ज्योतिष और वास्तु समाधान जैसे दुकान,ऑफ़िस,फ़ैक्ट्री,बिवाह में देरी ,शिक्षा,प्रेम बाधा, मांगलिक दोष, कोट केस, भुत प्रेत बाधा, इत्यादि,। Numerology, raki hiling, color therapy द्वारा समाधान सम्भव है । आप अपनी जन्म तिथि और जन्म तारीख़ और जन्म स्थान बता कर समस्या का समाधान पा सकते हैं । हमारे WhatsApp no. 9333112719 पर संपर्क कर सकते हैं ।
Wednesday, 4 November 2020
वास्तु और फेंगशुई के राज आपको मालामाल बना देगा
Saturday, 8 August 2020
महामृत्युंजय मंत्र जप करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है
Astha Jyotish Asansol
Vastu Guru Mkpoddar
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!
कौन कैसे पढ़े महामृत्युंजय मंत्र
महामृत्युंजय के अलग-अलग मंत्र हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार जो भी मंत्र चाहें चुन लें और नित्य पाठ में या आवश्यकता के समय प्रयोग में लाएँ। मंत्र निम्नलिखित हैं-
तांत्रिक बीजोक्त मंत्र- ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ ॥ ( साधकों के लिए)
संजीवनी मंत्र : ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूर्भवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनांन्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ। ( व्यापारियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष फलदायी)
कालजयी मंत्र: ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ॥ ( समस्त गृहस्थों के लिए। विशेषकर रोगों से और कष्टों से मुक्ति के लिए)
रोगों से मुक्ति के लिए बीज मंत्र
रोगों से मुक्ति के लिए यूं तो महामृत्युंजय मंत्र विस्तृत है लेकिन आप बीज मंत्र के स्वस्वर जाप करके रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। इस बीज मंत्र को जितना तेजी से बोलेंगे आपके शरीर में कंपन होगा और यही औषधि रामबाण होगी। जाप के बाद शिवलिंग पर काले तिल और सरसो का तेल ( तीन बूंद) चढाएं।
Vastu Guru ( Mkpoddar)
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ॐ हौं जूं सः ( तीन माला)
महामृत्युंजय मंत्र: रखें सावधानी
1. महामंत्र का उच्चारण शुद्ध रखें
2. एक निश्चित संख्या में जप करें।
3. मंत्र का मानसिक जाप करें।
4. पूरे विधि-विधान और धूप-दीप के साथ जाप करें
5. रुद्राक्ष की माला पर ही जप करें।
6. माला को गोमुखी में रखें।
7. जप काल में महामृत्युंजय यंत्र की पूजा करें।
8. महामृत्युंजय के जप कुशा के आसन पर बैठकर करें।
9. जप काल में दुग्ध मिले जल से शिवजी का अभिषेक करते रहें।
10. महामृत्युंजय मंत्र का जाप पूर्व दिशा की तरफ मुख करके ही करें।
11. जितने दिन जप करें इस समय ब्ररहामचर का पालन करें।
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Thursday, 6 August 2020
Kundli में उच्च शिक्षा प्राप्ति योग
ॐ।
🙏जय माता दी🙏
Vastu Guru //Mk Poddar//
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कुंडली मे उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए ग्रह योग के बारे में बता रहा हूँ आप अपनी कुंडली से देख कर पता कर सकते है ।
1-यदि गुरु केंद्र(1,4,7व 10) में हो तो जातक बुद्धिमान होता है। गुरु उच्च अथवा स्वग्रही हो तो और अच्छा फल देता है।
2-पंचम भाव में सूर्य सिंह राशि में हो तो जातक मनोनुकूल शिक्षा पूर्ण करता है।
3-बुध पंचम में हो तथा पंचमेश बली होकर केंद्र में स्थित हो तथा शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो जातक बुद्धिमान होता है।
4-पंचमेश उच्च का केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो तो जातक पूर्ण शिक्षा पाता है।
5-गुरु शुक्र व बुध यदि केंद्र व त्रिकोण में एक साथ या अलग-अलग स्थित हों तथा गुरु उच्च, स्वग्रही या मित्र क्षेत्र में हो तो सरस्वती योग बनता है। ऐसे जातक पर सरस्वती की विशेष कृपा होती है।
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6-दशमेश व पंचमेश का स्थान परिवर्तन अर्थात् दशम भाव का स्वामी पंचम में तथा पंचम भाव का स्वामी दशम में हो तो व्यक्ति अच्छी शिक्षा प्राप्त करता है।
7-बुध, चंद्रमा व मंगल पर शुक्र या गुरु की दृष्टि हो तो भी जातक बड़ा बुद्धिमान होता है।
8-पंचम भाव में गुरु हो तो जातक अनेक शास्त्रों का ज्ञाता पुत्र व मित्रों से समृद्ध, बुद्धिमान व धैर्यवान होता है।
9-लग्नेश यदि 12वें या 8वें भाव में हो तो जातक सिद्धि प्राप्त करता है और वह विद्या विशारद होता है।
