Monday, 3 August 2020

इन वास्तु दोष के कारण होती है, (मधुमेह)/Daivitig शुगर की बीमारी

यदि भवन का निर्माण कार्य वास्तु के सिद्धांतों के विपरीत करने पर, उस स्थान पर निवास एवं कार्य करने वाले व्यक्तियों के विचार तथा कार्यशैली निश्चित ही दुष्पभावी होगी। जिसके कारण मानसिक अशांति एवं परेशानियाँ बढ़ जायेंगी। इन पांच तत्वों के उचित संतुलन एवं तालमेल के अभाव में शारीरिक स्वास्थ्य तथा बुद्धि भी विचलित हो जाती है।
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ज्योतिष और वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.
WP. 9333112719
मधुमेह /डायबिटीज निवारण हेतु के लिए वास्तु नियम–
वास्तु शास्त्र प्राचीन वैज्ञानिक जीवन शैली है वास्तु विज्ञान सम्मत तो है ही साथ ही वास्तु का सम्बन्ध ग्रह नक्षत्रों एवम धर्म से भी है ग्रहों के अशुभ होने तथा वास्तु दोष विद्यमान होने से व्यक्ति को बहुत भयंकर कष्टों का सामना करना पड़ता है. वास्तु शास्त्र अनुसार पंच तत्वों पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश और वायु तथा वास्तु के आठ कोण दिशाए एवम ब्रह्म स्थल केन्द्र को संतुलित करना अति आवश्यक होता है जिससे जीवन हमारा एवं परिवार सुखमय रह सके.

चिकित्सा शास्त्र में बहुत से लक्षण सुनने और देखने में मिलते है लेकिन वास्तु शास्त्र में बिलकुल स्पष्ट है कि घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम भाग अर्थात नैऋत्य कोण ही इस रोग का जनक बनता है देखिये कैसे—
( कुछ प्रमुख वास्तुदोष जिनके कारण मधुमेह/शुगर या डायबिटीज का रोग हो सकता हें)….

—- दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआँ,जल बोरिंग या भूमिगत पानी का स्थान मधुमेह बढाता है।
—–दक्षिण-पश्चिम कोण में हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पोधे भी शुगर का कारण है।
—–घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम कोना बड़ा हुआ है तब भी शुगर आक्रमण करेगी।
—–यदि दक्षिण-पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड भी हुआ है तो समझो मधुमेह का द्वार खुल गया।
——दक्षिण-पश्चिम भाग घर या वन की ऊँचाई से सबसे नीचा है मधुमेह बढेगी. इसलिए यह भाग सबसे ऊँचा रखे।
——-दक्षिण-पश्चिम भाग में सीवर का गड्ढा होना भी शुगर को निमंत्रण देना है।
——ब्रह्म स्थान अर्थात घर का मध्य भाग भारी हो तथा घर के मध्य में अधिक लोहे का प्रयोग हो या ब्रह्म भाग से जीना सीडीयां ऊपर कि और जा रही हो तो समझ ले कि मधुमेह का घर में आगमन होने जा रहा हें अर्थात दक्षिण-पश्चिम भाग यदि आपने सुधार लिया तो काफी हद तक आप असाध्य रोगों से मुक्त हो जायेगे..

मधुमेह/शुगर या डायबिटीज के उपचार के लिए वास्तु नियम—
——अपने भूखंड और भवन के बीच के स्थान में कोई स्टोर, लोहे का जाल या बेकार का सामान नही होना चाहिए, अपने घर क़ी उत्तर-पूर्व दिशा में नीले फूल वाला पौधा लगाये..
——अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाए।
——अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखे।
——मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।
—–दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाए।
—–अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।
——प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।
—-वृहस्पति देव की हल्दी की एक गाँठ लेकर एक चम्मच शहद में सिलपत्थर में घिस कर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह से मुक्त हो सकते है।
——रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।
——ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा ले।
इन सब के करने से आप मधुमेह मुक्त हो सकते है.
=====================================
डायबिटीज का ज्योतिषीय उपचार—
मधुमेह (डायबिटीज) एक वंशानुगत रोग भी है। शरीर में जब इंसुलिन की कमी हो जाती है, तो यह रोग होता है। दवाओं से इसको काबू किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जलीय राशि कर्क, वृश्चिक या मीन एवं शुक्र की राशि तुला में दो अथवा अधिक पापी ग्रह हों तो इस रोग की आशंका होती है। शुक्र के साथ ही बृहस्पति या चंद्रमा के दूषित होने, त्रिक् भाव में होने तथा शत्रु राशि या क्रूर ग्रहों (राहु, शनि, सूर्य व मंगल) से दृष्ट होने से भी यह रोग होता है।
अनुभूत ग्रह स्थितियां :—-
कई बार ऐसे जातक भी देखने में आए हैं जिनकी कुंडली में लग्न पर शनि-केतु की पाप दृष्टि होती है। चतुर्थ स्थान में वृश्चिक राशि में शुक्र-शनि की युति, मीन पर सूर्य व मंगल की दृष्टि और तुला राशि पर राहु स्थित होकर चंद्रमा पर दृष्टि रखे, ऐसे में जातक प्रतिष्ठित, लेकिन डायबिटीज से भी पीड़ित होता है।
प्रमुख कारण :—-
ज्योतिष के अनुसार यदि मीन राशि में बुध पर सूर्य की दृष्टि हो या बृहस्पति लग्नेश के साथ छठे भाव में हो या फिर दशम भाव में मंगल-शनि की युति या मंगल दशम स्थान पर शनि से दृष्ट हो, तो यह रोग होता है। इसके अतिरिक्त लग्नेश शत्रु राशि में, नीच का या लग्न व लग्नेश पाप ग्रहों से दृष्ट हो व शुक्र अष्टम में विद्यमान हो।
कुछ मामलों में चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि मधुमें शनि-शुक्र की 
यदि भवन का निर्माण कार्य वास्तु के सिद्धांतों के विपरीत करने पर, उस स्थान पर निवास एवं कार्य करने वाले व्यक्तियों के विचार तथा कार्यशैली निश्चित ही दुष्पभावी होगी। जिसके कारण मानसिक अशांति एवं परेशानियाँ बढ़ जायेंगी। इन पांच तत्वों के उचित संतुलन एवं तालमेल के अभाव में शारीरिक स्वास्थ्य तथा बुद्धि भी विचलित हो जाती है।

मधुमेह /डायबिटीज निवारण हेतु के लिए वास्तु नियम–
वास्तु शास्त्र प्राचीन वैज्ञानिक जीवन शैली है वास्तु विज्ञान सम्मत तो है ही साथ ही वास्तु का सम्बन्ध ग्रह नक्षत्रों एवम धर्म से भी है ग्रहों के अशुभ होने तथा वास्तु दोष विद्यमान होने से व्यक्ति को बहुत भयंकर कष्टों का सामना करना पड़ता है. वास्तु शास्त्र अनुसार पंच तत्वों पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश और वायु तथा वास्तु के आठ कोण दिशाए एवम ब्रह्म स्थल केन्द्र को संतुलित करना अति आवश्यक होता है जिससे जीवन हमारा एवं परिवार सुखमय रह सके.

चिकित्सा शास्त्र में बहुत से लक्षण सुनने और देखने में मिलते है लेकिन वास्तु शास्त्र में बिलकुल स्पष्ट है कि घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम भाग अर्थात नैऋत्य कोण ही इस रोग का जनक बनता है देखिये कैसे—
( कुछ प्रमुख वास्तुदोष जिनके कारण मधुमेह/शुगर या डायबिटीज का रोग हो सकता हें)….

—- दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआँ,जल बोरिंग या भूमिगत पानी का स्थान मधुमेह बढाता है।
—–दक्षिण-पश्चिम कोण में हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पोधे भी शुगर का कारण है।
—–घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम कोना बड़ा हुआ है तब भी शुगर आक्रमण करेगी।
—–यदि दक्षिण-पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड भी हुआ है तो समझो मधुमेह का द्वार खुल गया।
——दक्षिण-पश्चिम भाग घर या वन की ऊँचाई से सबसे नीचा है मधुमेह बढेगी. इसलिए यह भाग सबसे ऊँचा रखे।
——-दक्षिण-पश्चिम भाग में सीवर का गड्ढा होना भी शुगर को निमंत्रण देना है।
——ब्रह्म स्थान अर्थात घर का मध्य भाग भारी हो तथा घर के मध्य में अधिक लोहे का प्रयोग हो या ब्रह्म भाग से जीना सीडीयां ऊपर कि और जा रही हो तो समझ ले कि मधुमेह का घर में आगमन होने जा रहा हें अर्थात दक्षिण-पश्चिम भाग यदि आपने सुधार लिया तो काफी हद तक आप असाध्य रोगों से मुक्त हो जायेगे..

मधुमेह/शुगर या डायबिटीज के उपचार के लिए वास्तु नियम—
——अपने भूखंड और भवन के बीच के स्थान में कोई स्टोर, लोहे का जाल या बेकार का सामान नही होना चाहिए, अपने घर क़ी उत्तर-पूर्व दिशा में नीले फूल वाला पौधा लगाये..
——अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाए।
——अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखे।
——मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।
—–दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाए।
—–अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।
——प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।
—-वृहस्पति देव की हल्दी की एक गाँठ लेकर एक चम्मच शहद में सिलपत्थर में घिस कर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह से मुक्त हो सकते है।
——रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।
——ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा ले।
इन सब के करने से आप मधुमेह मुक्त हो सकते है.
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डायबिटीज का ज्योतिषीय उपचार—
मधुमेह (डायबिटीज) एक वंशानुगत रोग भी है। शरीर में जब इंसुलिन की कमी हो जाती है, तो यह रोग होता है। दवाओं से इसको काबू किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जलीय राशि कर्क, वृश्चिक या मीन एवं शुक्र की राशि तुला में दो अथवा अधिक पापी ग्रह हों तो इस रोग की आशंका होती है। शुक्र के साथ ही बृहस्पति या चंद्रमा के दूषित होने, त्रिक् भाव में होने तथा शत्रु राशि या क्रूर ग्रहों (राहु, शनि, सूर्य व मंगल) से दृष्ट होने से भी यह रोग होता है।
अनुभूत ग्रह स्थितियां :—-
कई बार ऐसे जातक भी देखने में आए हैं जिनकी कुंडली में लग्न पर शनि-केतु की पाप दृष्टि होती है। चतुर्थ स्थान में वृश्चिक राशि में शुक्र-शनि की युति, मीन पर सूर्य व मंगल की दृष्टि और तुला राशि पर राहु स्थित होकर चंद्रमा पर दृष्टि रखे, ऐसे में जातक प्रतिष्ठित, लेकिन डायबिटीज से भी पीड़ित होता है।
प्रमुख कारण :—-
ज्योतिष के अनुसार यदि मीन राशि में बुध पर सूर्य की दृष्टि हो या बृहस्पति लग्नेश के साथ छठे भाव में हो या फिर दशम भाव में मंगल-शनि की युति या मंगल दशम स्थान पर शनि से दृष्ट हो, तो यह रोग होता है। इसके अतिरिक्त लग्नेश शत्रु राशि में, नीच का या लग्न व लग्नेश पाप ग्रहों से दृष्ट हो व शुक्र अष्टम में विद्यमान हो।
कुछ मामलों में चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि मधुमें शनि-शुक्र की 

यदि भवन का निर्माण कार्य वास्तु के सिद्धांतों के विपरीत करने पर, उस स्थान पर निवास एवं कार्य करने वाले व्यक्तियों के विचार तथा कार्यशैली निश्चित ही दुष्पभावी होगी। जिसके कारण मानसिक अशांति एवं परेशानियाँ बढ़ जायेंगी। इन पांच तत्वों के उचित संतुलन एवं तालमेल के अभाव में शारीरिक स्वास्थ्य तथा बुद्धि भी विचलित हो जाती है।

मधुमेह /डायबिटीज निवारण हेतु के लिए वास्तु नियम–
वास्तु शास्त्र प्राचीन वैज्ञानिक जीवन शैली है वास्तु विज्ञान सम्मत तो है ही साथ ही वास्तु का सम्बन्ध ग्रह नक्षत्रों एवम धर्म से भी है ग्रहों के अशुभ होने तथा वास्तु दोष विद्यमान होने से व्यक्ति को बहुत भयंकर कष्टों का सामना करना पड़ता है. वास्तु शास्त्र अनुसार पंच तत्वों पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश और वायु तथा वास्तु के आठ कोण दिशाए एवम ब्रह्म स्थल केन्द्र को संतुलित करना अति आवश्यक होता है जिससे जीवन हमारा एवं परिवार सुखमय रह सके.

चिकित्सा शास्त्र में बहुत से लक्षण सुनने और देखने में मिलते है लेकिन वास्तु शास्त्र में बिलकुल स्पष्ट है कि घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम भाग अर्थात नैऋत्य कोण ही इस रोग का जनक बनता है देखिये कैसे—
( कुछ प्रमुख वास्तुदोष जिनके कारण मधुमेह/शुगर या डायबिटीज का रोग हो सकता हें)….

—- दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआँ,जल बोरिंग या भूमिगत पानी का स्थान मधुमेह बढाता है।
—–दक्षिण-पश्चिम कोण में हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पोधे भी शुगर का कारण है।
—–घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम कोना बड़ा हुआ है तब भी शुगर आक्रमण करेगी।
—–यदि दक्षिण-पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड भी हुआ है तो समझो मधुमेह का द्वार खुल गया।
——दक्षिण-पश्चिम भाग घर या वन की ऊँचाई से सबसे नीचा है मधुमेह बढेगी. इसलिए यह भाग सबसे ऊँचा रखे।
——-दक्षिण-पश्चिम भाग में सीवर का गड्ढा होना भी शुगर को निमंत्रण देना है।
——ब्रह्म स्थान अर्थात घर का मध्य भाग भारी हो तथा घर के मध्य में अधिक लोहे का प्रयोग हो या ब्रह्म भाग से जीना सीडीयां ऊपर कि और जा रही हो तो समझ ले कि मधुमेह का घर में आगमन होने जा रहा हें अर्थात दक्षिण-पश्चिम भाग यदि आपने सुधार लिया तो काफी हद तक आप असाध्य रोगों से मुक्त हो जायेगे..

