Wednesday, 15 June 2022

हस्त रेखा के द्वारा जन्म कुण्डली बनाएं आसान टिप्स

हाथ की रेखा देख कर जन्म कुंडली बनाने की विधि
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719 जानें कैसे.... कभी कभी किसी कारणवश जन्म तारीख और दिन माह वार आदि का पता नही होता है, कितनी ही कोशिशि की जावे लेकिन जन्म तारीख का पता नही चल पाता है, जातक को सिवाय भटकने के और कुछ नही प्राप्त होता है, किसी ज्योतिषी से अगर अपनी जन्म तारीख निकलवायी भी जावे तो वह क्या कहेगा, इसका भी पता नही होता है, इस कारण के निवारण के लिये आपको कहीं और जाने की जरूरत नही है, किसी भी दिन उजाले में बैठकर एक सूक्षम दर्शी सीसा लेकर बैठ जावें, और अपने दोनो हाथों बताये गये नियमों के अनुसार देखना चालू कर दें, साथ में एक पेन या पैंसिल और कागज भी रख लें, तो देखें कि किस प्रकार से अपना हाथ जन्म तारीख को बताता है। अपनी वर्तमान की आयु का निर्धारण करें हथेली मे चार उंगली और एक अगूंठा होता है, अंगूठे के नीचे शुक्र पर्वत, फ़िर पहली उंगली तर्जनी उंगली की तरफ़ जाने पर अंगूठे और तर्जनी के बीच की जगह को मंगल पर्वत, तर्जनी के नीचे को गुरु पर्वत और बीच वाली उंगली के नीचे जिसे मध्यमा कहते है, शनि पर्वत, और बीच वाली उंगले के बाद वाली रिंग फ़िंगर या अनामिका के नीचे सूर्य पर्वत, अनामिका के बाद सबसे छोटी उंगली को कनिष्ठा कहते हैं, इसके नीचे बुध पर्वत का स्थान दिया गया है, इन्ही पांच पर्वतों का आयु निर्धारण के लिये मुख्य स्थान माना जाता है, उंगलियों की जड से जो रेखायें ऊपर की ओर जाती है, जो रेखायें खडी होती है, उनके द्वारा ही आयु निर्धारण किया जाता है, गुरु पर्वत से तर्जनी उंगली की जड से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें जो कटी नही हों, बीचवाली उंगली के नीचे से जो शनि पर्वत कहलाता है, से ऊपर की ओर जाने वाली रेखायें, की गिनती करनी है,ध्यान रहे कि कोई रेखा कटी नही होनी चाहिये,शनि पर्वत के नीचे वाली रेखाओं को ढाई से और बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलने वाली रेखाओं को डेढ से, गुणा करें,फ़िर मंगल पर्वत के नीचे से ऊपर की ओर जाने वाली रेखाओं को जोड लें, इनका योगफ़ल ही वर्तमान उम्र होगी। https://asthajyotish.business.site अपने जन्म का महिना और सूर्य राशि को पता करने का नियम। अपने दोनो हाथों की तर्जनी उंगलियों के तीसरे पोर और दूसरे पोर में लम्बवत रेखाओं को २३ से गुणा करने पर जो संख्या आये, उसमें १२ का भाग देने पर जो संख्या शेष बचती है,वही जातक का जन्म का महिना और उसकी राशि होती है, महिना और राशि का पता करने के लिये इस प्रकार का वैदिक नियम अपनाया जा सकता है:- १-बैशाख-मेष राशि २.ज्येष्ठ-वृष राशि ३.आषाढ-मिथुन राशि ४.श्रावण-कर्क राशि ५.भाद्रपद-सिंह राशि ६.अश्विन-कन्या राशि ७.कार्तिक-तुला राशि ८.अगहन-वृश्चिक राशि ९.पौष-धनु राशि १०.माघ-मकर राशि ११.फ़ाल्गुन-कुम्भ राशि १२.