Monday, 13 July 2020

नाड़ी ज्योतिष द्वारा आसान समाधान


केरलीय प्रश्न विचार Kerala Prashan Astrology in Hindi
By Vastu Guru Mk Poddar
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अंको या या संख्या द्वारा प्रश्न विषयक विचार केरल प्रदेश में सर्वाधिक प्रचलित है,इसी कारण इस शास्र को केरलीय ज्योतिष मे नाम से जाना जाता है। इस पध्दति से सम्बन्धित अनेक ज्योतिष ग्रन्थ उपल्ब्ध हैं,जैसे केरल प्रश्न संग्रह केरलीय प्रश्न रत्न प्रश्नचूडामणि आदि। Kerala Prashan Astrology in Hindi

प्रश्न कैसे जाना जाये?

पूछने वाला यदि सात्विक प्रवृत्ति का है,तो उससे किसी फ़ूल का नाम,अगर तेज तर्रार है तो किसी नदी का नाम,और व्यापारी है तो किसी देवता का नाम,और नौकरी पेशा करने वाला है तो उससे किसी फ़ल का नाम पूंछना चाहिये,कुच विद्वानो का मत है कि पूंछने वाला अगर सुबह को पूंछे तो किसी बालक के द्वारा किसी पेड का नाम जानना चाहिये,और दोपहर में किसी जवान आदमी से फ़ूल का नाम जानना चाहिये,शाम को किसी बूढे व्यक्ति से फ़ल का नाम जानना चाहिये। और हमारे अनुसार केवल प्रश्न पूंछने वाले से ही प्रश्न करना चाहिये,कि वह अपने प्रश्न का चिन्तन करते हुये अपने किसी भी इष्ट का नाम मन में रखे और फ़ूल नदी देवता फ़ल या वृक्ष का नाम ले,फ़िर उसके अनुसार अंक पिंड बनाकर प्रश्न संबन्धी विचार करना चाहिये।

एक समय में एक प्रश्न पर ही विचार करना चाहिये,हंसी मजाक या परीक्षा के लिये प्रश्न नही करना चाहिये,अन्यथा कालगति समय पर परेशान कर सकती है। केवल परेशानी में ही प्रश्न करने के बाद पूरा उत्तर मिल सकता है।

अंक पिंड बनाने के नियम

पेड या देवता जिसका भी नाम लें,उसे कागज पर लिख लें, तदोपरान्त स्वर व व्यंजन की संख्यानुसार उस नाम का पिंड बना लें,अंक पिंड के आधार पर ही प्रश्न के फ़ल का विचार किया जाता है। स्वर व व्यंजन के लिये प्रयुक्त संखा निम्न प्रकार समझें।

स्वर अंक चक्रम

स्वर अं
संख्या 12 21 11 18 15 22 18 32 25 19 25
व्यंजन अंक चक्रम

व्यंजन ड. य़ं
संख्या 13 11 21 30 10 15 21 23 26 26 10
व्यंजन ढ.
संख्या 13 22 35 45 14 18 17 13 35 27 18
व्यंजन
संख्या 26 27 86 16 13 13 35 26 35 35 12


उपरोक्त अक्षरों में यदि ऋ का प्रयोग किया जाये तो रि की भांति (र+इ) को मानना चाहिये। लृ का प्रयोग केवल वैदिक मंत्रों के अन्दर होता है, जिज्ञासा के अन्दर इस अक्षर का महत्व नही है।

स्वर और व्यंजनो के अंक चक्रों में उनके नीचे संख्या का मान दिया गया है,पूंछने वाले के द्वारा कहे गये फ़ल फ़ूल नदी फ़ल वृक्ष या देवता के नाम के स्वर और व्यंजनों को अलग अलग कर लेना चाहिये,इसके बाद उपरोक्त सारणी के द्वारा संख्या को लिखना चाहिये,और दोनो के जोड को जानकर वही अंक पिण्ड मानना चाहिये।

उदाहरण के लिये अगर किसी ने “गुलाब” का नाम लिया,यह फ़ूल का नाम है,इसके अंक पिंड बनाने के लिये इस प्रकार की क्रिया को करना पडेगा:-
ग+उ+ल+आ+ब = 21+15+13+21+26+12 = 108 संख्या पिंड गुलाब का माना जाता है। इस प्रकार से किसी भी नाम का अंक पिंड आसानी से आप बना सकते है।

प्रश्नों के प्रकार

केरलीय प्रश्न विचार के अन्दर विद्वानों ने उन्हे अनेक प्रकार से बांटा है,यहां पर अलग अलग प्रश्नों को हल करने के उद्देश्य से लिखा गया है,इनमें प्रश्नों के नौ प्रकार ही मुख्य हैं।

लाभ हानि के प्रश्न – किसी भी देवता या फ़ल फ़ूल या वृक्ष के नाम का पिंड+42 के जोड में 3 का भाग,1 में लाभ,2 में बीच का और 3 में हानि जाननी चाहिये।
जय और पराजय के प्रश्न- उपरोक्त प्रणाली के द्वारा पिंड+34 के जोड में 3 का भाग,1 बचे तो जय,2 बचे तो समझौता,और 3 बचे तो पराजय जाननी चाहिये।
सुख दुख से जुडे प्रश्न – उपरोक्त तरीके की प्रणाली से पिंड बनाकर 38 जोड कर 2 भाग देना चाहिये,1 बचे तो सुख और 0 बचे तो दुख जानना चाहिये।
आने जाने के प्रश्न – पिंड बनाकर 33 को जोडना चाहिये,3 का भाग देना चाहिये, 1 बचे तो आना जाना होगा, 2 बचे तो आना या जाना नही होगा, 0 बचे तो आना या जाना होगा लेकिन काम नही होगा।

गर्भ और बिना गर्भ के प्रश्न – पूंछने वाले से उपरोक्त में किसी कारक (फ़ल फ़ूल या नदी पेड भगवान आदि) का नाम जानकर उसके पिंड बनाने चाहिये,फ़िर 26 जोड कर 3 का भाग देना चाहिये,यदि 1 बचता है तो गर्भ है,2 बचे तो गर्भ होने में संदेह है,और 3 बचे तो गर्भ नही है।