मधुमेह/शुगर या डायबिटीज के उपचार के लिए वास्तु नियम—
——अपने भूखंड और भवन के बीच के स्थान में कोई स्टोर, लोहे का जाल या बेकार का सामान नही होना चाहिए, अपने घर क़ी उत्तर-पूर्व दिशा में नीले फूल वाला पौधा लगाये..
——अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर भी खाना ना खाए।
——अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल भी ना रखे।
——मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे प्रयोग करे।
—–दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ खाना अवश्य खाए।
—–अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।
——प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।
—-वृहस्पति देव की हल्दी की एक गाँठ लेकर एक चम्मच शहद में सिलपत्थर में घिस कर सुबह खाली पेट पीने से मधुमेह से मुक्त हो सकते है।
——रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड खिलाये तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर कितनी जल्दी जा रही है।
——ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए हटा ले।
इन सब के करने से आप मधुमेह मुक्त हो सकते है.
=====================================
डायबिटीज का ज्योतिषीय उपचार—
मधुमेह (डायबिटीज) एक वंशानुगत रोग भी है। शरीर में जब इंसुलिन की कमी हो जाती है, तो यह रोग होता है। दवाओं से इसको काबू किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जलीय राशि कर्क, वृश्चिक या मीन एवं शुक्र की राशि तुला में दो अथवा अधिक पापी ग्रह हों तो इस रोग की आशंका होती है। शुक्र के साथ ही बृहस्पति या चंद्रमा के दूषित होने, त्रिक् भाव में होने तथा शत्रु राशि या क्रूर ग्रहों (राहु, शनि, सूर्य व मंगल) से दृष्ट होने से भी यह रोग होता है।
अनुभूत ग्रह स्थितियां :—-
कई बार ऐसे जातक भी देखने में आए हैं जिनकी कुंडली में लग्न पर शनि-केतु की पाप दृष्टि होती है। चतुर्थ स्थान में वृश्चिक राशि में शुक्र-शनि की युति, मीन पर सूर्य व मंगल की दृष्टि और तुला राशि पर राहु स्थित होकर चंद्रमा पर दृष्टि रखे, ऐसे में जातक प्रतिष्ठित, लेकिन डायबिटीज से भी पीड़ित होता है।
प्रमुख कारण :—-
ज्योतिष के अनुसार यदि मीन राशि में बुध पर सूर्य की दृष्टि हो या बृहस्पति लग्नेश के साथ छठे भाव में हो या फिर दशम भाव में मंगल-शनि की युति या मंगल दशम स्थान पर शनि से दृष्ट हो, तो यह रोग होता है। इसके अतिरिक्त लग्नेश शत्रु राशि में, नीच का या लग्न व लग्नेश पाप ग्रहों से दृष्ट हो व शुक्र अष्टम में विद्यमान हो।
कुछ मामलों में चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि मधुमें शनि-शुक्र की 

Saturday, 1 August 2020

Vashikaran All Purposes 100%

Vashikaran: आपकी उंगलियों पर नाचेगा पति,100% गारंटी

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Astha Jyotish
ज्यो तिश

और

वास्तु समाधान  Vastu Guru_ Mk.

WhatsApp. 9333112719

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

शयन कक्ष के कारक ग्रह मंगल एवं शुक्र हैं। मंगल पुरुष का तथा शुक्र ग्रह महिला का कारक है। पति-पत्नी (पुरुष एवं महिला) के प्रयोग के लिए शयन कक्ष ही उचित स्थान है। दम्पति में कलह हो तो देखें कि यदि पत्नी की तरफ से शुरूआत हो तो शुक्र की गड़बड़ी होगी और यदि पति की तरफ से कलह प्रारंभ हो तो मंगल की गड़बड़ी होगी क्योंकि शयन कक्ष में मंगल एवं शुक्र की शक्ति बराबर ही रहनी चाहिए तभी दाम्पत्य जीवन का सुखद एवं सही उपयोग हो सकता है।

शुक्र की गड़बड़ी को दूर करने के लिए दीवारों पर आकर्षक गुलाबी रंग के पेंट की पुताई कराएं तथा सुंदर चित्र एवं अच्छी पेंटिंग टांगें। 

पर्दे हल्के गुलाबी रंग के सुगंध से युक्त हों, बेशक इत्र की, सैट की या देशी गुलाब, चंपा, चमेली, बेला आदि की सुगंध हो या रात रानी की सुगंध। 

पलंग की चादर सफेद या गुलाबी हो।

गद्दा एवं तकिए मुलायम खुशनुमा रंग के हों तो कठोर बोलने वाली पत्नी के व्यवहार में भी बदलाव आ जाता है।

यदि मंगल (पुरुष) की तरफ से गड़बड़ी हो तो उसे ठीक करने के लिए कमरे में लाल पेंट (रंग) कराएं। 

टी.वी. आदि इलैक्ट्रॉनिक वस्तुएं शयन कक्ष में रखें। 

गद्दे, तकिए हल्के से कठोर हों तो बेहतर (शुभ) होगा। 

दीवारों पर तांबे की धातु के बने सजावट के समान लगाएं।

नक्काशीदार और शोपीस धातु के रखें, गुलाबी या लाल रंग के नाइट लैंप लगाएं तथा गर्म दूध का सेवन करें। 

सर्दियों में हीटर का इस्तेमाल करें और सर्दियों के बाद इस्तेमाल न करते हुए भी हीटर शयन कक्ष में रखें। इससे कितने भी उग्र स्वभाव का पति हो, वह भी वश में हो जाता है। 

मकान में बाएं हाथ पर पड़ने वाली खिड़कियां पत्नी, मां, बेटियों और बहनों का कारक बनती हैं, इसलिए मकान के बाएं हाथ की खिड़कियां ठीक हालत में होनी चाहिएं।

नवदंपति अथवा पच्चीस साल पहले के शादीशुदा दम्पति अपनी यौन संबंधी समस्याएं इस मंत्र के जाप से दूर कर सकते हैं। इस मंत्र का 11 दिनों तक हर रोज़ आधी रात में पश्चिम दिशा में बैठकर कम से कम एक माला जाप करें। 11वें दिन तक आते-आते आप खुद महसूस करेंगे की पार्टर में गजब का परिवर्तन आया है। ये फर्क दूसरे दिन से भी आरंभ हो सकता है लेकिन 11 दिन अवश्य पूरे करने हैं। 

मंत्र - ओम कामदेवाय विद्महे रति प्रियायै धीमहि टैनो अनंग प्रचोदयात एल"

विशेष: यदि सुबह के समय इस मंत्र का जाप करना है तो सूर्योदय के समय स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद एकांत में मंत्र जाप आरंभ करें।

इस मंत्र को अपने प्रियतम का नाम लेकर आरंभ करें। 
 ज्योतिष और वास्तु समाधान  Vastu Guru_ Mk.

WP. 9333112719

https://youtu.be/ORCDGWKSG6c.

इस मंत्र में रुठे साथी या प्रेमी को अपना दिवाना बनाने की गजब शक्ति है, ये 100% वशीकरण मंत्र है और करने में भी आसान है !

चेतावनी: इस तरह का कोई भी प्रयोग करने से पहले किसी विद्वान से संपर्क अवश्य करें। ध्यान रहे, किसी का प्यार प्राप्त करने से पहले उसे प्रेम देना पड़ता है। तभी वे आपका होगा। गलत तरीके से हासिल किया गया प्रेम कभी आपका नहीं हो सकता।


Monday, 13 July 2020

करियर बनाएं अपने राशि और ग्रह अनुसार

ग्रह आपके करियर विकल्पों को कैसे प्रभावित करते हैं?

