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Tuesday, 17 February 2026
रत्न धारण कैसे करें?
आपका Personal Year क्या है? 30 सेकंड में कैल्कुलेट करें।
Thursday, 17 February 2022
त्रिक और त्रिकोण भाव की विशेषता
Thursday, 25 November 2021
गायत्री मंत्र में कौन समपुष्ट मंत्र लगाने से क्या लाभ मिलेगा....
Tuesday, 21 September 2021
व्यापार वृद्धि उपाय लाल मिर्च द्वारा
व्यापार वृद्धि के लिए लाल मिर्च से करें यह उपाय, मिलेगा जबरदस्त लाभ 🔯
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हमारे जीवन कई बार ऐसी समस्याएं आ जाती है जिनसे बाहर
निकलने के लिए हमें कई मशक्कतें करनी पड़ती है, उसके
बावजूद भी हम उससे निजात नहीं पात।
ऐसी समस्याओं का समाधान आसान नहीं होता। आप काफी
विचार और कोशिशों के बाद भी इन समस्याओं से बाहर नहीं
निकल पाते।
लेकिन तांत्रिक इस चीज़ का दावा करते हैं कि टोने-टोटकों से
बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है। आज हम
आपको ऐसे ही टोटकों के बारे में बताएंगे जिनका प्रयोग करने से
आपके लिए लाभदायक साबित होगा।
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार लाल मिर्च के साथ कुछ उपाय करने
से आपके रुके हुए कार्य बनने लगते हैं। जी हां लालमिर्च आपके
खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है बल्कि उसके साथ साथ यह
आपकी किस्मत भी चमका सकती है।
आपको बतादें कि इन उपायों में कुछ टोटके हैं और कुछ लोक
मान्यताओं पर आधारित टोटके। इन टोटकों को लोग कई सालों
से करते आए हैं, जो आज भी चले आ रहे हैं।
भूत-प्रेत से बचने के लिए
यदि किसी भी व्यक्ति पर भूत-प्रेत का साया है ऐसा लगने पर
पीली सरसों कुछ दाने उसके ऊपर से उतारकर, जला दें। ऐसा
करने से उस व्यक्ति पर असर कर रही सभी नकारात्मक शक्तियों
का असर खत्म हो जाता है।
शत्रु को मित्र बनाने के लिए
यदि आपको कोई शत्रु परेशान कर रहा है तो पीली सरसों के तेल
में हल्दी मिलाएं। और उस तेल का दीपक जलाकर 'ऊं बगलायै
नमः' मंत्र का जप करें। ऐसा लगातार एक हफ्ते तक करने से
व्यक्ति शत्रुता का व्यवहार छोड़कर आपसे मित्रवत व्यवहार करने लगेगा।
व्यापार में वृद्धि के लिए
व्यापार में वृद्धि करने के लिए मिट्टी के तीन दीपक में पीली सरसों के दाने, तिल, साबुत नमक और साबुत धनिया मिलाकर अपने व्यापार स्थल पर रख दें। इससे व्यापार में वृद्धि होने को साथ-साथ ग्राहकों पर भी असर दिखाई देगा।
अटके हुए काम पूरे करने के लिए
यदि किसी सरकारी उद्योग या विभाग में आपको कोई काम अटक गया है और आप उसके नहीं होने से परेशान हैं तो पीली सरसों को आक के दूध में मिलाकर हवन करें। हवन करने के बाद देखेंगे कि आपको फायदा होने लगा।
गृह क्लेश खत्म करने के लिए
जिस घर में रोज़-रोज़ लड़ाई झगड़े होते है, उस घर में लक्ष्मी का वास नहीं होता।
क्लेश दूर करने के लिए पीली सरसों में गुड़, शहद, गाय का घी, चंदन, गूग्गल, शिलाजीत, सलई की धूप तथा नागरमोथा मिलाकर हवन करें। ऐसा करने से सुख-शांति का माहौल बन जाता है।
और जादा जानकारी और समाधान और उपाय या भविष्य फल या रत्न विश्लेषण या वास्तुदोष सम्बन्धित या शारीरिक रोग या प्रेम विवाह लव मैरिज अरेंज मैरिज कोर्ट मैरिज या कुंण्डली विश्लेषण के लिए सम्पर्क करे।