चैत्र-मीन राशि इस प्रकार से अगर भाग देने के बाद शेष १ बचता है तो बैसाख मास और मेष राशि मानी जाती है,और २ शेष बचने पर ज्येष्ठ मास और वृष राशि मानी जाती है। हाथ में राशि का स्पष्ट निशान भी पाया जाता है। प्रकृति ने अपने द्वारा संसार के सभी प्राणियों की पहिचान के लिये अलग अलग नियम प्रतिपादित किये है,जिस प्रकार से जानवरों में अपनी अपनी प्रकृति के अनुसार उम्र की पहिचान की जाती है,उसी प्रकार मनुष्य के शरीर में दाहिने या बायें हाथ की अनामिका उंगली के नीचे के पोर में सूर्य पर्वत पर राशि का स्पष्ट निशान पाया जाता है। उस राशि के चिन्ह के अनुसार महिने का उपरोक्त तरीके से पता किया जा सकता है। पक्ष और दिन का तथा रात के बारे में ज्ञान करना।। वैदिक रीति के अनुसार एक माह के दो पक्ष होते है,किसी भी हिन्दू माह के शुरुआत में कृष्ण पक्ष शुरु होता है,और बीच से शुक्ल पक्ष शुरु होता है,व्यक्ति के जन्म के पक्ष को जानने के लिये दोनों हाथों के अंगूठों के बीच के अंगूठे के विभाजित करने वाली रेखा को देखिये,दाहिने हाथ के अंगूठे के बीच की रेखा को देखने पर अगर वह दो रेखायें एक जौ का निशान बनाती है, तो जन्म शुक्ल पक्ष का जानना चाहिये। और जन्म दिन का माना जाता है, इसी प्रकार अगर दाहिने हाथ में केवल एक ही रेखा हो, और बायें हाथ में अगर जौ का निशान हो तो जन्म शुक्ल पक्ष का और रात का जन्म होता है,अगर दाहिने और बायें दोनो हाथों के अंगूठों में ही जौ का निशान हो तो जन्म कृष्ण पक्ष रात का मानना चाहिये,। साधारणत: दाहिने हाथ में जौ का निशान शुक्ल पक्ष और बायें हाथ में जौ का निशान कृष्ण पक्ष का जन्म बताता है। जन्म तारीख की गणना। मध्यमा उंगली के दूसरे पोर में तथा तीसरे पोर में जितनी भी लम्बी रेखायें हों,उन सबको मिलाकर जोड लें,और उस जोड में ३२ और मिला लें,फ़िर ५ का गुणा कर लें,और गुणनफ़ल में १५ का भाग देने जो संख्या शेष बचे वही जन्म तारीख होती है। दूसरा नियम है कि अंगूठे के नीचे शुक्र क्षेत्र कहा जाता है,इस क्षेत्र में खडी रेखाओं को गुना जाता है,जो रेखायें आडी रेखाओं के द्वारा काटी गयीं हो,उनको नही गिनना चाहिये,इन्हे ६ से गुणा करने पर और १५ से भाग देने पर शेष मिली संख्या ही तिथि का ज्ञान करवाती है,यदि शून्य बचता है तो वह पूर्णमासी का भान करवाती है,१५ की संख्या के बाद की संख्या को कृष्ण पक्ष की तिथि मानी जाती है। जन्म वार का पता करना। अनामिका के दूसरे तथा तीसरे पोर में जितनी लम्बी रेखायें हों,उनको ५१७ से जोडकर ५ से गुणा करने के बाद ७ का भाग दिया जाता है,और जो संख्या शेष बचती है वही वार की संख्या होती है। १ से रविवार २ से सोमवार तीन से मंगलवार और ४ से बुधवार इसी प्रकार शनिवार तक गिनते जाते है। जन्म समय और लगन की गणना। सूर्य पर्वत पर तथा अनामिका के पहले पोर पर,गुरु पर्वत पर तथा मध्यमा के प्रथम पोर पर जितनी खडी रेखायें होती है,उन्हे गिनकर उस संख्या में ८११ जोडकर १२४ से गुणा करने के बाद ६० से भाग दिया जाता है,भागफ़ल जन्म समय घंटे और मिनट का होता है,योगफ़ल अगर २४ से अधिक का है,तो २४ से फ़िर भाग दिया जाता है। इस तरह घंटे-मि. आदि जन्मादि काल प्राप्त हो जाता है... www.asthajyotish.in अब इन सभी से सहज और पूर्ण जन्म कुंंडली तैयार करके, जाचक का सटीक फलित भी किया जा सकता है।