पुत्र कन्या जानने के प्रश्न – पूंछने वाले से उपरोक्त में किसी कारक (फ़ल फ़ूल या नदी पेड भगवान आदि) का नाम जानकर उसके पिंड बनाने चाहिये,फ़िर उसी पिंड में 3 का भाग देना चाहिये, 1 बचे तो पुत्र और 2 बचे तो पुत्री और 0 बचे तो गर्भपात समझना चाहिये।

तेजी मंदी जानने के प्रश्न – जो भी अंक पिंड है उसमे तीन का भाग दीजिये,एक बचता है तो सस्ता यानी मंदी,और दो बचता है तो सामान
,और तीन बचता है तो भाव चढेगा, यह बात शेयर बाजार के लिये भी जानी जा सकती है,इसमें शेयर के नाम का पिंड बनाकर उपरोक्त रीति से देखना पडेगा।
विवाह वाले प्रश्न – इसमें वर और कन्या किसी भी पक्ष से उपरोक्त कारकों से कोई नाम जानकर उसके पिंड बना लेना चाहिये, उसके अन्दर आठ का भाग देना चाहिये, अगर एक बचता है तो आराम से विवाह हो जायेगा,दो बचता है तो प्रयत्न करने पर ही विवाह होगा, तीन में विवाह अभी नही होगा, चार में वर की तरफ़ से सवाल पर कन्या की और कन्या की तरफ़ सवाल जानने पर वर या कन्या के साथ कोई अपघात हो जायेगी, अथवा वर या कन्या के बारे में कोई गूढ बात आजाने पर विवाह नही हो पायेगा, पांच बचने पर उसके परिवार में कोई हादसा हो जाने से विवाह नही होगा, छ: बचने पर राजकीय बाधा सामने आने से विवाह नही होगा, सात बचने पर पिता को कष्ट होगा,आठ बचने पर विवाह तो होगा लेकिन संतान नही होगी,यह जानना चाहिये।
जन्म मरण के प्रश्न- उपरोक्त कारकों से कोई भी कारक नाम पूंछने वाले से जानना चाहिये,जिसके बारे में जाना जा रहा है वह उसका खून का सम्बन्धी होना जरूरी है,उस कारक के पिंड बनाकर उसके अन्दर चालीस की संख्या को जोडना चाहिये,और तीन का भाग देना चाहिये, एक बचता है तो जीवन बाकी है, दो बचता है तो जीवन तो है,लेकिन कष्ट अधिक है, शून्य बचता है,तो भगवान का भरोसा कहना चाहिये,सीधे रूप में मृत्यु है ऐसा नही कहना चाहिये।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :- https://m.facebook.com/?_rdr#!/story.php?story_fbid=705586746675118&id=100016713975161&refid=8&_ft_=qid.6849044003210234060%3Amf_story_key.-2941870518041936970%3Atop_level_post_id.705586746675118%3Acontent_owner_id_new.100016713975161%3Asrc.22%3Astory_location.5%3Aview_time.1594667323%3Afilter.h_nor&__tn__=%2As%2As-R

Tuesday, 9 June 2020

मकान आपके लिए शुभ है या अशुभ अपने और मकान के पहले अक्षर बर्ग अंक द्वारा जाने

आप के स्थान का पहला अक्षर किस वर्ग से है ?
by Mk Vastu🏘Vastu Articles.
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वैसे तो आज के इस युग में व्यक्ति के पास बहोत कम ऑप्सन होता है कि वह किस शहर को अपना निवास स्थान बनाये जहाँ निवास कर के उसे उन्नति और प्रगति के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्राप्त हो ।
पर वास्तुशास्त्र में एक वर्ग विधि है जिससे वह आसानी से यह ज्ञात कर सकता है कि उसे उसके वर्तमान सहर अथवा नगर में उसको किस तरह का लाभ-हानि प्राप्त होगा।
निवास के योग्य स्थान जानने के लिए आप को कुछ निम्नलिखित बातों को सर्वप्रथम जानना होगा _ क्यों की आप के स्थान का पहला अक्षर किस वर्ग से है यह निर्धारित होने के पश्च्यात ही इसका लाभ उठाया जा सकता है।
* वर्ग ( अ )अ, आ, ई, उ, ए, ओ संख्या (1)
* वर्गेस गरूड
* दिशा पूर्व (e)
* वर्ग ( क ) क, ख, ग, घ, ङ संख्या (2)
* वर्गेस विडाल
* दिशा आग्नेय (s/e )
* वर्ग ( च ) च, छ, ज, झ, संख्या (३)
* वर्गेस सिंह
*दिशा दक्षिण (s)
* वर्ग ( ट ) ट, ठ, ड, ढ, ण संख्या (4)
* वर्गेस श्वान
* दिशा नैऋत्य (s/w )
* वर्ग ( त ) त, थ, द, ध, न संख्या (5)
* वर्गेस सर्प
* दिशा पश्चिम ( w )
* वर्ग ( प ) प, फ, ब, भ, म संख्या (6)
* वर्गेस मूसक
* दिशा वायव्य (n/w )
* वर्ग ( य ) य, र, ल, व संख्या (7)
* वर्गेस गज ( मृग )
* दिशा उत्तर ( n )
* वर्ग ( श ) श, ष, स, ह संख्या (8)
* वर्गेस मेष ( शशक )
* दिशा ईशान (n/e )
अब वर्गेस की आपस में शत्रुता, मित्रता और सम
( उदासीन ) भाव भी जानें_
__________________________________________
वर्गेस शत्रु.
* *
गरुङ सर्प
मार्जर ( बिल्ली ) मूषक
सिंह हिरण ( मृग )
श्वान मेष
यह परस्पर शत्रु होते हैं।
* अपने वर्ग से पांचवां शत्रु होता है।चौथा वर्ग मित्र एवं तीसरा वर्ग उदासीन ( सम ) होता है।
__________________________________________
वर्गेस मित्र
* *
गरुङ श्वान
मर्जर ( विडाल- बिल्ली ) सर्प
सिंह मूषक
सर्प मेष
मूषक गरुङ
हिरन मर्जर ( विडाल- बिल्ली )
मेष सिंह
यह परस्पर मित्र होते हैं।
__________________________________________
वर्गेस सम ( उदासीन )
* *
गरुङ सिंह
मर्जर श्वान
सिंह सर्प
श्वान मूषक
सर्प मृग ( हिरन )
मूषक मेष
मृग गरुङ
मेष मर्जर ( विडाल- बिल्ली )
यह आपस में सम होते हैं अर्थात न शुभ और न अशुभ
__________________________________________
उदाहरण_
आइये उदाहरण से जानने का प्रयास करें? सर्वप्रथम आप के शहर या आप की एरिया के नाम का पहला अक्षर जानें ( वह किस “वर्ग” में आता है )और फिर उसकी दिशा क्या है
जैसे – नानकचंद्र को ग्वालियर में रहना है।
अब नानकचंद्र का “वर्ग” ( त ) है सर्प
और दिशा पश्चिम ( w ) है
ग्वालियर का “वर्ग” ( क ) है विडाल
और दिशा आग्नेय (s/e ) है
इसतरह नानकचंद्र के वर्ग से ग्वालियर का वर्ग छठा है। अतः नानकचंद्र के लिए ग्वालियर योग्य स्थान है।
इसी तरह लाभ-हानि भी ज्ञात कर सकते हैं_
जैसे-
नानकचंद्र की वर्ग संख्या 5
ग्वालियर की वर्ग संख्या 2
पहले साधक ( नानकचंद्र ) की वर्ग संख्या
फिर साध्य ( ग्वालियर ) की वर्ग संख्या को मिलाएं
52 इसमें 8 से भाग दें
52÷8 शेष बचा ( 4) यह साधक का “धन”
अब संख्या को उल्टा करें
25 इसमें भी 8 से भाग दें
25÷8 शेष बचा (1)यह साधक का “ऋण”
इससे यह सिद्ध हुआ की साधक “नानकचंद्र”
साध्य “ग्वालियर” में निवास करने से
4 का लाभ और
1 खर्च होता रहेगा।
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Thursday, 21 May 2020