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Sunday, 15 August 2021
कैंसर रोग और कारक ग्रह
किस ग्रह के कारण कैंसर रोग होते हैंकुण्ष्ली् क्या आप अपनी लाईफ को लेकर चिंतित हैं।
आपके बनते कार्य बिगड़ रहे हैं। आप घर, परिवार, व्यापार, नौकरी में परेशानी आ रही है।, कन्या/पुरुष विवाह में देरी हो रही है। आप एक ही स्थान पर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। बस WhatsApp करें हमारे no. 9333112719 पर। 💯% आपके समस्या का समाधान देंगे।
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Saturday, 7 August 2021
हर मुसीबत से छुटकारा दिलाने के टोटके
हर मुसीबत से छुटकारा दिलाने वाले टोटके
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार व्यक्ति की रक्षा के लिए अनंत काल से रक्षा सूत्र, रक्षा कवच, रक्षा रेखा, रक्षा यंत्र आदि का उपयोग होता आया है। यह सदैव दुर्भिक्षों, अनहोनी घटनाओं, कुदृष्टि, मारण, उच्चाटन, विद्वेषण आदि तांत्रिक प्रयोगों से गुप्त रूप से सुरक्षा का काम करते रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रक्षा-सुरक्षा क्रम-उपक्रम में ही कीलन का उपयोग देखने को मिलता है।
तांत्रिक विद्या के अनुसार भांति-भांति की कीलों से तंत्र क्रियाओं द्वारा किसी स्थान को कीलने से अर्थात है वहां पर सुरक्षा कवच को स्थापित करना। बताया जाता है कीलन सुरक्षा की दृष्टि से तो किया ही जाता है परंतु इसके विपरीत ईर्ष्या-द्वेष, अनहित की भावना, शत्रुवत व्यवहार आदि के चलते भी स्थान का कीलन कर दिया जाता है।
कहने का मतलब है कि कीलन से अर्थ है सुरक्षा कवच। बांधने की क्रिया अर्थात किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान को सुरक्षा कवच में बाधने को कीलन या स्तम्भन कहते हैं। तो वहीं बंधे हुए को मुक्त करवाने की क्रिया को उत्कीलन कहा जाता है।
तंत्र विद्या की मानें तो कीलन सकारात्मक और नकारात्मक दो प्रकार से प्रयोग में लिए जाते हैं, उदाहरण:- किसी के काम से अन्य लोगों को हानि हो रही हो तो कीलन की विशेष प्रक्रिया द्वारा उसके काम को रोक दिया जाता है या दूसरे शब्दों में कहे तो कील दिया जाता है या स्तम्भित कर दिया जाता है।
साधना विधि-
इस मंत्र की साधना आप कभी भी शुरू कर सकते है। कीलन मंत्र साधना के लिए मंगलवार या शनिवार अच्छा रहता है। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करने से इसका प्रभाव ओर बढ़ जाट है। आपको रोजाना दिन में एक बार इसका जाप करना होता है। पूर्व की तरफ मुख करके रुद्राक्ष की माला से किसी भी आसन का उपयोग कर इसका जप करें। कीलन मंत्र जपने के वक्त दो अगरबत्ती,कुछ पुष्प और कोई सी भी मिठाई पास रखनी चाहिए। इस तरह करने से कीलन मंत्र सिद्ध हो जाता है। ध्यान रहे जब भी किसी साधना को शुरू करना हो तो कीलन मंत्र का केवल 11 बार मंत्र जप करें। ऐसा करने से आपके सभी विघ्न, बाधाओं से रक्षा मिलेगी।
कीलन मंत्र-👉👉👉
*सिल्ली सिद्धिर वजुर के ताला, सात सौ देवी लूरे अकेला, धर दे वीर,पटक दे वीर,पछाड़ दे वीर, अरे-अरे विभीषण बल देखो तेरा, शरीर बाँध दे मेरा, मेरी भक्ति,गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ,इश्वरो वाचा!
*आस कीलूं पास कीलूं, कीलूं अपनी काया जागदा मसान कीलूं बैठी कीलूं छाया इसर का कोट बर्मा की थाली मेरे घाट पिंड का हनुमान वीर रखवाला!