Sunday, 12 June 2022

10 भाव से जाने किस क्षेत्र में सफल होंगे

बहुत से लोगों के मन में दुविधा होती है कि उसे @नौकरी करना चाहिए या कि व्यापार।
@नौकरी में प्राइवेट नौकरी करना चाहिए या सरकारी? https://asthajyotish.business.site व्यापार फलीभूत होगा तो कौनसा व्यापार करना चाहिए? इन्हीं प्रश्नों के समाधान के लिए यहां प्रस्तुत है कुछ सामान्य जानकारी। कुंडली में क्या है नौकरी या व्यापरा का भाव : कहते हैं कि दशभ भाव से पता चलता है कि व्यक्ति क्या करेगा, ग्यारहवें भाव से पता चलता है कि व्यक्ति क्या कमाएगा और दूसरे भाव से पता चलता है कि व्यक्ति कितना बचा पाएगा। कुंडली में दशम भाव से देखा जाता है कि व्यक्ति क्या करेगा। दशम भाव : दशम भाव के स्वामी को दशमेश या कर्मेश या कार्येश कहते हैं। इस भाव से यह देखा जाता है कि व्यक्ति सरकारी नौकरी करेगा अथवा प्राइवेट, या व्यापार करेगा तो कौन सा, उसे किस क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी। सप्तम भाव साझेदारी का होता है। इसमें मित्र ग्रह हों तो पार्टनरशिप से लाभ। शत्रु ग्रह हो तो पार्टनरशिप से नुकसान। मित्र ग्रह सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु होते हैं। शनि, मंगल, राहु, केतु ये आपस में मित्र होते हैं। http://asthajyotish.in WP. 9333112719 सूर्य, बुध, गुरु और शनि दशम भाव के कारक ग्रह हैं। दशम भाव में केवल शुभ ग्रह हों तो अमल कीर्ति नामक योग होता है, किंतु उसके अशुभ भावेश न होने तथा अपनी नीच राशि में न होने की स्थिति में ही इस योग का फल मिलेगा। दशमेश के बली होने से जीविका की वृद्धि और निर्बल होने पर हानि होती है। लग्न से द्वितीय और एकादश भाव में बली एवं शुभ ग्रह हो तो जातक व्यापार से अधिक धन कमाता है। धनेश और लाभेश का परस्पर संबंध धनयोग का निर्माण करता है। दशम भाव का कारक यदि उसी भाव में स्थित हो अथवा दशम भाव को देख रहा हो तो जातक को आजीविका का कोई न कोई साधन अवश्य मिल जाता है। दशम भावस्थ नवग्रह फलः- सूर्यः- दसवें भाव में स्थित वृश्चिक राशि का सूर्य चिकित्सा अधिकारी बनाता है। मेष, कर्क, सिंह या धनु राशि का सूर्य सेना, पुलिस या आवकारी अधिकारी बनाता है। चंद्रः- शुभ प्रभाव में बली चंद्र यदि दशमस्थ हो तो धनी कुल की स्त्रियों से लाभ होता है। यदि ऐसा व्यक्ति दैनिक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं का व्यापार करे तो लाभप्रद होता है। चंद्र से मंगल या शनि की युति विफलता का सूचक है। मंगलः- मेष, सिंह, वृश्चिक या धनु राशि का मंगल जातक को प्राइवेट चिकित्सक और सर्जन बनाता है। ऐसे डाक्टरों को मान-सम्मान और धन की प्राप्ति होती है। मंगल का सूर्य से संबंध हो तो व्यक्ति सुनार या लोहार का काम करता है। बुधः- लग्नेश, द्वितीयेश, पंचमेश, नवमेश या दशमेश होकर कन्या या सिंह राशि का बुध गुरु से दृष्ट या युत हो तो व्यक्ति प्रोफेसर या लेक्चरर बनकर धन अर्जित करता है। बुध बैंकर भी बनाता है। बुध शुक्र के साथ या शुक्र की राशि में हो तो जातक फिल्म या विज्ञापन से संबंधित व्यवसाय करता है। गुरुः- गुरु का संबंध जब नवमेश से हो तो व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धन अर्जित करता है। गुरु मंगल के प्रभाव में हो तो जातक फौजदारी वकील बनता है। बलवान और राजयोगकारक हो तो जातक न्यायाधीश बना देता है। शुक्रः- जातक सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, फैंसी वस्तुओं आदि का निर्माता/विक्रेता होता है। शुक्र का संबंध द्वितीयेश, पंचमेश या बुध से हो तो गायन-वादन के क्षेत्र में सफलता मिलती है। शनिः- शनि का संबंध यदि चतुर्थ भाव या चतुर्थेश से हो तो जातक लोहे, कोयले मिट्टी के तेल आदि के व्यापार से धन कमाता है। बलवान शनि का मंगल से संबंध हो तो जातक इलेक्ट्रीक/इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर होता है। यदि बुध से संबंध हो तो मेकैनिकल इंजीनियर होता है। शनि का राहु से संबंध हो तो व्यक्ति चप्पल, जूते, रेक्सिन बैग, टायर-ट्यूब आदि के व्यापार में सफल होता है। राहुः- दशम भाव में मिथुन राशि का राहु राजनीति के क्षेत्र में सफलता दिलाता है। ऐसा जातक सेना, पुलिस, रेलवे में या राजनेता के घर नौकरी करता है। केतुः- धनु या मीन राशि का दशमस्थ केतु व्यापार में सफलता, वैभव, धन और यश का सूचक है। ऊपर वर्णित बिंदुओं के आधार पर अपने अनुकूल आजीविका का निर्णय करें। शुभ/ योगकारक ग्रहों की महादशा में उनसे या जिन ग्रहों से उनका संबंध हो उनसे संबंधित व्यवसाय करने पर अच्छा लाभ होता है। आजीविका हेतु अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए मंत्र, यंत्र, रत्न, दान और पूजा अर्चना आदि समय-समय पर करते रहना चाहिए। 1.यदि लग्न सप्तम, दशम भाव का कार्येश हो तब जातक को कारोबार के द्वारा धनार्जन होगा और यदि षष्ठ और दशम का कार्येश हो तो नौकरी से धन अर्जित करेगा। 2.तृतीय भाव का कार्येश हो तो लेखन, छपाई, एजेंसी, कमीशन एजेंट, रिपोर्टर, सेल्समेन और संस्‍थाओं से धन प्राप्त होगा। मतलब यह कि वह इस क्षेत्र में अपना करियर बनाएगा। 3.अगर द्वितीय और पंचम का कार्येश हो तो जमीन, घर, बगीचे, वाहन और शिक्षा संस्थानों से धन प्राप्त करेगा। इसके अतिरिक्त नाटक, सिनेमा, ढोल, रेस, जुआ, मंत्र, तंत्र और पौरोहित्य कर्म से धन अर्जित करेगा। 4.यदि द्वितीय और सप्तम का कार्येश हो तो विवाह, विवाह मंडल, पार्टनरशिप और कानूनी सलाहकार के कार्य से धन अर्जित करेगा। 5.यदि दशम भाव में एक से अधिक ग्रह हों और उसमें से जो ग्रह सबसे अधिक बलवान होगा जातक उसके अनुसार ही व्यापार करेगा। जैसे दशम भाव में मंगल बलवान हो तो जातक प्रॉपर्टी, निवेश आदि का व्यवसाय करेगा अथवा पुलिस या सेना में जाएगा। 7.यदि दशम भाव में कोई ग्रह न हो तो दशमेश यानी दशम भाव के स्वामी के अनुसार व्यापार तय होगा। यदि दशम भाव में शुक्र हो तो व्यक्ति कॉस्मेटिक्स, सौंदर्य प्रसाधन, ज्वेलरी आदि के कार्यों से लाभ अर्जित करता है। दशम भाव का स्वामी जिन ग्रहों के साथ होता है उनके अनुसार व्यक्ति व्यापार करता है। 8. सूर्य के साथ गुरु हो तो व्यक्ति होटल व्यवसाय, अनाज आदि के कार्य से लाभ कमाता है। एकादश भाव आय स्थान है। इस भाव में मौजूद ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यापार तय किया जाता है। 9.जन्मकुंडली में कोई ग्रह जब लग्नेश, पंचमेश या नवमेश होकर दशम भाव में स्थित हो, या दशमेश होकर किसी भी त्रिकोण (1, 5, 9 भावों) में, या अपने ही स्थान में स्थित हो तो व्यक्ति की आजीविका के पर्याप्त साधन होते हैं। वह व्यवसाय या नौकरी में अच्छी प्रगति करता है। दशमेश या दशम भावस्थ ग्रह का बल और शुभता दोनों उसके शुभफलों में द्विगुणित वृद्धि करते हैं। अधिक जानकारी प्राप्त करें https://wa.me/message/BTNUEIEYYDMDN1