कुंडली से जाने जन्म तारीख,माह,वर्ष,समय,पक्ष,तिथी और नक्षत्र

लग्न कुंडली से कैसे जानें Date/month/year/Time
VastuGuru Mk wp.9333112719
: @ जातक जब ज्योतिष जिज्ञासा लेकर हमारे पास आते हैं तो बिना उनके बताए, हम यह बता दें कि जातक का प्रश्र क्या है।
: किसी के पास कोई दिव्य चक्षु नहीं है, सारा वैदिक ज्योतिष गणना पर आधारित है। विषय में जो दिया है, यदि आप वैदिक ज्योतिष का सामान्य ज्ञान रखते हैं तो यह कर सकते हैं।
: इस लिए मुल विषय से पहले कक्षा में वैदिक ज्योतिष के सिद्धांत आरंभ से बता रहे हैं।
: आज़ की कक्षा में, मैं आपको विषय से संबंधित एक जातक को चमत्कृत करने का एक आसान ढंग सीखाना चाहूंगा।
: निम्न लग्न कुंडली को ध्यान से देखें।
: आपकों इस कुंडली से, जातक का जन्म समय, मास, पक्ष, तिथि व आयु बतानी है।
: क्या यह संभव है?
: यह संभव है, कक्षा में आज़ यही सीखना है। साधारण गणना है।
: आपने कुंडली बनानी सीख ली है तो यह सूत्र भी सीख लेंगे।
: सबसे पहले मास ज्ञात करते हैं। यह सूर्य राशि से संभव है।
: सूर्य हर संक्रांति को राशि परिवर्तन करते हैं। यह अंग्रेजी मास की १५ से २० तारीख के मध्य होती है। अप्रैल मास में मेष राशि,(१) में प्रवेश करते हैं। यहां ८ वृश्चिक राशि में है। यानी लगभग नवंबर मध्य में इस राशि में आएं हैं। सूर्य २३ अंश पर है। यानी इस राशि में लगभग २३ दिन से है। जन्म मास दिसंबर है
: अभ्यास से जानें
: ८ से १० तारीख के बीच
: अब समय ज्ञात करते हैं। यह भी सूर्य की स्थिति से जानेंगे।
: सूर्योदय के समय, सूर्य लग्न भाव में स्थित होता है। हर लग्न में पिछले भाव में हों जाते हैं, यानी प्रथम से द्वादश भाव में।
: लग्न दो अंशों के लगभग है व सूर्य द्वादश भाव में।
: जन्म सुबह ७ से ८ के मध्य
: अब पक्ष जानते हैं। यह चन्द्र की स्थिति से जानेंगे।
: सूर्य चंद्र, अमावस्या को एक ही राशि में व पुर्णिमा को १ से ७वे भाव में।
: यानी पुर्णिमा को, सूर्य यदि पहले भाव में है तो चांद ७वे भाव में हो।
: इस प्रकार यदि चन्द्रमा , सूर्य से १-७ भाव में है तो शुक्ल पक्ष, ७-१२ में है तो कृष्ण पाक्ष
: यहां चन्द्र सूर्य से अष्टम भाव में है तो कृष्ण पक्ष
: द्वितीया या तृतीया तिथि
: अब नक्षत्र जानते हैं यह भी चन्द्र की स्थिति से संभव है
: चन्द्र जिस राशि में है, उस से पहली राशि संख्या को ३० से गुना करें व कुंडली में दिए चन्द्र के अंशों को गुणनफल में जोड़ें
: ३०*२ - ६०
६०+ १९ - ७९
: 30*2+19=79 degree
: इसे १३.३३ से भाग करें
: भागफल नक्षत्र संख्या है
: यानी ६ वा नक्षत्र, चतुर्थ चरण
: 5.92 degree
: .25 अंशों का एक चरण है
: अब वर्तमान आयु जानेंगे
: यह शनि की स्थिति से संभव है
: इसके लिए गोचर में शनि की स्थिति का ज्ञान आवश्यक है।
: शनि अब मकर राशि में है, कुंडली में कर्क राशि में है।
: शनि एक राशि में ढायी वर्ष रहता है।
: जातक की वर्तमान आयु १४-१५ वर्ष या ४४-४५ वर्ष है
: उपस्थित जातक की वय देखकर कथन करें।
: यह फलित नहीं है, कुछ जातक केवल लग्न कुंडली हाथ से लिख कर प्रस्तुत कर देते हैं। गणित से उन्हें प्रभावित करने के लिए यह ढंग उत्तम है
: आज़ इतना ही। आज्ञा दे। आप सभी का मंगल हो।
: Thank you sir
बय
44-45 नही समझ आया
उपस्थित जातक की वय  का अर्थ क्या है  सर जी
[ ३०+१५
जा:9,12,1976 time 7.24 am  place Nagpur  Maharashtra
[: जातक का सही जन्म विवरण यह है, अभी मिला है, जो जातक ने स्वयं भेजा है।