*हनुमन् सर्वधर्मज्ञ, सर्वकार्य विधायक। अकस्मादागतोत्पातं नाशयाशु नमोऽस्तुते।।🕉️
कहा जाता है जो व्यक्ति पर भूत-प्रेत या जादू टोने या अभिचार कर्म से ग्रसित हो उसक हित के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है। इसके अलावा इस मंत्र का प्रयोग किसी मकान अथवा व्यापारिक प्रतिष्ठान पर जिसको किसी शत्रु ने बांध दिया हो, उसके बंधन को तोड़ने के लिए इस मंत्र अति प्रभावशाली सिद्ध होता है। ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए लगातार 11 दिन तक प्रतिदिन इस मंत्र का 3000 बार जप करें।
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*सर्वाबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याऽखिलेश्वरी। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम् ।।🕉️
श्री दुर्गा सप्तशती का यह मंत्र अत्यन्त प्रभावशाली है।
Monday, 26 July 2021
नक्षत्र और उनके प्रकार शुभ/अशुभ कार्य
स्वभाव के आधार पर नक्षत्रों को सात श्रेणियों में बाँटा गया है :
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Monday, 9 November 2020
विवाह कहां होगी शंका समाधान
*ज्योतिष चर्चा*
*कन्या विवाह संबंधित शंका समाधान*
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*विवाह कहां होगा*
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माता-पिता अपनी कन्या का विवाह करने के लिए वर की कुंडली का गुण मिलान करते हैं। कन्या के भविष्य के प्रति चिंतित माता-पिता का यह कदम उचित है। किंतु, इसके पूर्व उन्हें यह देखना चाहिए कि लड़की का विवाह किस उम्र में, किस दिशा में तथा कैसे घर में होगा? उसका पति किस वर्ण का, किस सामाजिक स्तर का तथा कितने भाई-बहनों वाला होगा? लड़की की जन्म लग्न कुंडली से उसके होने वाले पति एवं ससुराल के विषय में सब कुछ स्पष्टतः पता चल सकता है। ज्योतिष विज्ञान में फलित शास्त्र के अनुसार लड़की की जन्म लग्न कुंडली में लग्न से सप्तम भाव उसके जीवन, पति, दाम्पत्य जीवन तथा वैवाहिक संबंधों का भाव है। इस भाव से उसके होने वाले पति का कद, रंग, रूप, चरित्र, स्वभाव, आर्थिक स्थिति, व्यवसाय या कार्यक्षेत्र, परिवार से संबंध कि आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यहां सप्तम भाव के आधार पर कन्या के विवाह से संबंधित विभिन्न तथ्यों का विश्लेषण प्रस्तुत है।
ससुराल की दूरी:
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सप्तम भाव में अगर वृष, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि स्थित हो, तो लड़की की शादी उसके जन्म स्थान से 90 किलोमीटर के अंदर ही होगी। यदि सप्तम भाव में चंद्र, शुक्र तथा गुरु हों, तो लड़की की शादी जन्म स्थान के समीप होगी। यदि सप्तम भाव में चर राशि मेष, कर्क, तुला या मकर हो, तो विवाह उसके जन्म स्थान से 200 किलोमीटर के अंदर होगा। अगर सप्तम भाव में द्विस्वभाव राशि मिथुन, कन्या, धनु या मीन राशि स्थित हो, तो विवाह जन्म स्थान से 80 से 100 किलोमीटर की दूरी पर होगा। यदि सप्तमेश सप्तम भाव से द्वादश भाव के मध्य हो, तो विवाह विदेश में होगा या लड़का शादी करके लड़की को अपने साथ लेकर विदेश चला जाएगा।
शादी की आयु:
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यदि जातक या जातका की जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में सप्तमेश बुध हो और वह पाप ग्रह से प्रभावित न हो, तो शादी 13 से 18 वर्ष की आयु सीमा में होता है। सप्तम भाव में सप्तमेश मंगल पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो शादी 18 वर्ष के अंदर होगी। शुक्र ग्रह युवा अवस्था का द्योतक है। सप्तमेश शुक्र पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो 25 वर्ष की आयु में विवाह होगा। चंद्रमा सप्तमेश होकर पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो विवाह 22 वर्ष की आयु में होगा। बृहस्पति सप्तम भाव में सप्तमेश होकर पापी ग्रहों से प्रभावित न हो, तो शादी 27-28 वें वर्ष में होगी। सप्तम भाव को सभी ग्रह पूर्ण दृष्टि से देखते हैं तथा सप्तम भाव में शुभ ग्रह से युक्त हो कर चर राशि हो, तो जातिका का विवाह दी गई आयु में संपन्न हो जाता है। यदि किसी लड़की या लड़के की जन्मकुंडली में बुध स्वराशि मिथुन या कन्या का होकर सप्तम भाव में बैठा हो, तो विवाह बाल्यावस्था में होगा।
विवाह वर्ष ज्ञात करने की ज्योतिषीय विधि:
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आयु के जिस वर्ष में गोचरस्थ गुरु लग्न, तृतीय, पंचम, नवम या एकादश भाव में आता है, उस वर्ष शादी होना निश्चित समझना चाहिए। परंतु शनि की दृष्टि सप्तम भाव या लग्न पर नहीं होनी चाहिए। अनुभव में देखा गया है कि लग्न या सप्तम में बृहस्पति की स्थिति होने पर उस वर्ष शादी हुई है।
विवाह कब होगा यह जानने की दो विधियां यहां प्रस्तुत हैं। जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में स्थित राशि अंक में 10 जोड़ दें। योगफल विवाह का वर्ष होगा। सप्तम भाव पर जितने पापी ग्रहों की दृष्टि हो, उनमें प्रत्येक की दृष्टि के लिए 4-4 वर्ष जोड़ योगफल विवाह का वर्ष होगा।
जहां तक विवाह की दिशा का प्रश्न है, ज्योतिष के अनुसार गणित करके इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जन्मांग में सप्तम भाव में स्थित राशि के आधार पर शादी की दिशा ज्ञात की जाती है। उक्त भाव में मेष, सिंह या धनु राशि एवं सूर्य और शुक्र ग्रह होने पर पूर्व दिशा, वृष, कन्या या मकर राशि और चंद्र, शनि ग्रह होने पर दक्षिण दिशा, मिथुन, तुला या कुंभ राशि और मंगल, राहु, केतु ग्रह होने पर पश्चिम दिशा, कर्क, वृश्चिक, मीन या राशि और बुध और गुरु ग्रह होने पर उत्तर दिशा की तरफ शादी होगी। अगर जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में कोई ग्रह न हो और उस भाव पर अन्य ग्रह की दृष्टि न हो, तो बलवान ग्रह की स्थिति राशि में शादी की दिशा समझनी चाहिए। एक अन्य नियम के अनुसार शुक्र जन्म लग्न कुंडली में जहां कहीं भी हो, वहां से सप्तम भाव तक गिनें। उस सप्तम भाव की राशि स्वामी की दिशा में शादी होनी चाहिए। जैसे अगर किसी कुंडली में शुक्र नवम भाव में स्थित है, तो उस नवम भाव से सप्तम भाव तक गिनें तो वहां से सप्तम भाव वृश्चिक राशि हुई। इस राशि का स्वामी मंगल हुआ। मंगल ग्रह की दिशा दक्षिण है। अतः शादी दक्षिण दिशा में करनी चाहिए।
पति कैसा मिलेगा:
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ज्योतिष विज्ञान में सप्तमेश अगर शुभ ग्रह (चंद्रमा, बुध, गुरु या शुक्र) हो या सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तम भाव को देख रहा हो, तो लड़की का पति सम आयु या दो-चार वर्ष के अंतर का, गौरांग और सुंदर होना चाहिए। अगर सप्तम भाव पर या सप्तम भाव में पापी ग्रह सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु का प्रभाव हो, तो बड़ी आयु वाला अर्थात लड़की की उम्र से 5 वर्ष बड़ी आयु का होगा। सूर्य का प्रभाव हो, तो गौरांग, आकर्षक चेहरे वाला, मंगल का प्रभाव हो, तो लाल चेहरे वाला होगा। शनि अगर अपनी राशि का उच्च न हो, तो वर काला या कुरूप तथा लड़की की उम्र से काफी बड़ी आयु वाला होगा। अगर शनि उच्च राशि का हो, तो, पतले शरीर वाला गोरा तथा उम्र में लड़की से 12 वर्ष बड़ा होगा।
