Thursday, 27 January 2022

शनि की साढ़ेसाती और ढैया में क्या अंतर है

क्या है शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या
ज्योतिष और वास्तु समाधान 🏠Vastu Guru_ Mk.✋ 👉WP. 9333112719 शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक गतिशील रहते हैं। इसीलिए उन्हें मंगदामी भी कहते हैं क्योंकि एक घर में इतने दिनों तक रहने वाले शनि अकेले ग्रह हैं, उनका तीव्र प्रभाव एक राशि पहले से एक राशि बाद तक पड़ता है। यही स्थिति साढ़े साती कहलाती है। जब गोचर में शनि किसी राशि से चतुर्थ व अष्टम भाव में होता है तो यह स्थिति ढैय्या कहलाती है। अगर शनि तृतीय, षष्ठ और एकादश भाव में हों तो साढ़ेसाती और ढैय्या करिश्माई परिणाम की साक्षी बनती हैं और तब यह योग जीवन में सफलता लेकर आता है लेकिन अन्य के लिए शुभ परिणाम नहीं लेकर आता है। अगर शनि अष्टम व द्वादश भाव में है तो अधिक कष्ट प्राप्त होने की आशंका होती है। साढ़ेसाती लगभग साढ़ेसात साल और ढैय्या ढाई साल चलती है। हर किसी के जीवन साढ़ेसाती हर 30 साल में जरूर आती है। शनि की महादशा 19 साल की होती है। शनि का रत्न वैदुर्य है जिसे नीलम या ब्लू सफायर भी कहते हैं। अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु क्लिक करें http://asthajyotish.in https://sites.google.com/view/asthajyotish/home

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