Tuesday, 31 March 2020

लोसू ग्रिड numerology

(LOSU GRID) IN NUMEROLOGY  लोसू ग्रिड द्वारा अपनी Date of birth  से जाने भविष्य के बारे में ।

यह पुस्तक आपके जन्म की तारीख के लिए पूरी तरह से व्यक्तिगत है, और जैसे कि मैं आपको प्रत्येक अध्याय की शुरुआत के लिए सटीक पेज नंबर नहीं दे सकता। हालाँकि, यह आपको निम्नलिखित पृष्ठों में मिलेगा: परिचय लो शू ग्रिड ने आपके लो शू ग्रिड को आपके चार्ट में गुम संख्याओं को ताकत और कमजोरी के बारे में बताया गया है, जिसमें आपका समावेश चार्ट आपके भविष्य के भविष्य के पथ नंबर का वर्णन करता है जो आपके पूर्व में जन्म के अनुकूलता अंक विज्ञान का दिन है।

परिचय यह उस दिन, लगभग 4,000 साल पहले एक अविश्वसनीय रूप से रोमांचक और अप्रत्याशित खोज रहा होगा। वू के हसिया, बाद में चीन के पांच पौराणिक सम्राटों में से पहला बनने के लिए, ह्वांग हो (पीली) नदी पर काम कर रहा था, बाढ़ को रोकने के लिए एक रास्ता खोजने की कोशिश कर रहा था जो नियमित रूप से तबाह समुदायों के निचले और मध्य धाराओं के साथ तबाह हो गया था नदी। इस काम के दौरान, वू को एक कछुआ खोल मिला। यह, अपने आप में, एक बहुत ही शुभ शगुन था क्योंकि इस समय के लोगों का मानना ​​था कि भगवान कछुआ और कछुए के गोले के अंदर रहते थे। हालाँकि, इस विशेष कछुए के खोल पर असाधारण निशान थे। वू और उनके सहयोगियों ने पता लगाया कि कछुआ खोल में अपनी पीठ पर तीन-तीन-तीन जादू वर्ग था। इस वर्ग को लो शू ग्रिड (चित्रा पहचान ए) के रूप में जाना जाता है। यह वर्ग उल्लेखनीय था क्योंकि प्रत्येक क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर और विकर्ण पंक्ति में पंद्रह तक जोड़ा गया था। पंद्रह अमावस्या और पूर्णिमा के बीच की संख्या है। पांच नंबर प्राचीन चीन में बहुत माना जाता था और इस जादू वर्ग में केंद्रीय स्थिति में पांच शामिल थे। कोई आश्चर्य नहीं कि वू और उनके सलाहकार इस खोज से बहुत उत्साहित थे।

           अध्याय 1 लो शू ग्रिड कछुआ की पीठ पर जादू वर्ग को लो शू ग्रिड कहा जाता था। यह तीन जादू वर्ग (चित्रा 3 ए) द्वारा एक आदर्श तीन था।  प्रत्येक पंक्ति, क्षैतिज रूप से, लंबवत और तिरछे, पंद्रह तक जोड़े गए।

सुदूर पूर्व अंकशास्त्र में अभी भी मूल लो शू पदों का उपयोग करके किया जाता है, और हम बाद में ("की") में देख रहे होंगे। हालांकि, पश्चिम में, ग्रिड का उपयोग कुछ अलग तरीके से किया जाता है। किसी भी व्यक्ति के जन्म की पूर्ण तारीख को नीचे के बाएं हाथ के वर्ग (चित्र 3 बी) में रखा गया है। किसी भी 2s को इसके ठीक ऊपर वाले वर्ग में रखा गया है, और कोई भी 3s शीर्ष बाएं हाथ के वर्ग में जाता है।

मध्यम वर्ग में तीन वर्ग नीचे के वर्ग में कोई भी 4 एस, मध्य में कोई 5 एस और शीर्ष में कोई 6 वर्ग। स्वाभाविक रूप से, दाहिने हाथ के बक्से में किसी भी सेवंस (नीचे वर्ग में), किसी भी आठ (बीच में) और नाइन (शीर्ष में) होते हैं। पृष्ठ ४ का of

प्रत्येक संख्या के लिए सही स्थिति चित्र 3C में दर्शाई गई है। (यह केवल यह दिखाने के लिए है कि प्रत्येक नंबर कहाँ जाता है।) एक चार्ट जिसमें प्रत्येक एकल वर्ग भरा हो, असंभव है। इसी तरह, यह किसी के लिए भी असंभव है जो कभी भी पूरी तरह से खाली चार्ट के लिए रहता है। खाली चार्ट उन लोगों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो अभी तक दुनिया में नहीं आए हैं। चार्ट केवल तभी आता है जब बच्चा पैदा होता है।