सप्तमेश अगर सूर्य हो, तो पति गोल मुख तथा तेज ललाट वाला, आकर्षक, गोरा सुंदर, यशस्वी एवं राजकर्मचारी होगा। चंद्रमा अगर सप्तमेश हो, तो पति शांत चित्त वाला गौर वर्ण का, मध्यम कद तथा, सुडौल शरीर वाला होगा। मंगल सप्तमेश हो, तो पति का शरीर बलवान होगा। वह क्रोधी स्वभाव वाला, नियम का पालन करने वाला, सत्यवादी, छोटे कद वाला, शूरवीर, विद्वान तथा भ्रातृ-प्रेमी होगा तथा सेना, पुलिस या सरकारी सेवा में कार्यरत होगा।
पति कितने भाई-बहनों वाला होगा:
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लड़की की जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव से तृतीय भाव अर्थात नवम भाव उसके पति के भाई-बहन का स्थान होता है। उक्त भाव में स्थित ग्रह तथा उस पर दृष्टि डालने वाले ग्रह की संख्या से 2 बहन, मंगल से 1 भाई व 2 बहन, बुध से 2 भाई 2 बहन वाला कहना चाहिए। लड़की की जन्मकुंडली में पंचम भाव उसके पति के बड़े भाई-बहन का स्थान है। पंचम भाव में स्थित ग्रह तथा दृष्टि डालने वाले ग्रहों की कुल संख्या उसके पति के बड़े भाई-बहन की संख्या होगी। पुरुष ग्रह से भाई तथा स्त्री ग्रह से बहन समझना चाहिए।
पति का मकान कहां एवं कैसा होगा:
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लड़की की जन्म लग्न कुंडली में उसके लग्न भाव से तृतीय भाव पति का भाग्य स्थान होता है। इसके स्वामी के स्वक्षेत्री या मित्रक्षेत्री होने से पंचम और राशि वृद्धि से या तृतीयेश से पंचम जो राशि हो, उसी राशि का श्वसुर का गांव या नगर होगा। प्रत्येक राशि में 9 अक्षर होते हैं। राशि स्वामी यदि शत्रुक्षेत्री हो, तो प्रथम, द्वितीय अक्षर, सम राशि का हो, तो तृतीय, चतुर्थ अक्षर मित्रक्षेत्री हो, तो पंचम, षष्ठम अक्षर, अपनी ही राशि का हो तो सप्तम, अष्टम अक्षर, उच्च क्षेत्री हो, तो नवम अक्षर प्रसिद्ध नाम होगा। तृतीयेश के शत्रुक्षेत्री होने से जिस राशि में हो उससे चतुर्थ राशि ससुराल या भवन की होगी। यदि तृतीय से शत्रु राशि में हो और तृतीय भाव में शत्रु राशि में पड़ रहा हो ,तो दसवी राशि ससुर के गांव की होगी। लड़की की कुंडली में दसवां भाव उसके पति का भाव होता है। दशम भाव अगर शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, या दशमेश से युक्त या दृष्ट हो, तो पति का अपना मकान होता है। राहु, केतु, शनि, से भवन बहुत पुराना होगा। मंगल ग्रह में मकान टूटा होगा। सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु एवं शुक्र से भवन सुंदर, सीमेंट का दो मंजिला होगा। अगर दशम स्थान में शनि बलवान हो, तो मकान बहुत विशाल होगा।
पति की नौकरी:
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लड़की की जन्म लग्न कुंडली में चतुर्थ भाव पति का राज्य भाव होता है। अगर चतुर्थ भाव बलयुक्त हो और चतुर्थेश की स्थिति या दृष्टि से युक्त सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र की स्थिति या चंद्रमा की स्थिति उत्तम हो, तो नौकरी का योग बनता है।
पति की आयु:
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लड़की के जन्म लग्न में द्वितीय भाव उसके पति की आयु भाव है। अगर द्वितीयेश शुभ स्थिति में हो या अपने स्थान से द्वितीय स्थान को देख रहा हो, तो पति दीर्घायु होता है। अगर द्वितीय भाव में शनि स्थित हो या गुरु सप्तम भाव, द्वितीय भाव को देख रहा हो, तो भी पति की आयु 75 वर्ष की होती है।
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Saturday, 8 August 2020
महामृत्युंजय मंत्र जप करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है
Astha Jyotish Asansol
Vastu Guru Mkpoddar
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!