10-चतुर्थेश सप्तम व लग्न में हो तो जातक बहुत सी विद्या का ज्ञाता होता है।
11-चंद्रमा से गुरु त्रिकोण में हो, बुध से मंगल त्रिकोण में और गुरु से बुध एकादश स्थान में हो तो जातक अच्छी शिक्षा प्राप्त करके बहुत सा धन अर्जन करता है।
12-शिक्षा प्राइज़ में सूर्य चंद्र, बुध, गुरु, मंगल व शनि ग्रह की विशेष भूमिका है। इसके अतिरिक्त लग्नेश, पंचमेश व नवमेश तथा इन भावों का विश्लेषण भी उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु करना चाहिए। लग्नेश निर्बल हुआ तो बुद्धि व भाग्य व्यर्थ हो जाएंगे, यदि पंचम भाव निर्बल हुआ तो शरीर और भाग्य क्या करेंगे और यदि भाग्य कमजोर हुआ तो शरीर व बुद्धि व्यर्थ होंगे।
13-पंचमेश शुभ ग्रह हो और पंचमेश का नवांशपति भी शत्रु ग्रहों से युत व दृष्टा न हो तो उच्च शिक्षा प्राप्त होती है।
14-गुरु केंद्र या त्रिकोण में होकर शनि, राहु, केतु से युत या दृष्ट हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त कर विद्वान बनता है।
15-गुरु द्वितीयेश होकर बलवान सूर्य व शुक्र से दृष्ट हो तो जातक व्याकरण शास्त्र का ज्ञाता होता है।
16-पंचम भाव व पंचमेश बुध व मंगल के प्रभाव में हो तो जातक व्?यापार संबंधी उच्?च शिक्षा प्राप्त करता है।
17-धन भाव में मंगल शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या धनभाव में चंद्र, मंगल की युति हो व बुध द्वारा दृष्ट हो तो जातक गणित विषय का ज्ञाता होता है।
18-यदि द्वितीयेश से 8वें, 12वें शुभ ग्रह हों तो जातक प्रखर विद्वान होता है।
19-लग्नेश, पंचमेश, नवमेश में परस्?पर युति या दृष्टि संबंध हो तो जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।
20-गुरु व चंद्रमा एक-दूसरे के घर में हो तो चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि हो तो सरस्वती योग होता है, जिससे जातक साहित्य, कला व काव्य में उच्च शिक्षा पाकर लोकप्रिय होता है।
21- गुरु लग्न में हो तथा चंद्र से तृतीय सूर्य, मंगल, बुध हो तो जातक विज्ञान विषय में उच्च शिक्षा पाकर वैज्ञानिक बनता है।
22-यदि मेष लग्न हो और पंचम में बुध तथा सूर्य पर गुरु की दृष्टि पड़े तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
23-यदि वृष लग्न हो और उसमें सूर्य बुध की युति लग्न, चतुर्थ या अष्टम में हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
24-यदि मिथुन लग्न हो और लग्न में शनि, तृतीय में शुक्र तथा नवम में गुरु स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
25-यदि कर्क लग्न हो और उसमें लग्न में बुध, गुरु व शुक्र की युति हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
26-यदि सिंह लग्न हो और मंगल-गुरु की युति चतुर्थ, पंचम या एकादश भाव में हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
27-यदि कन्या लग्न हो और उसमें एकादश भाव में गुरु, चंद्र तथा नवम भाव में बुध स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
28-यदि तुला लग्न हो और अष्टम में शनि गुरु द्वारा दृष्ट हो तथा नवम में बुध स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
29-यदि वृश्चिक लग्न हो और उसमें बुध सूर्य हो तथा नवम भाव में गुरु चंद्र स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
30- यदि धनु लग्न हो और उसमें गुरु हो तथा पंचम में मंगल व चंद्र स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
31- यदि मकर लग्न हो और उसमें शुक्र-मंगल की युति हो तथा पंचम भाव में चंद्र गुरु द्वारा दृष्ट हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
32- यदि कुंभ लग्न और एकादश भाव में चंद्र तथा षष्ठ भाव में गुरु स्थित हो तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
33- यदि मीन लग्न हो और उसमें गुरु षष्ठ, शुक्र अष्ठम, शनि नवम तथा मंगल-चंद्र एकादश भाव में हों तो जातक उच्च शिक्षा पाता है।
(आप अपनी कुण्डली में उक्त योगों को विचारकर शिक्षा संबंधी विश्लेषण कर सकते हैं।)गुरु कृपा केवलं।।WP. 9333112719 🙏
Monday, 3 August 2020
इन वास्तु दोष के कारण होती है, (मधुमेह)/Daivitig शुगर की बीमारी
Saturday, 1 August 2020
Vashikaran All Purposes 100%
Vashikaran: आपकी उंगलियों पर नाचेगा पति,100% गारंटी
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ज्यो तिशऔर
वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.