हम पूर्ण चार्ट का वर्णन करने के लिए दो उदाहरणों का उपयोग करेंगे।  12 जुलाई, 1973 को पैदा हुए एक युवक के पास चार्ट होगा जो चित्र 3 डी में दिखाया गया है। 7 जुलाई को नीचे दाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है, क्योंकि यह वह जगह है जहां कोई भी 7s जाता है, 12 वीं से 1 और 2 क्रमशः नीचे और मध्य बाएं हाथ के वर्गों में रखे जाते हैं। 1973 के 1 को नीचे बाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है। 9 को शीर्ष दाएं हाथ के वर्ग में, 7 को दाएं हाथ के वर्ग में और 3 को बाएं बाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है।

पृष्ठ ५ का of

चलिए एक और उदाहरण पेश करते हैं। इस बार हम 29 फरवरी, 1944 को जन्मी एक महिला का उपयोग करेंगे।

2 फरवरी से मध्य बाएं बाएं वर्ग में रखा गया है। एक और 2 को फिर उसी वर्ग (29 से) में रखा गया है। 29 में से 9 को शीर्ष दाहिने हाथ के वर्ग में रखा गया है। अंत में वर्ष से संख्याओं को स्थिति में रखा गया है: नीचे बाएं हाथ के वर्ग में 1, शीर्ष दाएं हाथ के वर्ग में 9, और मध्य पंक्ति पर नीचे वर्ग में दो 4 जी।

संख्याओं को समूहीकृत करना चार्ट को विभिन्न तरीकों से देखा जा सकता है। शीर्ष पंक्ति (संख्या 3, 6 और 9 से बनी) किसी व्यक्ति के सिर का प्रतिनिधित्व कर सकती है। मध्य पंक्ति (संख्या 2, 5 और 8) शरीर का प्रतिनिधित्व करती है। अंत में, नीचे की पंक्ति (संख्या 1, 4 और 7) पैरों और पैरों का प्रतिनिधित्व करती है। नतीजतन, शीर्ष पंक्ति को आमतौर पर मानसिक विमान के रूप में माना जाता है, इसमें सोच, निर्माण, कल्पना और विश्लेषण शामिल है। मध्य पंक्ति को भावनात्मक विमान कहा जाता है। आखिर दिल तो शरीर में है। इस विमान में आध्यात्मिकता, अंतर्ज्ञान, भावनाएं और भावनाएं शामिल हैं। नीचे की पंक्ति को प्रैक्टिकल प्लेन कहा जाता है। इसमें शारीरिक श्रम, किसी के हाथों से अच्छा होने की क्षमता और रोजमर्रा की जिंदगी में व्यावहारिक होने की क्षमता शामिल है। सिर-बॉडीलेग सादृश्य का फिर से उपयोग करने के लिए, पैरों को मजबूती से प्रैक्टिकल प्लेन (चित्रा 3 जी) में जमीन पर रखा जाता है।

पृष्ठ ६ का of

खड़ी पंक्तियों की व्याख्या भी की जाती है। इनमें से पहला (संख्या 1, 2 और 3) थॉट प्लेन है। यह विचारों के साथ आने, चीजों को बनाने और उन्हें फलने-फूलने में व्यक्ति की क्षमता को प्रकट करता है। मध्य ऊर्ध्वाधर पंक्ति (संख्या 4, 5 और 6) विल प्लेन है। इससे सफल होने का दृढ़ संकल्प और दृढ़ता मिलती है। अंतिम ऊर्ध्वाधर पंक्ति (संख्या 7, 8 और 9) एक्शन प्लेन है। यह व्यक्ति के विचारों को कार्य में लगाने की क्षमता (चित्र 3H) को दर्शाता है।

तीन ऊर्ध्वाधर पंक्तियाँ एक प्राकृतिक प्रगति करती हैं। सबसे पहले, व्यक्ति को एक विचार (थॉट प्लेन) के साथ आना होगा। उसे दृढ़ संकल्प और दृढ़ता (विल प्लेन) रखना होगा, अन्यथा इस विचार पर कभी कार्रवाई नहीं की जाएगी। योजना इस स्तर पर की जाती है। अंत में, व्यक्ति को विचार और दृढ़ संकल्प को कार्य (एक्शन प्लेन) में सक्षम करने की आवश्यकता होती है। संख्या 0 शून्य के लिए चार्ट में कोई स्थिति नहीं है। उन्हें बस नजरअंदाज कर दिया जाता है। क्लिफ रिचर्ड, जिसका चार्ट चित्र 3I में दिखाया गया है, उसकी जन्म तिथि (14 अक्टूबर, 1940) में दो शून्य हैं। हम चार्ट में उनकी सही स्थिति में 1s, 4s और 9 सम्मिलित करते हैं, लेकिन दो शून्य के बारे में भूल जाते हैं। मैं अब तक के सबसे दिलचस्प लोगों में से एक था, जो एक सेवानिवृत्त नौसैनिक कमांडर था, जिसका जन्म 10 अक्टूबर, 1910 को हुआ था। इसका मतलब था कि उसके चार्ट में केवल चार 1 और एक 9 शामिल थे। इससे भी अधिक दिलचस्प 20 फरवरी को पैदा हुए लोग होंगे। 2020, क्योंकि उनके चार्ट में सिर्फ एक नंबर होगा!