कौन कैसे पढ़े महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय के अलग-अलग मंत्र हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार जो भी मंत्र चाहें चुन लें और नित्य पाठ में या आवश्यकता के समय प्रयोग में लाएँ। मंत्र निम्नलिखित हैं-
तांत्रिक बीजोक्त मंत्र- ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ ॥ ( साधकों के लिए)
संजीवनी मंत्र : ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूर्भवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनांन्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ। ( व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष फलदायी)
कालजयी मंत्र: ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ॥ ( समस्त गृहस्थों के लिए। विशेषकर रोगों से और कष्टों से मुक्ति के लिए)
रोगों से मुक्ति के लिए बीज मंत्र
रोगों से मुक्ति के लिए यूं तो महामृत्युंजय मंत्र विस्तृत है लेकिन आप बीज मंत्र के स्वस्वर जाप करके रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। इस बीज मंत्र को जितना तेजी से बोलेंगे आपके शरीर में कंपन होगा और यही औषधि रामबाण होगी। जाप के बाद शिवलिंग पर काले तिल और सरसो का तेल ( तीन बूंद) चढाएं।
Vastu Guru ( Mkpoddar)
ज्योतिष और वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.
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ॐ हौं जूं सः ( तीन माला)
महामृत्युंजय मंत्र: रखें सावधानी
1. महामंत्र का उच्चारण शुद्ध रखें
2. एक निश्चित संख्या में जप करें।
3. मंत्र का मानसिक जाप करें।
4. पूरे विधि-विधान और धूप-दीप के साथ जाप करें
5. रुद्राक्ष की माला पर ही जप करें।
6. माला को गोमुखी में रखें।
7. जप काल में महामृत्युंजय यंत्र की पूजा करें।
8. महामृत्युंजय के जप कुशा के आसन पर बैठकर करें।
9. जप काल में दुग्ध मिले जल से शिवजी का अभिषेक करते रहें।
10. महामृत्युंजय मंत्र का जाप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके ही करें।
11. जितने दिन जप करें इस समय ब्ररहामचर का पालन करें।
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Thursday, 6 August 2020
Kundli में उच्च शिक्षा प्राप्ति योग
ॐ।
🙏जय माता दी🙏
Vastu Guru //Mk Poddar//
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कुंडली मे उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए ग्रह योग के बारे में बता रहा हूँ आप अपनी कुंडली से देख कर पता कर सकते है ।
1-यदि गुरु केंद्र(1,4,7व 10) में हो तो जातक बुद्धिमान होता है। गुरु उच्च अथवा स्वग्रही हो तो और अच्छा फल देता है।
2-पंचम भाव में सूर्य सिंह राशि में हो तो जातक मनोनुकूल शिक्षा पूर्ण करता है।
3-बुध पंचम में हो तथा पंचमेश बली होकर केंद्र में स्थित हो तथा शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो जातक बुद्धिमान होता है।
4-पंचमेश उच्च का केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो तो जातक पूर्ण शिक्षा पाता है।
5-गुरु शुक्र व बुध यदि केंद्र व त्रिकोण में एक साथ या अलग-अलग स्थित हों तथा गुरु उच्च, स्वग्रही या मित्र क्षेत्र में हो तो सरस्वती योग बनता है। ऐसे जातक पर सरस्वती की विशेष कृपा होती है।
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6-दशमेश व पंचमेश का स्थान परिवर्तन अर्थात् दशम भाव का स्वामी पंचम में तथा पंचम भाव का स्वामी दशम में हो तो व्यक्ति अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है।
7-बुध, चंद्रमा व मंगल पर शुक्र या गुरु की दृष्टि हो तो भी जातक बड़ा बुद्धिमान होता है।
8-पंचम भाव में गुरु हो तो जातक अनेक शास्त्रों का ज्ञाता पुत्र व मित्रों से समृद्ध, बुद्धिमान व धैर्यवान होता है।
9-लग्नेश यदि 12वें या 8वें भाव में हो तो जातक सिद्धि प्राप्त करता है और वह विद्या विशारद होता है।
10-चतुर्थेश सप्तम व लग्न में हो तो जातक बहुत सी विद्या का ज्ञाता होता है।