हमारी कुंडली और चार्ट में मौजूद ग्रह और उनके स्थान हमारे करियर विकल्पों को काफी हद तक प्रभावित करने का दम रखते हैं। करियर और पेशे, दोनों के ही लिहाज़ से यह ग्रह और उनकी स्थिति हमारे जीवन को पलटने की मापदा रखती है। अगर किसी इंसान की कुंडली में कोई ग्रह प्रबल अवस्था में मौजूद होता है तो ,उस इंसान का उस ग्रह पर हावी कैरियर क्षेत्रों की ओर झुकाव होने की सबसे अधिक संभावना रहती है।
ज्योतिष और वास्तु समाधान Vastu Guru_ Mk.WP. 9333112719
https://youtu.be/ORCDGWKSG6c
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आइये अब जानने की कोशिश करते हैं कि ग्रहों के अनुसार हमारे पास क्या-क्या करियर विकल्प मौजूद होते हैं। 

सूर्य 

यदि आपकी कुंडली में सूर्य प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प:
सरकार, राजनीति, खगोल विज्ञान, प्रबंधन, आयुर्वेद, सांख्यिकी और आध्यात्मिकता

चन्द्रमा 

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प:
नृत्य, अभिनय, संगीत, जीव विज्ञान, फार्मेसी और मनोविज्ञान

मंगल 

यदि आपकी कुंडली में मंगल प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प:
मैकेनिकल इंजीनियरिंग, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, कंस्ट्रक्शन, कुकिंग, स्पोर्ट्स

बुध

यदि आपकी कुंडली में बुध प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प:
ज्योतिष, एकाउंटिंग, पत्रकारिता, विपणन, बिक्री, व्यापार और वाणिज्य, और नेटवर्किंग
करियर या पेशे में कोई बाधा? अभी पूछें प्रश्न और पाएं हर समस्या का हल 

बृहस्पति

यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प:
शिक्षाविद, जीवविज्ञान, कानून, शास्त्रीय साहित्य, दर्शन, इतिहास, चिकित्सा, उपदेशक, मानविकी, वित्त और अर्थशास्त्र

शुक्र

यदि आपकी कुंडली में शुक्र प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प: 
वनस्पति विज्ञान, मनोरंजन, मीडिया, फैशन डिजाइनिंग, वास्तुकला, नृत्य, बागवानी, चित्रकला, वनस्पति विज्ञान, पर्यटन, विमानन, आतिथ्य, मानविकी, ललित कला और ग्राफिक्स

शनि ग्रह

यदि आपकी कुंडली में शनि ग्रह प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प: 
पुरातत्व, तेल, गैस और खनिज, खनन, भूगोल, पेट्रोलियम, भूविज्ञान, इतिहास, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, कोडिंग, विनिर्माण

राहु और केतु 

यदि आपकी कुंडली में राहु और केतु ग्रह प्रबल अवस्था में मौजूद है तो आपके लिए सबसे अच्छे करियर विकल्प: 
गूढ़ विषय, फिल्म उद्योग, विदेशी भाषा, डिजिटल, अध्यात्मविज्ञान/तत्त्वविज्ञान, विमानन, वैमानिकी इंजीनियरिंग, कंप्यूटर
राज योग रिपोर्ट से पाएं कुंडली में मौजूद सभी राज योग की जानकारी 

प्रत्येक राशि के अनुसार उचित करियर मंत्र 

क्या आप ये जानना चाहते हैं कि आपकी राशि के अनुसार कौन सा करियर आपके लिए उपयुक्त साबित हो सकता है? या क्या आप यह जानना चाहते हैं कि कौन सा मंत्र आपके करियर ग्राफ को बढ़ाने में आपकी मदद कर सकता है? नीचे हम आपको सभी राशि के अनुसार अनुकूल कैरियर विकल्पों के साथ पूजा करने के लिए मंत्र और किस देवता की पूजा करनी चाहिए इसकी सूची प्रदान कर रहे हैं:

मेष राशि

  • किस देवता की करें पूजा : भगवान शिव 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ नमः शिवाय
  • करियर विकल्प : सरकार, सैन्य, विज्ञापन, राजनीति, प्रबंधन

वृषभ राशि  

  • किस देवता की करें पूजा : माँ महाकाली 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ क्लीं कालिकायै नमः
  • करियर विकल्प : मसाज थेरेपिस्ट, पेंटर, कैलीग्राफर, फ्लोरिस्ट, कुक

मिथुन राशि  

  • किस देवता की करें पूजा : भगवान भैरवनाथ 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ बं भैरवाय नमः
  • करियर विकल्प : मनोरंजन, यात्रा, वास्तुकला, शिक्षण, प्रौद्योगिकी

कर्क राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : भगवान शिव और माता पार्वती 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ उमा महेश्वराभ्याम नमः
  • करियर विकल्प : मेडिसिन (नर्स), पत्रकारिता, बागवानी, राजनीति

सिंह राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : भगवान हनुमान 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ आञ्जनेयाय नमः
  • करियर विकल्प : इवेंट प्लानिंग एंड मैनेजमेंट, मीडिया एंड पब्लिक रिलेशंस, एक्टिंग, एनिमेशन, मॉडलिंग

कन्या राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : माता सरस्वती 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
  • करियर विकल्प : वित्त, स्टॉक मार्केट, निवेश, वास्तुकला, भौतिकी, चिकित्सा, अनुसंधान, इंजीनियरिंग, डेटा विश्लेषण, कानून, एकाउंट्स 

तुला राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : गणेश भगवान 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ गं गणपतये नमः
  • करियर विकल्प : मनोविज्ञान, कूटनीति, न्याय, परामर्श, सार्वजनिक परामर्श

वृश्चिक राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : माँ दुर्गा 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै
  • करियर विकल्प : चिकित्सा अनुसंधान, खोजी पत्रकारिता, पुरातत्व, पर्यावरण, सेना, पैथोलॉजी

धनु राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : भगवान विष्णु या उनका कोई भी अन्य रूप, मुख्यतः सूर्यदेव 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ सूर्य नारायणाय नमः
  • करियर विकल्प : शिक्षण, कानून, न्याय, राजनीति, धार्मिक उपदेश, आध्यात्मिकता, ज्योतिष, लेखन

मकर राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : गणेश भगवान 
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ विघ्नहर्ताय नमः
  • करियर विकल्प : प्रबंधन, बैंकिंग, लेखा, विज्ञापन, मीडिया, मेडिसिन

कुम्भ राशि 

  • किस देवता की करें पूजा : माता महालक्ष्मी 
  • इस मंत्र का करें जप :  ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै  नमः
  • करियर विकल्प : फोटोग्राफी, शिक्षण, लेखन, अभिनय

मीन राशि

  • किस देवता की करें पूजा : हनुमान भगवान
  • इस मंत्र का करें जप : ॐ हं हनुमते नमः
  • करियर विकल्प : परोपकार, दान, संगीत, लेखन, व्यवसाय प्रबंधन, विज्ञापन, फैशन, कॉमेडी, नृत्य, अभिनय, फिल्म निर्माण

नाड़ी ज्योतिष द्वारा आसान समाधान


केरलीय प्रश्न विचार Kerala Prashan Astrology in Hindi
By Vastu Guru Mk Poddar
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अंको या या संख्या द्वारा प्रश्न विषयक विचार केरल प्रदेश में सर्वाधिक प्रचलित है,इसी कारण इस शास्र को केरलीय ज्योतिष मे नाम से जाना जाता है। इस पध्दति से सम्बन्धित अनेक ज्योतिष ग्रन्थ उपल्ब्ध हैं,जैसे केरल प्रश्न संग्रह केरलीय प्रश्न रत्न प्रश्नचूडामणि आदि। Kerala Prashan Astrology in Hindi

प्रश्न कैसे जाना जाये?