Thursday, 17 February 2022

हस्तरेखा में * निशान होने पर क्या असर होगा

व्यक्ति को बदनामी दिलाता है इस रेखा पर बना निशान
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719 हस्तरेखा में क्रॉस का निशान भी बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन इस निशान का कुछ पर्वत पर शुभ परिणाम मिलता है तो कुछ पर नकारात्मक। यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्रॉस का चिह्न कहां है। यहां पर हम आपको क्रॉस के निशान और इसके परिणाम के बारे में बताने जा रहे हैं। -यदि किसी व्यक्ति के गुरु पर्वत पर क्रॉस का निशान है तो यह उसके सुख में बढ़ोतरी करता है। गुरु पर्वत पर क्रॉस का निशान व्यक्ति के जीवनसाथी के शिक्षित एवं धनी कुल से मिलने का इशारा करता है। हस्तरेखा विज्ञान में गुरु पर्वत यानी बृहस्पति पर्वत पर क्रॉस के चिह्न को शुभ माना गया है। बाकी पर्वत पर इसके नकारात्मक परिणाम मिलते हैं। -यदि क्रॉस का चिह्न शनि पर्वत पर है तो ऐसे व्यक्ति को लड़ाई में चोट लगती है। इस पर्वत पर निशान व्यक्ति को अकाल मृत्यु की ओर ले जाता है। -सूर्य पर्वत पर क्रॉस का निशान शुभ नहीं माना गया है। यहां क्रॉस का निशान होने से व्यक्ति बदनामी का पात्र बनता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा व्यापार में घाटा बना रहता है। -बुध पर्वत पर क्रॉस का निशान व्यक्ति को झूठा और धोखेबाज बनाता है। ऐसे लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए। -केतु पर्वत पर क्रॉस का निशान होना व्यक्ति की शिक्षा में अवरोध को बताता है। बचपन में बीमारी अथवा अन्य किसी कारण से ऐसे व्यक्ति अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते। -मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिह्न होना व्यक्ति को झगड़ालू बनाता है। यह निशान व्यक्ति को जेल तक पहुंचाता है। (इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) क्या आप अपनी लाईफ को लेकर चिंतित हैं। आपके बनते कार्य बिगड़ रहे हैं। आप घर, परिवार, व्यापार, नौकरी में परेशानी आ रही है।, कन्या/पुरुष विवाह में देरी हो रही है। आप एक ही स्थान पर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। बस WhatsApp करें हमारे no. 9333112719 पर। 💯% 👉(आप अपना name, 👉date of birth, 👉Time of birth, 👉Palase of birth, दें)🔯 आपके समस्या का समाधान हम देंगे। 👉(Online समाधान pay prices in ₹ 300/- only) ✋नाम नहीं कर्म में विश्वास रखें 🙏 हमारे साईट पर जाएं:✓ http://asthajyotish.in https://asthajyotish.business.site https://sites.google.com/view/asthajyotish https://www.youtube.com/c/JyotishGuruMk https://asthajyotish10.wixsite.com/asthajyotish-1 http://vastujyotishsamadhan.blogspot.com https://www.instagram.com/poddarjeevastu https://m.facebook.com/profile.php?ref=bookmarks# 👉Fee only 300/-🔯