पृष्ठ 7 का of

अध्याय 2 आपका लो शू ग्रिड लो शू ग्रिड लिडा बिरादरी सेरगिटी के लिए ऊपर दिए गए उदाहरणों की तरह, 23 मार्च, 1966 की आपकी जन्मतिथि को 3, 2, 3, 1, 9, 6, 6 और 6 नंबर में विभाजित किया गया है। उपयुक्त वर्ग।

लिडा, आपके चार्ट में एक 1, एक 2, दो 3, दो 6, एक 9 होते हैं, जिनकी व्याख्या निम्नलिखित पठन के माध्यम से की जा सकती है। जैसा कि आप देख सकते हैं कि आपका ग्रिड संख्याओं को याद कर रहा है: चार, पांच, सात, आठ, और ये निम्नलिखित अध्याय में बताए गए हैं।

आपके चार्ट में नंबर 1 नंबर प्रैक्टिकल प्लेन के शुरू में नीचे के बाएं कोने में स्थित है। यह एक मूल्यवान सुराग प्रदान करता है कि व्यक्ति कैसे प्रतिक्रिया करता है और दूसरों के साथ संवाद करता है। लिडा, आपके चार्ट में एक 1 होता है ... उनके चार्ट में सिर्फ 1 वाले लोगों को अपनी अंतरतम भावनाओं को व्यक्त करना मुश्किल लगता है। वे अन्य तरीकों से अच्छे संचारक हो सकते हैं, लेकिन अपने भीतर के स्व को उभरने की अनुमति देना कठिन है। पृष्ठ of का of

वे अक्सर दूसरे व्यक्ति की बात को देखना मुश्किल समझते हैं। सीनेटर एडवर्ड कैनेडी (जन्म 22 फरवरी, 1932) अपने चार्ट में एक 1 (चित्रा 3 जे) वाले व्यक्ति का एक अच्छा उदाहरण है। वह स्पष्ट रूप से खुद को कांग्रेस में बहुत अच्छी तरह से व्यक्त करता है, लेकिन लोगों के साथ उसकी अंतरतम भावनाओं के बारे में बात करना मुश्किल है, जिसे वह सबसे ज्यादा प्यार करता है। उसका 22 दिन का नंबर नोट करें।

नंबर 2 टू इमोशनल प्लेन का पहला नंबर है। इससे पता चलता है कि व्यक्ति कितना संवेदनशील और सहज है। यह सदी, यह चीनी अंक विज्ञान चार्ट में तीसरा सबसे आम नंबर है। इक्कीसवीं सदी में पैदा हुए हर किसी के चार्ट में कम से कम एक 2 होगा। यह कुंभ राशि के आने के संकेत के रूप में लिया जा सकता है क्योंकि सभी के पास देखभाल, संवेदनशील और सहज गुण होंगे। कैसे और अगर वे इन लक्षणों का उपयोग करते हैं, तो यह एक और मामला है। लिडा, आपके चार्ट में एक 2 होते हैं ... उनके चार्ट में एक 2 वाले लोग संवेदनशील और सहज होते हैं। दुर्भाग्य से, वे भी आसानी से आहत होते हैं। वे एक नज़र में अन्य लोगों को योग करने में सक्षम हैं, और पागलपन का पता लगाने में एक अलौकिक क्षमता है। नास्त्रेदमस, प्रसिद्ध सोलहवीं सदी के मानसिक, जो 14 दिसंबर, 1503 को पैदा हुए थे, उनके चार्ट में एक 2 था (चित्र 3 एन)।

नंबर 3

पृष्ठ ९ of of का

मेंटल प्लेन की शुरुआत में चार्ट के ऊपरी बाएँ हाथ की स्थिति में तीन पाए जाते हैं। यह थॉट रो की अंतिम संख्या और मानसिक फलक की पहली संख्या है। नतीजतन, यह काफी हद तक बौद्धिक क्षमता से संबंधित है। यह एक सकारात्मक, खुशहाल संख्या है। तीन भी स्मृति और स्पष्ट रूप से और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता से संबंधित हैं।  लिडा, आपके चार्ट में दो 3 के होते हैं ... उनके चार्ट में दो 3s वाले लोगों के पास अच्छी कल्पनाएँ होती हैं। वे मानसिक रूप से सतर्क हैं और आमतौर पर रचनात्मक हैं। वे फड़फड़ा सम्मेलन का आनंद लेते हैं और थोड़ा सनकी प्रतीत हो सकते हैं। इस संयोजन वाले कई लोग लेखक बन जाते हैं, क्योंकि वे अपनी रचनात्मक कल्पना को चैनल करने और अपने विचारों को शब्दों में व्यक्त करने की क्षमता रखते हैं। मिखाइल गोर्बाचेव (जन्म 2 मार्च, 1931) अपने चार्ट (चित्रा 3 एस) में दो 3s के साथ किसी का उदाहरण है।

Monday, 30 September 2019

शाबर मंत्र द्वारा रोग उपचार shabar mantra or rog upchar

शाबर मंत्र द्वारा रोग निवारण
Astha Jyotish asansol
Wp.9333112719.
Shabar Mantra dwara Rog Nivaran.
 1. शाबर मंत्र दुर्बलता का इलाज :-

तू है वीर बड़ा हनुमान |
लाल लंगोटी मुख में पान |
ऐर भगावै |
बैर भगावै |
अमुक में शक्ति जगावै |
रहे इसकी काया दुर्बल |
तो माता अंजनी की आन |
दुहाई गौरा पार्वती की |
दुहाई राम की |
दुहाई सीता की |
ले इसके पिण्ड की खबर |
ना रहे इसमें कोई कसर |

यदि कोई अकारण ही दुर्बल होता जा रहा हो और कारण समझ में नहीं आये तो इस मंत्र का 7 बार जाप करते हुए प्रत्येक मंत्र के बाद रोगी पर फूँक लगाए और यही रोगी स्वयं करता है तो रोगी खुद को फूक लगाए इसके साथ ही रोगी को हनुमान जी के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा से उनके चरणों का सिन्दूर लाकर तिलक भी करें | रोगी किसी भी रोग से पीड़ित हो उसे स्वास्थ्य लाभ अवश्य मिलेगा ||
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⇒ || रोग, भूत- प्रेत और किये- कराये में प्रभावशाली मंत्र ||

2.शाबर मंत्र, नाभि का उखड़ना :