पूछने वाला यदि सात्विक प्रवृत्ति का है,तो उससे किसी फ़ूल का नाम,अगर तेज तर्रार है तो किसी नदी का नाम,और व्यापारी है तो किसी देवता का नाम,और नौकरी पेशा करने वाला है तो उससे किसी फ़ल का नाम पूंछना चाहिये,कुच विद्वानो का मत है कि पूंछने वाला अगर सुबह को पूंछे तो किसी बालक के द्वारा किसी पेड का नाम जानना चाहिये,और दोपहर में किसी जवान आदमी से फ़ूल का नाम जानना चाहिये,शाम को किसी बूढे व्यक्ति से फ़ल का नाम जानना चाहिये। और हमारे अनुसार केवल प्रश्न पूंछने वाले से ही प्रश्न करना चाहिये,कि वह अपने प्रश्न का चिन्तन करते हुये अपने किसी भी इष्ट का नाम मन में रखे और फ़ूल नदी देवता फ़ल या वृक्ष का नाम ले,फ़िर उसके अनुसार अंक पिंड बनाकर प्रश्न संबन्धी विचार करना चाहिये।

एक समय में एक प्रश्न पर ही विचार करना चाहिये,हंसी मजाक या परीक्षा के लिये प्रश्न नही करना चाहिये,अन्यथा कालगति समय पर परेशान कर सकती है। केवल परेशानी में ही प्रश्न करने के बाद पूरा उत्तर मिल सकता है।

अंक पिंड बनाने के नियम

पेड या देवता जिसका भी नाम लें,उसे कागज पर लिख लें, तदोपरान्त स्वर व व्यंजन की संख्यानुसार उस नाम का पिंड बना लें,अंक पिंड के आधार पर ही प्रश्न के फ़ल का विचार किया जाता है। स्वर व व्यंजन के लिये प्रयुक्त संखा निम्न प्रकार समझें।

स्वर अंक चक्रम

स्वर अं
संख्या 12 21 11 18 15 22 18 32 25 19 25
व्यंजन अंक चक्रम

व्यंजन ड. य़ं
संख्या 13 11 21 30 10 15 21 23 26 26 10
व्यंजन ढ.
संख्या 13 22 35 45 14 18 17 13 35 27 18
व्यंजन
संख्या 26 27 86 16 13 13 35 26 35 35 12


उपरोक्त अक्षरों में यदि ऋ का प्रयोग किया जाये तो रि की भांति (र+इ) को मानना चाहिये। लृ का प्रयोग केवल वैदिक मंत्रों के अन्दर होता है, जिज्ञासा के अन्दर इस अक्षर का महत्व नही है।

स्वर और व्यंजनो के अंक चक्रों में उनके नीचे संख्या का मान दिया गया है,पूंछने वाले के द्वारा कहे गये फ़ल फ़ूल नदी फ़ल वृक्ष या देवता के नाम के स्वर और व्यंजनों को अलग अलग कर लेना चाहिये,इसके बाद उपरोक्त सारणी के द्वारा संख्या को लिखना चाहिये,और दोनो के जोड को जानकर वही अंक पिण्ड मानना चाहिये।

उदाहरण के लिये अगर किसी ने “गुलाब” का नाम लिया,यह फ़ूल का नाम है,इसके अंक पिंड बनाने के लिये इस प्रकार की क्रिया को करना पडेगा:-
ग+उ+ल+आ+ब = 21+15+13+21+26+12 = 108 संख्या पिंड गुलाब का माना जाता है। इस प्रकार से किसी भी नाम का अंक पिंड आसानी से आप बना सकते है।

प्रश्नों के प्रकार

केरलीय प्रश्न विचार के अन्दर विद्वानों ने उन्हे अनेक प्रकार से बांटा है,यहां पर अलग अलग प्रश्नों को हल करने के उद्देश्य से लिखा गया है,इनमें प्रश्नों के नौ प्रकार ही मुख्य हैं।

लाभ हानि के प्रश्न – किसी भी देवता या फ़ल फ़ूल या वृक्ष के नाम का पिंड+42 के जोड में 3 का भाग,1 में लाभ,2 में बीच का और 3 में हानि जाननी चाहिये।
जय और पराजय के प्रश्न- उपरोक्त प्रणाली के द्वारा पिंड+34 के जोड में 3 का भाग,1 बचे तो जय,2 बचे तो समझौता,और 3 बचे तो पराजय जाननी चाहिये।
सुख दुख से जुडे प्रश्न – उपरोक्त तरीके की प्रणाली से पिंड बनाकर 38 जोड कर 2 भाग देना चाहिये,1 बचे तो सुख और 0 बचे तो दुख जानना चाहिये।
आने जाने के प्रश्न – पिंड बनाकर 33 को जोडना चाहिये,3 का भाग देना चाहिये, 1 बचे तो आना जाना होगा, 2 बचे तो आना या जाना नही होगा, 0 बचे तो आना या जाना होगा लेकिन काम नही होगा।

गर्भ और बिना गर्भ के प्रश्न – पूंछने वाले से उपरोक्त में किसी कारक (फ़ल फ़ूल या नदी पेड भगवान आदि) का नाम जानकर उसके पिंड बनाने चाहिये,फ़िर 26 जोड कर 3 का भाग देना चाहिये,यदि 1 बचता है तो गर्भ है,2 बचे तो गर्भ होने में संदेह है,और 3 बचे तो गर्भ नही है।

पुत्र कन्या जानने के प्रश्न – पूंछने वाले से उपरोक्त में किसी कारक (फ़ल फ़ूल या नदी पेड भगवान आदि) का नाम जानकर उसके पिंड बनाने चाहिये,फ़िर उसी पिंड में 3 का भाग देना चाहिये, 1 बचे तो पुत्र और 2 बचे तो पुत्री और 0 बचे तो गर्भपात समझना चाहिये।

तेजी मंदी जानने के प्रश्न – जो भी अंक पिंड है उसमे तीन का भाग दीजिये,एक बचता है तो सस्ता यानी मंदी,और दो बचता है तो सामान
,और तीन बचता है तो भाव चढेगा, यह बात शेयर बाजार के लिये भी जानी जा सकती है,इसमें शेयर के नाम का पिंड बनाकर उपरोक्त रीति से देखना पडेगा।
विवाह वाले प्रश्न – इसमें वर और कन्या किसी भी पक्ष से उपरोक्त कारकों से कोई नाम जानकर उसके पिंड बना लेना चाहिये, उसके अन्दर आठ का भाग देना चाहिये, अगर एक बचता है तो आराम से विवाह हो जायेगा,दो बचता है तो प्रयत्न करने पर ही विवाह होगा, तीन में विवाह अभी नही होगा, चार में वर की तरफ़ से सवाल पर कन्या की और कन्या की तरफ़ सवाल जानने पर वर या कन्या के साथ कोई अपघात हो जायेगी, अथवा वर या कन्या के बारे में कोई गूढ बात आजाने पर विवाह नही हो पायेगा, पांच बचने पर उसके परिवार में कोई हादसा हो जाने से विवाह नही होगा, छ: बचने पर राजकीय बाधा सामने आने से विवाह नही होगा, सात बचने पर पिता को कष्ट होगा,आठ बचने पर विवाह तो होगा लेकिन संतान नही होगी,यह जानना चाहिये।
जन्म मरण के प्रश्न- उपरोक्त कारकों से कोई भी कारक नाम पूंछने वाले से जानना चाहिये,जिसके बारे में जाना जा रहा है वह उसका खून का सम्बन्धी होना जरूरी है,उस कारक के पिंड बनाकर उसके अन्दर चालीस की संख्या को जोडना चाहिये,और तीन का भाग देना चाहिये, एक बचता है तो जीवन बाकी है, दो बचता है तो जीवन तो है,लेकिन कष्ट अधिक है, शून्य बचता है,तो भगवान का भरोसा कहना चाहिये,सीधे रूप में मृत्यु है ऐसा नही कहना चाहिये।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :- https://m.facebook.com/?_rdr#!/story.php?story_fbid=705586746675118&id=100016713975161&refid=8&_ft_=qid.6849044003210234060%3Amf_story_key.-2941870518041936970%3Atop_level_post_id.705586746675118%3Acontent_owner_id_new.100016713975161%3Asrc.22%3Astory_location.5%3Aview_time.1594667323%3Afilter.h_nor&__tn__=%2As%2As-R