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शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
शयन कक्ष के कारक ग्रह मंगल एवं शुक्र हैं। मंगल पुरुष का तथा शुक्र ग्रह महिला का कारक है। पति-पत्नी (पुरुष एवं महिला) के प्रयोग के लिए शयन कक्ष ही उचित स्थान है। दम्पति में कलह हो तो देखें कि यदि पत्नी की तरफ से शुरूआत हो तो शुक्र की गड़बड़ी होगी और यदि पति की तरफ से कलह प्रारंभ हो तो मंगल की गड़बड़ी होगी क्योंकि शयन कक्ष में मंगल एवं शुक्र की शक्ति बराबर ही रहनी चाहिए तभी दाम्पत्य जीवन का सुखद एवं सही उपयोग हो सकता है।
शुक्र की गड़बड़ी को दूर करने के लिए दीवारों पर आकर्षक गुलाबी रंग के पेंट की पुताई कराएं तथा सुंदर चित्र एवं अच्छी पेंटिंग टांगें।
पर्दे हल्के गुलाबी रंग के सुगंध से युक्त हों, बेशक इत्र की, सैट की या देशी गुलाब, चंपा, चमेली, बेला आदि की सुगंध हो या रात रानी की सुगंध।
पलंग की चादर सफेद या गुलाबी हो।
गद्दा एवं तकिए मुलायम खुशनुमा रंग के हों तो कठोर बोलने वाली पत्नी के व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है।
यदि मंगल (पुरुष) की तरफ से गड़बड़ी हो तो उसे ठीक करने के लिए कमरे में लाल पेंट (रंग) कराएं।
टी.वी. आदि इलैक्ट्रॉनिक वस्तुएं शयन कक्ष में रखें।
गद्दे, तकिए हल्के से कठोर हों तो बेहतर (शुभ) होगा।
दीवारों पर तांबे की धातु के बने सजावट के समान लगाएं।
नक्काशीदार और शोपीस धातु के रखें, गुलाबी या लाल रंग के नाइट लैंप लगाएं तथा गर्म दूध का सेवन करें।
सर्दियों में हीटर का इस्तेमाल करें और सर्दियों के बाद इस्तेमाल न करते हुए भी हीटर शयन कक्ष में रखें। इससे कितने भी उग्र स्वभाव का पति हो, वह भी वश में हो जाता है।
मकान में बाएं हाथ पर पड़ने वाली खिड़कियां पत्नी, मां, बेटियों और बहनों का कारक बनती हैं, इसलिए मकान के बाएं हाथ की खिड़कियां ठीक हालत में होनी चाहिएं।
नवदंपति अथवा पच्चीस साल पहले के शादीशुदा दम्पति अपनी यौन संबंधी समस्याएं इस मंत्र के जाप से दूर कर सकते हैं। इस मंत्र का 11 दिनों तक हर रोज़ आधी रात में पश्चिम दिशा में बैठकर कम से कम एक माला जाप करें। 11वें दिन तक आते-आते आप खुद महसूस करेंगे की पार्टर में गजब का परिवर्तन आया है। ये फर्क दूसरे दिन से भी आरंभ हो सकता है लेकिन 11 दिन अवश्य पूरे करने हैं।
मंत्र - ओम कामदेवाय विद्महे रति प्रियायै धीमहि टैनो अनंग प्रचोदयात एल"
विशेष: यदि सुबह के समय इस मंत्र का जाप करना है तो सूर्योदय के समय स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद एकांत में मंत्र जाप आरंभ करें।
इस मंत्र को अपने प्रियतम का नाम लेकर आरंभ करें।
ज्योतिष और वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.
WP. 9333112719
https://youtu.be/ORCDGWKSG6c.
इस मंत्र में रुठे साथी या प्रेमी को अपना दिवाना बनाने की गजब शक्ति है, ये 100% वशीकरण मंत्र है और करने में भी आसान है !