ॐ नमो नाड़ी नाड़ी |
नौ से नाड़ी |
बहत्तर कोठा |
चलै अगाड़ी |
डिगै न कोठा |
चले नाड़ी रक्षा करे यती हनुमन्त कि आन |
शब्द साँचा |
पिंड काँचा |
फुरे मंत्र ईश्वरोवाचा |
आप एक पीला बाँस ले ले जिसमे 9 गाँठें हो | अब रोगी को जमीन पर लिटा दे और उसकी नाभि के ऊपर यह बाँस खड़ा करके इस मंत्र का जाप करते हुए बाँस के छेद में जोर – जोर से फूंक मरते रहे इस प्रकार करने से उखड़ी हुई नाभि तुरंत ठीक हो जाती है ||

 3. शाबर मंत्र, बवासीर का निवारण :

ॐ काका कता क्रोरी कर्ता |
ॐ करता से होय |
यरसना दश हूंस प्रकटे |
खूनी बादी बवासीर न होय |
मंत्र जान के न बताये |
द्वादश ब्रह्म हत्या का पाप होय |
लाख जप करे तो उसके वंश में न होय |
शब्द साँचा |
पिण्ड काँचा |
हनुमान का मंत्र साँचा |
फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा

रात को पानी एक बर्तन में रख दे, सुबह होने पर उस पानी को ऊपर दिए मंत्र से 21 बार अभिमंत्रित करके गुदा प्रक्षालन करें | ऐसा करने से बवासीर कैसी भी हो शीघ्र ही ठीक हो जाती है ||

 4. शाबर मंत्र, मासिक पीड़ा का निवारण :

ॐ नमो आदेश मनसा माता का |
बड़ी – बड़ी अदरख |
पतली पतली रेश |
बड़े विष के जल फाँसी दे |
शेष गुरु का वचन न जाये खाली |
पिया पंच मुंड के बाम पद ठेली |
विषहरी राई की दुहाई |

थोड़ी सी अदरख लेकर इस मंत्र से सात बार फूंककर मासिक धर्म में होने वाली पीड़ाओं से ग्रसित स्त्री को खिलाने से मासिक पीड़ा शांत हो जाती है ||


श्री
रामचंद्र सिंह गुरु का |
तोडूं गाँठ ओंगा ठाली |
तोड़ दूँ लाय |
तोड़ दूँ सरित |
परित देकर पाय |
यह देख हनुमन्त दौड़कर आये |
अमुक की देह शांति पाय |
रोग कूँ वीर भगाये |
रोग न नसै तो नरसिंह की दुहाई |
फुरे हुकुम खुदाई |

किसी पान वाले से एक सादा पान बनवा कर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए सात बार इस पान को अभिमंत्रित कर ले | और इसे अब रोगिणी को खिला दे ऐसा करने से रोगिणी का अनियमित मासिक धर्म ठीक और नियमित समय पर होने लगता है ||

 6. शाबर मंत्र, रोग(रोग समझ न आने पर ) निवारण :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |
काली कमली वाला श्याम |
उसको कहते है घनश्याम |
रोग नाशे |
शोक नाशे |
नहीं तो कृष्ण की आन |
राधा मीरा मनावे |
अमुक का रोग जावे |

जब यह समझ में नहीं आये की वास्तव में रोगी किस रोग से पीड़ित है तो इस मंत्र का जाप करते हुए रोगी को झाड़ा दे | रोगी को अवश्य लाभ मिलेगा ||

7.शाबर मंत्र, कमर दर्द निवारण :

चलता जाये |
उछलता जाये |
भस्म करन्ता |
डह डह जाये |
सिद्ध गुरु की आन |
महादेव की शान |
शब्द साँचा |
पिंड काँचा |
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा |

इस मंत्र से रोगी को झाड़ा दे | इसके बाद एक कला धागा लेकर रोगी के सर से पाँव तक नापकर अलग कर ले और इस मंत्र को 21 बार पढ़े और हर मंत्र के साथ जहां मंत्र में फुरो शब्द आता है वहां दागे पर फूंक लगते जाये | इसके बाद इस दागे को रोगी को धारण करवा दे | ऐसा करने से रोगी को दर्द से शीघ्र मुक्ति मिल जाएगी ||

 8. शाबर मंत्र, आँख के दर्द का निवारण :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |
समुद्र |
समुद्र में खाई |
इस (मरद) की आँख आई |
पाकै, फूटे न पीड़ा करे |
गुरु गोरख की आज्ञा करें |
मेरी भक्ति |
गुरु की शक्ति |
फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा

मंत्र प्रयोग विधि :-
नमक की सात डली लेकर इस मंत्र का उच्चारण करते हुए सात बार झाड़ा करें तो नेत्रों (आँख) की पीड़ा दूर हो जाती है ( मंत्र में “मरद” की जगह आप रोगी भी कह सकते है या आप रोगी का नाम भी ले सकते है ||

 9. शाबर मंत्र, दांत-दाढ़ के दर्द का उपाय :-

ॐ नमो आदेश गुरु का |
बन में ब्याई अञ्जनी |
जिन जाया हनुमंत |
कीड़ा मकुड़ा माकड़ा |
ये तीनों भस्मन्त |
गुरु की शक्ति |
मेरी भक्ति |
फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा |

मंत्र प्रयोग विधि: – एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए इस मंत्र को सात बार जपें | इस प्रकार करने से रोगी का दांत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायेगा और पीड़ित व्यक्ति अपने दर्द में आराम की अनुभूति करेगा |

 10. शाबर मंत्र, समस्त रोग निवारण :-

वन में बैठी वानरी |
अंजनी जायो हनुमन्त |
बाल डमरू ब्याही बिलाई |
आँख कि पीड़ा |
मस्तक कि पीड़ा |
चौरासी बाई |
बलि बलि भस्म हो जाय |
पके न फूटे |
पीड़ा करें तो गोरखयती रक्षा करें |
गुरु कि शक्ति |
मेरी भक्ति |
फुरे मंत्र ईश्वरो वाचा |