Tuesday, 9 June 2020

मकान आपके लिए शुभ है या अशुभ अपने और मकान के पहले अक्षर बर्ग अंक द्वारा जाने

आप के स्थान का पहला अक्षर किस वर्ग से है ?
by Mk Vastu🏘Vastu Articles.
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वैसे तो आज के इस युग में व्यक्ति के पास बहोत कम ऑप्सन होता है कि वह किस शहर को अपना निवास स्थान बनाये जहाँ निवास कर के उसे उन्नति और प्रगति के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्राप्त हो ।
पर वास्तुशास्त्र में एक वर्ग विधि है जिससे वह आसानी से यह ज्ञात कर सकता है कि उसे उसके वर्तमान सहर अथवा नगर में उसको किस तरह का लाभ-हानि प्राप्त होगा।
निवास के योग्य स्थान जानने के लिए आप को कुछ निम्नलिखित बातों को सर्वप्रथम जानना होगा _ क्यों की आप के स्थान का पहला अक्षर किस वर्ग से है यह निर्धारित होने के पश्च्यात ही इसका लाभ उठाया जा सकता है।
* वर्ग ( अ )अ, आ, ई, उ, ए, ओ संख्या (1)
* वर्गेस गरूड
* दिशा पूर्व (e)
* वर्ग ( क ) क, ख, ग, घ, ङ संख्या (2)
* वर्गेस विडाल
* दिशा आग्नेय (s/e )
* वर्ग ( च ) च, छ, ज, झ, संख्या (३)
* वर्गेस सिंह
*दिशा दक्षिण (s)
* वर्ग ( ट ) ट, ठ, ड, ढ, ण संख्या (4)
* वर्गेस श्वान
* दिशा नैऋत्य (s/w )
* वर्ग ( त ) त, थ, द, ध, न संख्या (5)
* वर्गेस सर्प
* दिशा पश्चिम ( w )
* वर्ग ( प ) प, फ, ब, भ, म संख्या (6)
* वर्गेस मूसक
* दिशा वायव्य (n/w )
* वर्ग ( य ) य, र, ल, व संख्या (7)
* वर्गेस गज ( मृग )
* दिशा उत्तर ( n )
* वर्ग ( श ) श, ष, स, ह संख्या (8)
* वर्गेस मेष ( शशक )
* दिशा ईशान (n/e )
अब वर्गेस की आपस में शत्रुता, मित्रता और सम
( उदासीन ) भाव भी जानें_
__________________________________________
वर्गेस शत्रु.
* *
गरुङ सर्प
मार्जर ( बिल्ली ) मूषक
सिंह हिरण ( मृग )
श्वान मेष
यह परस्पर शत्रु होते हैं।
* अपने वर्ग से पांचवां शत्रु होता है।चौथा वर्ग मित्र एवं तीसरा वर्ग उदासीन ( सम ) होता है।
__________________________________________
वर्गेस मित्र
* *
गरुङ श्वान
मर्जर ( विडाल- बिल्ली ) सर्प
सिंह मूषक
सर्प मेष
मूषक गरुङ
हिरन मर्जर ( विडाल- बिल्ली )
मेष सिंह
यह परस्पर मित्र होते हैं।
__________________________________________
वर्गेस सम ( उदासीन )
* *
गरुङ सिंह
मर्जर श्वान
सिंह सर्प
श्वान मूषक
सर्प मृग ( हिरन )
मूषक मेष
मृग गरुङ
मेष मर्जर ( विडाल- बिल्ली )
यह आपस में सम होते हैं अर्थात न शुभ और न अशुभ
__________________________________________
उदाहरण_
आइये उदाहरण से जानने का प्रयास करें? सर्वप्रथम आप के शहर या आप की एरिया के नाम का पहला अक्षर जानें ( वह किस “वर्ग” में आता है )और फिर उसकी दिशा क्या है
जैसे – नानकचंद्र को ग्वालियर में रहना है।
अब नानकचंद्र का “वर्ग” ( त ) है सर्प
और दिशा पश्चिम ( w ) है
ग्वालियर का “वर्ग” ( क ) है विडाल
और दिशा आग्नेय (s/e ) है
इसतरह नानकचंद्र के वर्ग से ग्वालियर का वर्ग छठा है। अतः नानकचंद्र के लिए ग्वालियर योग्य स्थान है।
इसी तरह लाभ-हानि भी ज्ञात कर सकते हैं_
जैसे-
नानकचंद्र की वर्ग संख्या 5
ग्वालियर की वर्ग संख्या 2
पहले साधक ( नानकचंद्र ) की वर्ग संख्या
फिर साध्य ( ग्वालियर ) की वर्ग संख्या को मिलाएं
52 इसमें 8 से भाग दें
52÷8 शेष बचा ( 4) यह साधक का “धन”
अब संख्या को उल्टा करें
25 इसमें भी 8 से भाग दें
25÷8 शेष बचा (1)यह साधक का “ऋण”
इससे यह सिद्ध हुआ की साधक “नानकचंद्र”
साध्य “ग्वालियर” में निवास करने से
4 का लाभ और
1 खर्च होता रहेगा।
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Thursday, 21 May 2020