त्रिक और त्रिकोण भाव की विशेषता

त्रिक भाव, त्रिकोण भाव, पनफर भाव, अपोकोलिक भाव, उपचय भाव की विशेषता क्या है.... http://asthajyotish.in ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719
क्या आप अपनी लाईफ को लेकर चिंतित हैं। आपके बनते कार्य बिगड़ रहे हैं। आप घर, परिवार, व्यापार, नौकरी में परेशानी आ रही है।, कन्या/पुरुष विवाह में देरी हो रही है। आप एक ही स्थान पर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। बस WhatsApp करें हमारे no. 9333112719 पर। 💯% 👉(आप अपना name, 👉date of birth, 👉Time of birth, 👉Palase of birth, दें)🔯 आपके समस्या का समाधान हम देंगे। 👉(Online समाधान pay prices in ₹ 300/- only) ✋नाम नहीं कर्म में विश्वास रखें 🙏 हमारे साईट पर जाएं:✓ http://asthajyotish.in https://asthajyotish.business.site https://sites.google.com/view/asthajyotish https://www.youtube.com/c/JyotishGuruMk https://asthajyotish10.wixsite.com/asthajyotish-1 http://vastujyotishsamadhan.blogspot.com https://www.instagram.com/poddarjeevastu https://m.facebook.com/profile.php?ref=bookmarks# 👉Fee only 300/-🔯

Thursday, 27 January 2022

शनि की साढ़ेसाती और ढैया में क्या अंतर है

क्या है शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719 शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक गतिशील रहते हैं। इसीलिए उन्हें मंगदामी भी कहते हैं क्योंकि एक घर में इतने दिनों तक रहने वाले शनि अकेले ग्रह हैं, उनका तीव्र प्रभाव एक राशि पहले से एक राशि बाद तक पड़ता है। यही स्थिति साढ़े साती कहलाती है। जब गोचर में शनि किसी राशि से चतुर्थ व अष्टम भाव में होता है तो यह स्थिति ढैय्या कहलाती है। अगर शनि तृतीय, षष्ठ और एकादश भाव में हों तो साढ़ेसाती और ढैय्या करिश्माई परिणाम की साक्षी बनती हैं और तब यह योग जीवन में सफलता लेकर आता है लेकिन अन्य के लिए शुभ परिणाम नहीं लेकर आता है। अगर शनि अष्टम व द्वादश भाव में है तो अधिक कष्ट प्राप्त होने की आशंका होती है। साढ़ेसाती लगभग साढ़ेसात साल और ढैय्या ढाई साल चलती है। हर किसी के जीवन साढ़ेसाती हर 30 साल में जरूर आती है। शनि की महादशा 19 साल की होती है। शनि का रत्न वैदुर्य है जिसे नीलम या ब्लू सफायर भी कहते हैं। अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु क्लिक करें http://asthajyotish.in https://sites.google.com/view/asthajyotish/home