चेतावनी: इस तरह का कोई भी प्रयोग करने से पहले किसी विद्वान से संपर्क अवश्य करें। ध्यान रहे, किसी का प्यार प्राप्त करने से पहले उसे प्रेम देना पड़ता है। तभी वे आपका होगा। गलत तरीके से हासिल किया गया प्रेम कभी आपका नहीं हो सकता।
Monday, 13 July 2020
करियर बनाएं अपने राशि और ग्रह अनुसार
ग्रह आपके करियर विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं?
सूर्य
चन्द्रमा
मंगल
बुध
बृहस्पति
शुक्र
शनि ग्रह
राहु और केतु
प्रत्येक राशि के अनुसार उचित करियर मंत्र
मेष राशि
- किस देवता की करें पूजा : भगवान शिव
- इस मंत्र का करें जप : ॐ नमः शिवाय
- करियर विकल्प : सरकार, सैन्य, विज्ञापन, राजनीति, प्रबंधन
वृषभ राशि
- किस देवता की करें पूजा : माँ महाकाली
- इस मंत्र का करें जप : ॐ क्लीं कालिकायै नमः
- करियर विकल्प : मसाज थेरेपिस्ट, पेंटर, कैलीग्राफर, फ्लोरिस्ट, कुक
मिथुन राशि
- किस देवता की करें पूजा : भगवान भैरवनाथ
- इस मंत्र का करें जप : ॐ बं भैरवाय नमः
- करियर विकल्प : मनोरंजन, यात्रा, वास्तुकला, शिक्षण, प्रौद्योगिकी
कर्क राशि
- किस देवता की करें पूजा : भगवान शिव और माता पार्वती
- इस मंत्र का करें जप : ॐ उमा महेश्वराभ्याम नमः
- करियर विकल्प : मेडिसिन (नर्स), पत्रकारिता, बागवानी, राजनीति
सिंह राशि
- किस देवता की करें पूजा : भगवान हनुमान
- इस मंत्र का करें जप : ॐ आञ्जनेयाय नमः
- करियर विकल्प : इवेंट प्लानिंग एंड मैनेजमेंट, मीडिया एंड पब्लिक रिलेशंस, एक्टिंग, एनिमेशन, मॉडलिंग
कन्या राशि
- किस देवता की करें पूजा : माता सरस्वती
- इस मंत्र का करें जप : ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
- करियर विकल्प : वित्त, स्टॉक मार्केट, निवेश, वास्तुकला, भौतिकी, चिकित्सा, अनुसंधान, इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण, कानून, एकाउंट्स
तुला राशि
- किस देवता की करें पूजा : गणेश भगवान
- इस मंत्र का करें जप : ॐ गं गणपतये नमः
- करियर विकल्प : मनोविज्ञान, कूटनीति, न्याय, परामर्श, सार्वजनिक परामर्श
वृश्चिक राशि
- किस देवता की करें पूजा : माँ दुर्गा
- इस मंत्र का करें जप : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
- करियर विकल्प : चिकित्सा अनुसंधान, खोजी पत्रकारिता, पुरातत्व, पर्यावरण, सेना, पैथोलॉजी
धनु राशि
- किस देवता की करें पूजा : भगवान विष्णु या उनका कोई भी अन्य रूप, मुख्यतः सूर्यदेव
- इस मंत्र का करें जप : ॐ सूर्य नारायणाय नमः
- करियर विकल्प : शिक्षण, कानून, न्याय, राजनीति, धार्मिक उपदेश, आध्यात्मिकता, ज्योतिष, लेखन
मकर राशि
- किस देवता की करें पूजा : गणेश भगवान
- इस मंत्र का करें जप : ॐ विघ्नहर्ताय नमः
- करियर विकल्प : प्रबंधन, बैंकिंग, लेखा, विज्ञापन, मीडिया, मेडिसिन
कुम्भ राशि
- किस देवता की करें पूजा : माता महालक्ष्मी
- इस मंत्र का करें जप : ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
- करियर विकल्प : फोटोग्राफी, शिक्षण, लेखन, अभिनय
मीन राशि
- किस देवता की करें पूजा : हनुमान भगवान
- इस मंत्र का करें जप : ॐ हं हनुमते नमः
- करियर विकल्प : परोपकार, दान, संगीत, लेखन, व्यवसाय प्रबंधन, विज्ञापन, फैशन, कॉमेडी, नृत्य, अभिनय, फिल्म निर्माण
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ग्रह आपके करियर विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं? हमारी कुंडली और चार्ट में मौजूद ग्रह और उनके स्थान हमारे करियर विकल्पों को काफी हद त...
