कुंडली से जाने जन्म तारीख,माह,वर्ष,समय,पक्ष,तिथी और नक्षत्र

लग्न कुंडली से कैसे जानें Date/month/year/Time
VastuGuru Mk wp.9333112719
: @ जातक जब ज्योतिष जिज्ञासा लेकर हमारे पास आते हैं तो बिना उनके बताए, हम यह बता दें कि जातक का प्रश्र क्या है।
: किसी के पास कोई दिव्य चक्षु नहीं है, सारा वैदिक ज्योतिष गणना पर आधारित है। विषय में जो दिया है, यदि आप वैदिक ज्योतिष का सामान्य ज्ञान रखते हैं तो यह कर सकते हैं।
: इस लिए मुल विषय से पहले कक्षा में वैदिक ज्योतिष के सिद्धांत आरंभ से बता रहे हैं।
: आज़ की कक्षा में, मैं आपको विषय से संबंधित एक जातक को चमत्कृत करने का एक आसान ढंग सीखाना चाहूंगा।
: निम्न लग्न कुंडली को ध्यान से देखें।
: आपकों इस कुंडली से, जातक का जन्म समय, मास, पक्ष, तिथि व आयु बतानी है।
: क्या यह संभव है?
: यह संभव है, कक्षा में आज़ यही सीखना है। साधारण गणना है।
: आपने कुंडली बनानी सीख ली है तो यह सूत्र भी सीख लेंगे।
: सबसे पहले मास ज्ञात करते हैं। यह सूर्य राशि से संभव है।
: सूर्य हर संक्रांति को राशि परिवर्तन करते हैं। यह अंग्रेजी मास की १५ से २० तारीख के मध्य होती है। अप्रैल मास में मेष राशि,(१) में प्रवेश करते हैं। यहां ८ वृश्चिक राशि में है। यानी लगभग नवंबर मध्य में इस राशि में आएं हैं। सूर्य २३ अंश पर है। यानी इस राशि में लगभग २३ दिन से है। जन्म मास दिसंबर है
: अभ्यास से जानें
: ८ से १० तारीख के बीच
: अब समय ज्ञात करते हैं। यह भी सूर्य की स्थिति से जानेंगे।
: सूर्योदय के समय, सूर्य लग्न भाव में स्थित होता है। हर लग्न में पिछले भाव में हों जाते हैं, यानी प्रथम से द्वादश भाव में।
: लग्न दो अंशों के लगभग है व सूर्य द्वादश भाव में।
: जन्म सुबह ७ से ८ के मध्य
: अब पक्ष जानते हैं। यह चन्द्र की स्थिति से जानेंगे।
: सूर्य चंद्र, अमावस्या को एक ही राशि में व पुर्णिमा को १ से ७वे भाव में।
: यानी पुर्णिमा को, सूर्य यदि पहले भाव में है तो चांद ७वे भाव में हो।
: इस प्रकार यदि चन्द्रमा , सूर्य से १-७ भाव में है तो शुक्ल पक्ष, ७-१२ में है तो कृष्ण पाक्ष
: यहां चन्द्र सूर्य से अष्टम भाव में है तो कृष्ण पक्ष
: द्वितीया या तृतीया तिथि
: अब नक्षत्र जानते हैं यह भी चन्द्र की स्थिति से संभव है
: चन्द्र जिस राशि में है, उस से पहली राशि संख्या को ३० से गुना करें व कुंडली में दिए चन्द्र के अंशों को गुणनफल में जोड़ें
: ३०*२ - ६०
६०+ १९ - ७९
: 30*2+19=79 degree
: इसे १३.३३ से भाग करें
: भागफल नक्षत्र संख्या है
: यानी ६ वा नक्षत्र, चतुर्थ चरण
: 5.92 degree
: .25 अंशों का एक चरण है
: अब वर्तमान आयु जानेंगे
: यह शनि की स्थिति से संभव है
: इसके लिए गोचर में शनि की स्थिति का ज्ञान आवश्यक है।
: शनि अब मकर राशि में है, कुंडली में कर्क राशि में है।
: शनि एक राशि में ढायी वर्ष रहता है।
: जातक की वर्तमान आयु १४-१५ वर्ष या ४४-४५ वर्ष है
: उपस्थित जातक की वय देखकर कथन करें।
: यह फलित नहीं है, कुछ जातक केवल लग्न कुंडली हाथ से लिख कर प्रस्तुत कर देते हैं। गणित से उन्हें प्रभावित करने के लिए यह ढंग उत्तम है
: आज़ इतना ही। आज्ञा दे। आप सभी का मंगल हो।
: Thank you sir
बय
44-45 नही समझ आया
उपस्थित जातक की वय  का अर्थ क्या है  सर जी
[ ३०+१५
जा:9,12,1976 time 7.24 am  place Nagpur  Maharashtra
[: जातक का सही जन्म विवरण यह है, अभी मिला है, जो जातक ने स्वयं भेजा है।

Tuesday, 31 March 2020

लोसू ग्रिड numerology

(LOSU GRID) IN NUMEROLOGY  लोसू ग्रिड द्वारा अपनी Date of birth  से जाने भविष्य के बारे में ।

यह पुस्तक आपके जन्म की तारीख के लिए पूरी तरह से व्यक्तिगत है, और जैसे कि मैं आपको प्रत्येक अध्याय की शुरुआत के लिए सटीक पेज नंबर नहीं दे सकता। हालाँकि, यह आपको निम्नलिखित पृष्ठों में मिलेगा: परिचय लो शू ग्रिड ने आपके लो शू ग्रिड को आपके चार्ट में गुम संख्याओं को ताकत और कमजोरी के बारे में बताया गया है, जिसमें आपका समावेश चार्ट आपके भविष्य के भविष्य के पथ नंबर का वर्णन करता है जो आपके पूर्व में जन्म के अनुकूलता अंक विज्ञान का दिन है।

परिचय यह उस दिन, लगभग 4,000 साल पहले एक अविश्वसनीय रूप से रोमांचक और अप्रत्याशित खोज रहा होगा। वू के हसिया, बाद में चीन के पांच पौराणिक सम्राटों में से पहला बनने के लिए, ह्वांग हो (पीली) नदी पर काम कर रहा था, बाढ़ को रोकने के लिए एक रास्ता खोजने की कोशिश कर रहा था जो नियमित रूप से तबाह समुदायों के निचले और मध्य धाराओं के साथ तबाह हो गया था नदी। इस काम के दौरान, वू को एक कछुआ खोल मिला। यह, अपने आप में, एक बहुत ही शुभ शगुन था क्योंकि इस समय के लोगों का मानना ​​था कि भगवान कछुआ और कछुए के गोले के अंदर रहते थे। हालाँकि, इस विशेष कछुए के खोल पर असाधारण निशान थे। वू और उनके सहयोगियों ने पता लगाया कि कछुआ खोल में अपनी पीठ पर तीन-तीन-तीन जादू वर्ग था। इस वर्ग को लो शू ग्रिड (चित्रा पहचान ए) के रूप में जाना जाता है। यह वर्ग उल्लेखनीय था क्योंकि प्रत्येक क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर और विकर्ण पंक्ति में पंद्रह तक जोड़ा गया था। पंद्रह अमावस्या और पूर्णिमा के बीच की संख्या है। पांच नंबर प्राचीन चीन में बहुत माना जाता था और इस जादू वर्ग में केंद्रीय स्थिति में पांच शामिल थे। कोई आश्चर्य नहीं कि वू और उनके सलाहकार इस खोज से बहुत उत्साहित थे।

           अध्याय 1 लो शू ग्रिड कछुआ की पीठ पर जादू वर्ग को लो शू ग्रिड कहा जाता था। यह तीन जादू वर्ग (चित्रा 3 ए) द्वारा एक आदर्श तीन था।  प्रत्येक पंक्ति, क्षैतिज रूप से, लंबवत और तिरछे, पंद्रह तक जोड़े गए।

सुदूर पूर्व अंकशास्त्र में अभी भी मूल लो शू पदों का उपयोग करके किया जाता है, और हम बाद में ("की") में देख रहे होंगे। हालांकि, पश्चिम में, ग्रिड का उपयोग कुछ अलग तरीके से किया जाता है। किसी भी व्यक्ति के जन्म की पूर्ण तारीख को नीचे के बाएं हाथ के वर्ग (चित्र 3 बी) में रखा गया है। किसी भी 2s को इसके ठीक ऊपर वाले वर्ग में रखा गया है, और कोई भी 3s शीर्ष बाएं हाथ के वर्ग में जाता है।

मध्यम वर्ग में तीन वर्ग नीचे के वर्ग में कोई भी 4 एस, मध्य में कोई 5 एस और शीर्ष में कोई 6 वर्ग। स्वाभाविक रूप से, दाहिने हाथ के बक्से में किसी भी सेवंस (नीचे वर्ग में), किसी भी आठ (बीच में) और नाइन (शीर्ष में) होते हैं। पृष्ठ ४ का of

प्रत्येक संख्या के लिए सही स्थिति चित्र 3C में दर्शाई गई है। (यह केवल यह दिखाने के लिए है कि प्रत्येक नंबर कहाँ जाता है।) एक चार्ट जिसमें प्रत्येक एकल वर्ग भरा हो, असंभव है। इसी तरह, यह किसी के लिए भी असंभव है जो कभी भी पूरी तरह से खाली चार्ट के लिए रहता है। खाली चार्ट उन लोगों की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो अभी तक दुनिया में नहीं आए हैं। चार्ट केवल तभी आता है जब बच्चा पैदा होता है।