Saturday, 22 January 2022

कुंडली में ग्रहों का फल कैसे जानें

अपनी जन्म कुंडली के अनुसार ऐसे लें ग्रहों का सही फल! ऐसे करें जन्म समय की सही पहचान : यदि बालक का जन्म ठीक समय पर होगा तो ग्रहों का फल भी ठीक होगा , और यदि इष्ट में किसी भी प्रकार की चूक या गड़बड़ी हो ... https://sites.google.com/view/asthajyotish/home
ज्योतिषशास्त्र के जानकारों से यह बात छिपी नहीं है कि यदि बालक का जन्म ठीक समय पर होगा तो ग्रहों का फल भी ठीक होगा , और यदि इष्ट में किसी भी प्रकार की चूक या गड़बड़ी हो गई तो सम्पूर्ण फल में गड़बड़ी हो जाती है , इसलिए बालक के पिता को उचित तरीके से प्रसव के समय ऐसी चतुर और जानकार स्त्री को नियुक्त करें जो बच्चे के जन्म लेते ही पहली स्वांस का समय नॉट कर सके। और उसकी सुचना बाहर बच्चे के पिता को दे सके। बिना इस सही समय की जानकारी के जन्म पत्रिका को अशुद्ध माना जाता है। आपको यह सब मालूम करना चाहिए की बच्चे के जन्म का समय सही है या नहीं इसके लिए लग्न जातक से वह सब डाटा मेल मिल जाये तो मान लो की जन्म का समय ठीक है। यहाँ अपने सटीक समय पली को अपने सामने रख ले और लग्न को देखकर बच्चे के आचरण और उससे जुडी जानकारी से मिलान करें। : कुंडली में जिस घर में लग्न लिखा है उस घर में जो अंक लिखा है उस नंबर की राशि को ही उसका लग्न घर कहा जाता है जैसे लग्न घर में अंक 2 है या 4 है तो इस प्रकार देखें राशियों का क्रम 1 मेष, 2 वृष, 3 मिथुन, 4 कर्क, 5 सिंह, 6 कन्या, 7 तुला, 8 वृश्चिक, 9 धनु, 10 मकर, 11 कुम्भ, 12 मीन। 2 नंबर की राशि वृष है तो लग्न वृष होगा या लग्न में अंक 4 लिखा हो तो लग्न कर्क होगा , ईसी प्रकार आप अपने कुंडली में लग्न देखकर जन्म समय की सटीकता की जांच करें। प्रशव घर कोई भी कमरा हो सकता है इसको मुख्य घर न समझे यदि बालक के जन्म समय में लग्न तुला , वृश्चिक , कुम्भ , मेष , कर्क , हो तो प्रसव के घर का द्वार पूर्वमुख था। यदि कन्या धनु मीन मिथुन लग्न में बालक का जन्म हो तो प्रसूतिघर का द्वार उत्तर की ओर था। जन्म लग्न वृष लग्न हो तो प्रसूति द्वार पश्चिम मुख होगा। जन्म समय सिंह और मकर लग्न हो तो प्रसूता द्वार दक्षिण होना चाहिए। इसी प्रकार अपने प्रसूति घर के बारे में जानकारी सही मिलान करके भी जन्म समय के समय की सही गलत की जानकारी देख सकते है ज्योतिष विद्या में बालक के जन्म लेते ही रोने सम्बन्धी जानकारी से भी सही गलत समय की पहचान की जा सकती है बालक के जन्म समय में मेष , वृष , सिंह , मिथुन , तुला लग्न हो तो बालक जन्म लेते ही रोया करते है । कुम्भ, कन्या लग्न वाले बालक कुछ रोदन करते है कर्क , वृश्चिक , धनु , मीन लग्न में जन्मे बालक जन्म लेते ही नहीं रोते , ये कुछ समय बाद रोते है। मेष ,वृष , मिथुन , सिंह , तुला लग्नों बालक का जन्म हो तो यह बालक सब ज्ञान को भूलकर बहुत रोदन करता है कुम्भ और कन्या लग्न वाले कुछ समय के लिए रोते है। बालक के जन्म कुंडली से जानिए कुछ जन्म से जुड़े ग्रहों के फल **जिस बालक के जन्मकाल में शुक्र बुध हो और केंद्र स्थान १,४,७,१० में बृहस्पति हो तथा दश में मंगल हो तो उस बालक को कुल का दीपक माना जाता है *जिस बालक के जन्म लग्न में बुध शुक्र न हो और केंद्र में बृहस्पति न हो दशम घर में मंगल न हो तो उसका जन्म निरर्थक होता है जो छठे और बारहवें घर में पापग्रह हो तो मत को भयकारक होता है चौथे दशमें स्थान में पापग्रह हो तो पिता को अरिष्ट होता है। जो लग्न स्थान या सप्तम स्थान में मंगल हो पंचम में सूर्य और बारहवे स्थान में राहु हो तो वह बालक निस्चय प्रसिद्द पुरुष होता है। *यदि बुध और बृहस्पति दशम स्थान में हो और १,४,७,१० सूर्य मंगल तथा तीसरे ग्यारवें घर में पाप गृह हो तो बालक के हाथ या पेरो में विकार होता है और छ उंगलिया होती है। *यदि बारहवें स्थान में चन्द्र मंगल हो तो बाई आँख में खराबी करते है यदि बारहवें सूर्य और राहु हो तो दाहिना नेत्र में खराबी होती है। *यदि तीसरे स्थान में शुक्र हो सिंह और मेष का बृहस्पति हो और दशवें घर में मंगल सूर्य हो तो बालक गूंगा होता है। *यदि सिंह लग्न में जन्म हो और सप्तम स्थान में शनि हो तो ब्राह्मण घर में जन्म लेते हुए भी म्लेच्छ होगा। *जो पांचवें सातवें नवें बारहवें आठवें तथा लग्न में इनमे किसी स्थान में क्षिणचन्द्रमा पापगृहयुक्त हो और बलवान होकर शुक्र बुध बृहस्पति इनमे से कोई शुभगृह न देखता हो तो या इनसे युक्त न हो तो बालक की मृत्यु हो जाती है। *यदि कृष्ण पक्ष में दिन में जन्म हुआ हो और शुक्ल पक्ष में रात को जन्म हुआ हो उस वक्त छठे और आठवें स्थान में चन्द्रमा हो तो सम्पूर्ण अरिष्ट निवारण होते है। ज्योतिष उपाय से कुछ हद तक सहूलियत मिल जाती है। https://youtu.be/jHc8K5mwqvA http://asthajyotish.in https://www.youtube.com/c/JyotishGuruMk 1 2 3 4 5 6 2