इस मंत्र को 108 बार जाप करते हुए रोगी को झाड़ा देने से रोगी के समस्त रोग नष्ट हो जाते है ||

 ⇒ ||सभी रोग दूर करने का प्रभावशाली मंत्र व प्रयोग विधि ||

Tuesday, 24 September 2019

नवरात्री कब मनाएं 2019


नावरात्री 2019
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इस वर्ष नवरात्री 2019 का समय शारणी ईस प्रकार है ।
 मां की पूजा सभी दिन होगी, जिससे भक्तों को शुभ फल प्राप्त हो सकेगा। इस बार तिथि का क्षय नहीं है। 8 अक्टूबर को विजयादशमी है इसी दिन नवरात्रि पूजन का समापन होगा। नवरात्र में लोग अपने घरों में कलश की स्थापना करते हैं। मिथिला पंचांग के अनुसार 29 सितंबर यानी नवरात्र के पहले दिन रात 10.11 मिनट तक प्रतिपदा है। जिस कारण कलश स्थापना का लंबा समय मिलेगा। यानी कि नवरात्रि के पहले दिन कभी भी कलश की स्थापना की जा सकती है। लेकिन कलश स्थापना के लिए प्रात:काल का समय सबसे उत्तम रहेगा।
शरद नवरात्रि की तिथियां :
नवरात्रि दिन पहला (प्रतिपदा), 29 सितंबर 2019 (रविवार) – घटस्थापना, मां शैलपुत्री पूजा।
नवरात्रि दिन दूसरा (द्वितीया), 30 सितंबर 2019 (सोमवार) – मां ब्रह्मचारिणी पूजा।
नवरात्रि दिन तीसरा (तृतीया), 1 अक्टूबर 2019, (मंगलवार) – मां चंद्रघंटा पूजा।
नवरात्रि दिन चौथा (चतुर्थी), 2 अक्टूबर 2019 (बुधवार) – मां कूष्मांडा पूजा।
नवरात्रि दिन पांचवा (पंचमी), 3 अक्टूबर 2019 (गुरुवार) – मां स्कंदमाता पूजा।
नवरात्रि दिन छठा (षष्ठी‌), 4 अक्टूबर 2019 (शुक्रवार) – मां कात्यायनी पूजा।
नवरात्रि दिन सातवां (सप्तमी), 5 अक्टूबर 2019 (शनिवार) – मां कालरात्रि पूजा।
नवरात्रि दिन आठवां (अष्टमी), 6 अक्टूबर 2019, (रविवार) – मां महागौरी, दुर्गा महा अष्टमी पूजा, दुर्गा महा नवमी पूजा
नवरात्रि दिन नौवां (नवमी), 7 अक्टूबर 2019, (सोमवार) – मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारणा।
नवरात्रि दिन दसवां (दशमी), 8 अक्टूबर 2019, (मंगलवार) – दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी।
 *जय माता दी *
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[17/09, 7:13 pm] Astha Jyotish*V.Guru *Mk*: अगर आप व्यक्तिगत रूप से या फोन पर #Astrologer Vastu Guru-Mkpoddar से अपनी समस्याओं को लेकर बात करना चाहते हैं, अपनी नई जन्म पत्रिका बनवाना चाहते हैं या अपनी जन्म पत्रिका दिखाकर उचित सलाह चाहते हैं, अपने घर या ऑफिस का वास्तु ठीक करना चाहते हैं, भवन निर्माण संबंधी वास्तु  सर्विस चाहते हैं तो संस्थान द्वारा निर्धारित फीस/शुल्क अदा कर के आप बात कर सकते हैं। कृपया #निशुल्क: ज्योतिष-वास्तु परामर्श । और
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Tuesday, 3 September 2019

जादू टोने टोटके दूर करने के उपाय

जादू-टोने टोटके दूर करने के उपाय
*आस्था ज्योतिष, Vastu Master M.poddar जी को व्हाट्सप करें अपनी समस्या हमें
लिख कर भेंजें 9333112719 पर ।

गाय के घी, पीली सरसो, कपूर तथा गुग्गल का धूप बनाकर सूर्यास्त के समय गाय के गोबर से बने उपलों की सहायता से जलाएं। यह धुनी 21 दिनों तक घर में दे । यह घर से नकारात्मक शक्तियों को दूर करने में रामबाण ईलाज है |
2 केसर, गायत्री तथा जावित्री को कूटकर चूर्ण बना लें तथा उसमें गुग्गल मिश्रित कर प्रातः काल तथा संध्या काल निरंतर 21 दिनों तक घर में धूप दें
3 चार गोमती चक्र लेकर शुक्ल पक्ष के बुधवार को पीड़ित व्यक्ति के ऊपर उतारकर चारो दिशा में फेंक दें।घर में हनुमान चालीसा की चमत्कारी चौपाइयो का सुबह और शाम पीड़ित के सामने पाठ करे
4.नियमित रूप से अपने घर में गौ मूत्र और गंगा जल छिड़कैं।
5.घर के बगीचे में आक तथा तुलसी का पौधा लगाएं।6.नित्य गणेश जी को एक साबुत सुपारी अर्पित करें तथा गरीब को कटोरी भर अन्न दान करें।
7.रविवार के दिन काले धतूरे की जड़ ले और उसका ताबीज बनाकर पीड़ित व्यक्ति को पहनाये
8.लहसून के रस में हींग मिलाकर पीड़ित को सुंघा दें।पीड़ित व्यक्ति को नारायण कवच का पाठ कराये। हमारे ब्लॉग पर  और देखें
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 किसी भी प्रकार के टोने टोटको से परेशान व्यक्ति Vastu Guru (M poddar) जी से सम्पर्क कर उपाय ले सकते है
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व्हाट्सप 9333112719.

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रत्न धारण कैसे करें?

Jyotishgurumk बृहद संहिता पुराणों पर आधारित आचार्य वाराहमिहिर द्वारा स्वरचित सुन्दर ग्रन्थ है। वाराहमिहिर के इस ग्रन्थ में रत्नों की उत्पत्...