैं. आप ऑफ वाइट, वाइट, रोजी रेड इत्यादि रंग परदों के लिए चुन सकते हैं. ये रंग शांति और आराम से जुड़े होते हैं, जो बेडरूम के लिए शानदार माने जाते हैं. बेडरूम में काले रंग के परदे ना लगाएं. वास्तु के मुताबिक, लिविंग रूम के परदे आप पीले, हरे और नीले में चुन सकते हैं जबकि डाइनिंग रूम के लिए ग्रीन, पिंक और ब्लू रंग अच्छे रहेंगे. हरा रंग उम्मीद का प्रतीक है और सद्भाव और सेहत का प्रतिनिधित्व करता है. नीला रंग नई शुरुआत को दर्शाता है तो वहीं पिंक प्यार को. बाथरूम के परदे ग्रे, पिंक, वाइट और ब्लैक का मिश्रण हो सकते हैं. उत्तरमुखी कमरों में परदे हल्के हरे रंग के होने चाहिए. वास्तु के अनुसार उत्तर-पश्चिम की ओर मुंह वाले कमरों में सफेद रंग के परदे होने चाहिए. पश्चिममुखी कमरों में ग्रे रंग के परदे होने चाहिए. दक्षिण-पूर्व की ओर मुंह वाले कमरों में लाल या गुलाबी रंग के परदे होने चाहिए. उत्तर-पूर्व की ओर मुंह वाले कमरों में पीले रंग के परदे होने चाहिए. वास्तु के मुताबिक कैसी हो फ्लोरिंग वास्तु के अनुसार फर्श का रंग हल्का, पीला और तटस्थ रंगों में होना चाहिए. सफेद संगमरमर या ग्रेनाइट उपयुक्त हैं, क्योंकि वे शांतिपूर्ण वातावरण को बढ़ाते हैं. लकड़ी के फर्श का उपयोग घर के उत्तर, उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में भी किया जा सकता है. इसके अलावा, उत्तर-पूर्व दिशा में, फर्श के लिए नीले रंग के शेड का इस्तेमाल किया जा सकता है. किचन में ब्लैक फ्लोरिंग से बचें. हालांकि, दक्षिण-पूर्व दिशा में लाल या गुलाबी रंग का फर्श रखना सही है. दक्षिण-पश्चिम दिशा के कमरों में फर्श पीले रंग का होना चाहिए.
http://asthajyotish.in वास्तु के मुताबिक रंगों का महत्व रंग प्रतिनिधित्व लाल उत्साह, ताकत, भावनाएं और गर्मजोशी नीला सौंदर्य, संतोष, भक्ति, सत्य हरा प्रगति, सेहतबक्श, उपजाऊ, समृद्धि सफेद पवित्रता, खुलापन, निर्दोष, लग्जरी पीला आशावाद, खुलापन, अध्ययन, बुद्धिमत्ता नारंगी दृढ़ संकल्प, लक्ष्य, अच्छा स्वास्थ्य, आराम भूरा स्थिरता, संतुष्टि, आराम पर्पल ऐश्वर्य, लग्जरी, अनुग्रह, अभिमान अधीक जानकारी प्राप्त करने हेतु संपर्क करें ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719

Monday, 11 October 2021

करवा चौथ व्रत कैसे करें सरल विधि

 करवा चौथ व्रत कैसे करें सरल विधि और सामग्री


स्त्रियां इस व्रत को पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। यह व्रत अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की प्रचलित मान्यताओं के अनुरूप रखा जाता है। भले ही इन मान्यताओं में थोड़ा-बहुत अंतर होता है, लेकिन सार सभी का एक होता है पति की दीर्घायु।  

करवा चौथ
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जानकारों के मुताबिक महाभारत से संबंधित पौराणिक कथा के अनुसार पांडव पुत्र अर्जुन तपस्या करने नीलगिरी पर्वत पर चले जाते हैं। दूसरी ओर बाकी पांडवों पर कई प्रकार के संकट आ पड़ते हैं। द्रौपदी भगवान श्रीकृष्ण से उपाय पूछती हैं। वह कहते हैं कि यदि वह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी के दिन करवाचौथ का व्रत करें तो इन सभी संकटों से मुक्ति मिल सकती है। द्रौपदी विधि विधान सहित करवाचौथ का व्रत रखती है जिससे उनके समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। इस प्रकार की कथाओं से करवा चौथ का महत्त्व हम सबके सामने आ जाता है।
शास्त्र के अनुसार किसी भी व्रत में पूजन विधि का बहुत महत्व होता है। अगर सही विधि पूर्वक पूजा नहीं की जाती है तो इससे पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है। करवा चौथ की पूजन सामग्री और व्रत की विधि-     
👉करवा चौथ पर्व की पूजन सामग्री
कुंकुम, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मेंहदी, मिठाई, गंगाजल, चंदन, चावल, सिन्दूर, मेंहदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूँ, शक्कर का बूरा, हल्दी, पानी का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ, दक्षिणा के लिए पैसे।
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सम्पूर्ण सामग्री को एक दिन पहले ही एकत्रित कर लें। व्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहन लें व शृंगार भी कर लें। इस अवसर पर करवा की पूजा-आराधना कर उसके साथ शिव-पार्वती की पूजा का  विधान है, क्योंकि माता पार्वती ने कठिन तपस्या करके शिवजी को प्राप्त कर अखंड सौभाग्य प्राप्त किया था इसलिए शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। करवा चौथ के दिन चंद्रमा की पूजा का धार्मिक और ज्योतिष दोनों ही दृष्टि से महत्व है। व्रत के दिन प्रात: स्नाानादि करने के बाद संकल्प बोल कर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें।
👉करवा चौथ पूजन विधि
1. प्रात: काल में नित्यकर्म से निवृ्त होकर संकल्प लें और व्रत आरंभ करें।
2. व्रत के दिन निर्जला रहे यानि जलपान ना करें।
3. व्रत के दिन प्रात: स्नानादि करने के बाद संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें।
4. प्रात: पूजा के समय मन्त्र के जप से व्रत प्रारंभ करें।
मंत्र: 'मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।'
5. घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर चावलों को पीसे। फिर इस घोल से करवा चित्रित करें। इस रीती को करवा धरना कहा जाता है।
6. शाम के समय, मां पार्वती की प्रतिमा की गोद में श्रीगणेश को विराजमान कर उन्हें लकड़ी के आसार पर बिठाए।
7. मां पार्वती का सुहाग सामग्री आदि से श्रृंगार करें।
8. भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना करें और कोरे करवे में पानी भरकर पूजा करें।
8. सौभाग्यवती स्त्रियां पूरे दिन का व्रत कर व्रत की कथा का श्रवण करें।
9. सायं काल में चंद्रमा के दर्शन करने के बाद ही पति द्वारा अन्न एवं जल ग्रहण करें।
10. पति, सास-ससुर सब का आशीर्वाद लेकर व्रत को समाप्त करें।
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🙏जय माता दी 🙏

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