Monday, 17 January 2022

बच्चेदानी में सूजन और उपचार

आमतौर पर बच्चेदानी में सूजन (Bulky Uterus)के कारण महिलाओं को गर्भधारण करने में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बांझपन के मुख्य कारणों में से एक है। महिलाओं के गर्भाशय का आकार बंद मुट्ठी या नाशपाती के बराबर होता है और प्रेगनेंसी के दौरान इसका आकार बहुत बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी के अलावा सामान्य अवस्था में भी कई बार महिलाओं के गर्भाशय में सूजन आ जाती है। सामान्य अवस्था में गर्भाशय में सूजन के कई लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
बच्चेदानी में सूजन क्या है? बच्चेदानी में सूजन के लक्षण बच्चेदानी में सूजन के कारण बच्चेदानी में सूजन का इलाज बच्चेदानी में सूजन होने पर महिला गर्भधारण कैसे कर सकती है? बच्चेदानी में सूजन होने पर गर्भधारण के लिए मेडिकवर फर्टिलिटी आपकी मदद कर सकता है। क्या गर्भाशय में सूजन के कारण प्रेगनेंसी में समस्या होती है? क्या गर्भाशय में सूजन वजन बढ़ने का कारण बन सकता है? भारी गर्भाशय फाइब्रॉएड क्या है? गर्भाशय का सामान्य आकार क्या है? बच्चेदानी में सूजन क्या है? (Bulky Uterus Kya Hota Hai in Hindi) बच्चेदानी यानि गर्भाशय महिला प्रजनन का अंग है जो बच्चे के जन्म होने तक उसे रखने और पोषण करने के लिए जिम्मेदार होता है। भारी गर्भाशय जिसे अंग्रेजी में बल्की यूट्रस (Bulky Uterus Meaning in Hindi) कहते है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय का आकार सामान्य से बड़ा हो जाता है। प्रेगनेंसी के समय इसका आकार बड़ा होना आम बात है, लेकिन सामान्य अवस्था में आकार बड़ा हो जाए तो यह समस्या की बात है। इस समस्या का समय पर इलाज ना किया जाए तो यह गंभीर हो सकता है और महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। बच्चेदानी में सूजन के लक्षण सामान्य अवस्था में गर्भाशय में सूजन के कई लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ मुख्य लक्षण है - पीरियड्स का अनियमित हो जाना पेल्विक हिस्से में ऐंठन और ब्लीडिंग पैरों में सूजन और ऐंठन पीठदर्द मीनोपॉज़ के बाद भी ब्लीडिंग होना बार-बार और जल्दी पेशाब आना संभोग के दौरान दर्द पेट के निचले हिस्से के आसपास वजन बढ़ना मुँहासे अत्यधिक बाल बढ़ना कब्ज बच्चेदानी में सूजन के कारण ज़्यादातर महिलाओं में ज्यादा टाइट कपड़े पहनने, भूख से ज्यादा खाना खाने, शारीरिक मेहनत की कमी, कब्ज या गैस के कारण से बच्चेदानी में सूजन आना संभव है। इसके अलावा गर्भाशय के बढ़ जाने के कई कारण हो सकते है, जैसे - फाइब्रॉइड - यह नॉन-कैंसर ट्यूमर होते हैं जो छोटी गांठ की तरह होते हैं। यह गर्भाशय के अंदर और बाहर बढ़ सकते हैं। एडिनोमायोसिस - यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्भाशय की परत, जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है, गर्भाशय में बढ़ने लगते है। पीसीसोएस - यह बीमारी हार्मोनल असंतुलन के कारण होती है, जिसमें गर्भाशय में सिस्ट बन जाते है। एंडोमेट्रियल कैंसर - गर्भाशय के कैंसर के कारण से भी गर्भाशय बड़ा हो सकता है। मेनोपॉज़ - पीरियड्स बंद होने यानि मेनोपॉज़ के दौरान हॉर्मोन में बदलाव के कारण भी सूजन आ सकती है। ओवेरियन सिस्ट - ओवरी में सिस्ट बनने के कारण से गर्भाशय में सूजन आ सकती है। बच्चेदानी में सूजन का इलाज (Bulky Uterus Treatment in Hindi) इसका इलाज सूजन के पीछे के कारण पर निर्भर करता है, जैसे - फाइब्रॉइड के साथ बच्चेदानी में सूजन (Bulky Uterus with Fibroid Meaning in Hindi) के लिए डॉक्टर आपको गर्भनिरोधक गोलियां जिनमें एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन या आईयूडी का सुझाव दे सकते है। ये गोलियां फाइब्रॉएड के विकास को रोकने में मदद करती हैं और पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग को कम कर सकती हैं। गंभीर मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की जाती है। एडेनोमायोसिस के कारण बच्चेदानी में सूजन की समस्या (Bulky Uterus Problem in Hindi) के लिए इबुप्रोफेन और हार्मोनल (एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन) गर्भनिरोधक गोलियां एडेनोमायोसिस के कारण होने वाले दर्द और ज़्यादा ब्लीडिंग को रोकने में मदद कर सकती हैं। कुछ गंभीर मामलों में हिस्टेरेक्टॉमी का सुझाव दिया जा सकता है। गर्भाशय और एंडोमेट्रियल कैंसर या ट्यूमर का कीमोथेरेपी, सर्जरी और दवाइयों से इलाज किया जाता है। बच्चेदानी में सूजन होने पर महिला गर्भधारण कैसे कर सकती है? यदि आपको गर्भाशय में सूजन की समस्या है और आप गर्भधारण के लिए प्रयास कर रही है, तो आपको एक गाइनेकोलॉजिस्ट या एक फर्टिलिटी डॉक्टर के पास जाना चाहिए। वह आपकी समस्या के आधार पर आपके लिए उचित उपचार का सुझाव देंगे। वह आपकी सूजन को ठीक करने के लिए आपको उपाय व् इलाज करने में आपकी मदद करेंगे। उसके बाद आप प्राकृतिक रूप व असिस्टेड रिप्रोडक्टिव तकनीक जैसे आईवीएफ और आईसीएसआई की मदद से गर्भधारण कर सकती है। ज़्यादा गंभीर मामलों में सरोगेसी की सलाह दी जा सकती है। बच्चेदानी में सूजन होने पर गर्भधारण के लिए मेडिकवर फर्टिलिटी आपकी मदद कर सकता है। मेडिकवर फर्टिलिटी एक अंतराष्ट्रीय फर्टिलिटी क्लिनिक हैं। यहाँ एडवांस्ड तकनीकों और उपकरणों के प्रयोग से जाँच की जाती है। मेडिकवर फर्टिलिटी ने अनगिनत निःसंतान दम्पत्तिओं के माता-पिता बनने का सपना पूरा हुआ है। यहाँ के फर्टिलिटी डॉक्टर और एम्ब्रियोलॉजिस्ट बहुत ही अनुभवी और उच्च सफलता दर के ट्रीटमेंट देने में पूरी तरह से सक्षम हैं। मेडिकवर फर्टिलिटी में आर आई विटनेस (RI Witness) का प्रयोग किया जाता है। आई वी एफ लैब में होने वाली संभावित किसी भी प्रकार की गलतियों को रोकने में आरआई विटनेस से मदद मिलती है। इससे यह सुनिश्चित होता है की एम्ब्र्यो के लिए आपका ही सैंपल (एग और स्पर्म) का प्रयोग किया गया है। लोगों में आजकल इसके बारे में फिल्मों को देखने के बाद काफी जागरूकता बढ़ गई है। मेडिकवर फर्टिलटी में यह सुविधा पहले से ही उपलबध है, जिसका लाभ कई दम्पत्तियों को मिला है। यदि आपको इस विषय से सबंधित कोई भी जानकारी चाहिए तो आप इस नंबर पर +917862800700 संपर्क कर सकते है।

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