11-चंद्रमा से गुरु त्रिकोण में हो, बुध से मंगल त्रिकोण में और गुरु से बुध एकादश स्थान में हो तो जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करके बहुत सा धन अर्जन करता है।
12-शिक्षा प्राइज़ में सूर्य चंद्र, बुध, गुरु, मंगल व शनि ग्रह की विशेष भूमिका है। इसके अतिरिक्त लग्नेश, पंचमेश व नवमेश तथा इन भावों का विश्लेषण भी उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु करना चाहिए। लग्नेश निर्बल हुआ तो बुद्धि व भाग्य व्यर्थ हो जाएंगे, यदि पंचम भाव निर्बल हुआ तो शरीर और भाग्य क्या करेंगे और यदि भाग्य कमजोर हुआ तो शरीर व बुद्धि व्यर्थ होंगे।
13-पंचमेश शुभ ग्रह हो और पंचमेश का नवांशपति भी शत्रु ग्रहों से युत व दृष्टा न हो तो उच्च शिक्षा प्राप्त होती है।
14-गुरु केंद्र या त्रिकोण में होकर शनि, राहु, केतु से युत या दृष्ट हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त कर विद्वान बनता है।
15-गुरु द्वितीयेश होकर बलवान सूर्य व शुक्र से दृष्ट हो तो जातक व्याकरण शास्त्र का ज्ञाता होता है।
16-पंचम भाव व पंचमेश बुध व मंगल के प्रभाव में हो तो जातक व्?यापार संबंधी उच्?च शिक्षा प्राप्त करता है।
17-धन भाव में मंगल शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या धनभाव में चंद्र, मंगल की युति हो व बुध द्वारा दृष्ट हो तो जातक गणित विषय का ज्ञाता होता है।
18-यदि द्वितीयेश से 8वें, 12वें शुभ ग्रह हों तो जातक प्रखर विद्वान होता है।
19-लग्नेश, पंचमेश, नवमेश में परस्?पर युति या दृष्टि संबंध हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।
20-गुरु व चंद्रमा एक-दूसरे के घर में हो तो चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि हो तो सरस्वती योग होता है, जिससे जातक साहित्य, कला व काव्य में उच्च शिक्षा पाकर लोकप्रिय होता है।
21- गुरु लग्न में हो तथा चंद्र से तृतीय सूर्य, मंगल, बुध हो तो जातक विज्ञान विषय में उच्च शिक्षा पाकर वैज्ञानिक बनता है।
22-यदि मेष लग्न हो और पंचम में बुध तथा सूर्य पर गुरु की दृष्टि पड़े तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
23-यदि वृष लग्न हो और उसमें सूर्य बुध की युति लग्न, चतुर्थ या अष्टम में हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
24-यदि मिथुन लग्न हो और लग्न में शनि, तृतीय में शुक्र तथा नवम में गुरु स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
25-यदि कर्क लग्न हो और उसमें लग्न में बुध, गुरु व शुक्र की युति हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
26-यदि सिंह लग्न हो और मंगल-गुरु की युति चतुर्थ, पंचम या एकादश भाव में हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
27-यदि कन्या लग्न हो और उसमें एकादश भाव में गुरु, चंद्र तथा नवम भाव में बुध स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
28-यदि तुला लग्न हो और अष्टम में शनि गुरु द्वारा दृष्ट हो तथा नवम में बुध स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
29-यदि वृश्चिक लग्न हो और उसमें बुध सूर्य हो तथा नवम भाव में गुरु चंद्र स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
30- यदि धनु लग्न हो और उसमें गुरु हो तथा पंचम में मंगल व चंद्र स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
31- यदि मकर लग्न हो और उसमें शुक्र-मंगल की युति हो तथा पंचम भाव में चंद्र गुरु द्वारा दृष्ट हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
32- यदि कुंभ लग्न और एकादश भाव में चंद्र तथा षष्ठ भाव में गुरु स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
33- यदि मीन लग्न हो और उसमें गुरु षष्ठ, शुक्र अष्ठम, शनि नवम तथा मंगल-चंद्र एकादश भाव में हों तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
(आप अपनी कुण्डली में उक्त योगों को विचारकर शिक्षा संबंधी विश्लेषण कर सकते हैं।)गुरु कृपा केवलं।।WP. 9333112719 🙏
Monday, 3 August 2020
इन वास्तु दोष के कारण होती है, (मधुमेह)/Daivitig शुगर की बीमारी
vastujyotish.samadhan
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