हम पूर्ण चार्ट का वर्णन करने के लिए दो उदाहरणों का उपयोग करेंगे।  12 जुलाई, 1973 को पैदा हुए एक युवक के पास चार्ट होगा जो चित्र 3 डी में दिखाया गया है। 7 जुलाई को नीचे दाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है, क्योंकि यह वह जगह है जहां कोई भी 7s जाता है, 12 वीं से 1 और 2 क्रमशः नीचे और मध्य बाएं हाथ के वर्गों में रखे जाते हैं। 1973 के 1 को नीचे बाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है। 9 को शीर्ष दाएं हाथ के वर्ग में, 7 को दाएं हाथ के वर्ग में और 3 को बाएं बाएं हाथ के वर्ग में रखा गया है।

पृष्ठ ५ का of

चलिए एक और उदाहरण पेश करते हैं। इस बार हम 29 फरवरी, 1944 को जन्मी एक महिला का उपयोग करेंगे।

2 फरवरी से मध्य बाएं बाएं वर्ग में रखा गया है। एक और 2 को फिर उसी वर्ग (29 से) में रखा गया है। 29 में से 9 को शीर्ष दाहिने हाथ के वर्ग में रखा गया है। अंत में वर्ष से संख्याओं को स्थिति में रखा गया है: नीचे बाएं हाथ के वर्ग में 1, शीर्ष दाएं हाथ के वर्ग में 9, और मध्य पंक्ति पर नीचे वर्ग में दो 4 जी।

संख्याओं को समूहीकृत करना चार्ट को विभिन्न तरीकों से देखा जा सकता है। शीर्ष पंक्ति (संख्या 3, 6 और 9 से बनी) किसी व्यक्ति के सिर का प्रतिनिधित्व कर सकती है। मध्य पंक्ति (संख्या 2, 5 और 8) शरीर का प्रतिनिधित्व करती है। अंत में, नीचे की पंक्ति (संख्या 1, 4 और 7) पैरों और पैरों का प्रतिनिधित्व करती है। नतीजतन, शीर्ष पंक्ति को आमतौर पर मानसिक विमान के रूप में माना जाता है, इसमें सोच, निर्माण, कल्पना और विश्लेषण शामिल है। मध्य पंक्ति को भावनात्मक विमान कहा जाता है। आखिर दिल तो शरीर में है। इस विमान में आध्यात्मिकता, अंतर्ज्ञान, भावनाएं और भावनाएं शामिल हैं। नीचे की पंक्ति को प्रैक्टिकल प्लेन कहा जाता है। इसमें शारीरिक श्रम, किसी के हाथों से अच्छा होने की क्षमता और रोजमर्रा की जिंदगी में व्यावहारिक होने की क्षमता शामिल है। सिर-बॉडीलेग सादृश्य का फिर से उपयोग करने के लिए, पैरों को मजबूती से प्रैक्टिकल प्लेन (चित्रा 3 जी) में जमीन पर रखा जाता है।

पृष्ठ ६ का of

खड़ी पंक्तियों की व्याख्या भी की जाती है। इनमें से पहला (संख्या 1, 2 और 3) थॉट प्लेन है। यह विचारों के साथ आने, चीजों को बनाने और उन्हें फलने-फूलने में व्यक्ति की क्षमता को प्रकट करता है। मध्य ऊर्ध्वाधर पंक्ति (संख्या 4, 5 और 6) विल प्लेन है। इससे सफल होने का दृढ़ संकल्प और दृढ़ता मिलती है। अंतिम ऊर्ध्वाधर पंक्ति (संख्या 7, 8 और 9) एक्शन प्लेन है। यह व्यक्ति के विचारों को कार्य में लगाने की क्षमता (चित्र 3H) को दर्शाता है।

तीन ऊर्ध्वाधर पंक्तियाँ एक प्राकृतिक प्रगति करती हैं। सबसे पहले, व्यक्ति को एक विचार (थॉट प्लेन) के साथ आना होगा। उसे दृढ़ संकल्प और दृढ़ता (विल प्लेन) रखना होगा, अन्यथा इस विचार पर कभी कार्रवाई नहीं की जाएगी। योजना इस स्तर पर की जाती है। अंत में, व्यक्ति को विचार और दृढ़ संकल्प को कार्य (एक्शन प्लेन) में सक्षम करने की आवश्यकता होती है। संख्या 0 शून्य के लिए चार्ट में कोई स्थिति नहीं है। उन्हें बस नजरअंदाज कर दिया जाता है। क्लिफ रिचर्ड, जिसका चार्ट चित्र 3I में दिखाया गया है, उसकी जन्म तिथि (14 अक्टूबर, 1940) में दो शून्य हैं। हम चार्ट में उनकी सही स्थिति में 1s, 4s और 9 सम्मिलित करते हैं, लेकिन दो शून्य के बारे में भूल जाते हैं। मैं अब तक के सबसे दिलचस्प लोगों में से एक था, जो एक सेवानिवृत्त नौसैनिक कमांडर था, जिसका जन्म 10 अक्टूबर, 1910 को हुआ था। इसका मतलब था कि उसके चार्ट में केवल चार 1 और एक 9 शामिल थे। इससे भी अधिक दिलचस्प 20 फरवरी को पैदा हुए लोग होंगे। 2020, क्योंकि उनके चार्ट में सिर्फ एक नंबर होगा!

पृष्ठ 7 का of

अध्याय 2 आपका लो शू ग्रिड लो शू ग्रिड लिडा बिरादरी सेरगिटी के लिए ऊपर दिए गए उदाहरणों की तरह, 23 मार्च, 1966 की आपकी जन्मतिथि को 3, 2, 3, 1, 9, 6, 6 और 6 नंबर में विभाजित किया गया है। उपयुक्त वर्ग।

लिडा, आपके चार्ट में एक 1, एक 2, दो 3, दो 6, एक 9 होते हैं, जिनकी व्याख्या निम्नलिखित पठन के माध्यम से की जा सकती है। जैसा कि आप देख सकते हैं कि आपका ग्रिड संख्याओं को याद कर रहा है: चार, पांच, सात, आठ, और ये निम्नलिखित अध्याय में बताए गए हैं।

आपके चार्ट में नंबर 1 नंबर प्रैक्टिकल प्लेन के शुरू में नीचे के बाएं कोने में स्थित है। यह एक मूल्यवान सुराग प्रदान करता है कि व्यक्ति कैसे प्रतिक्रिया करता है और दूसरों के साथ संवाद करता है। लिडा, आपके चार्ट में एक 1 होता है ... उनके चार्ट में सिर्फ 1 वाले लोगों को अपनी अंतरतम भावनाओं को व्यक्त करना मुश्किल लगता है। वे अन्य तरीकों से अच्छे संचारक हो सकते हैं, लेकिन अपने भीतर के स्व को उभरने की अनुमति देना कठिन है। पृष्ठ of का of

वे अक्सर दूसरे व्यक्ति की बात को देखना मुश्किल समझते हैं। सीनेटर एडवर्ड कैनेडी (जन्म 22 फरवरी, 1932) अपने चार्ट में एक 1 (चित्रा 3 जे) वाले व्यक्ति का एक अच्छा उदाहरण है। वह स्पष्ट रूप से खुद को कांग्रेस में बहुत अच्छी तरह से व्यक्त करता है, लेकिन लोगों के साथ उसकी अंतरतम भावनाओं के बारे में बात करना मुश्किल है, जिसे वह सबसे ज्यादा प्यार करता है। उसका 22 दिन का नंबर नोट करें।

नंबर 2 टू इमोशनल प्लेन का पहला नंबर है। इससे पता चलता है कि व्यक्ति कितना संवेदनशील और सहज है। यह सदी, यह चीनी अंक विज्ञान चार्ट में तीसरा सबसे आम नंबर है। इक्कीसवीं सदी में पैदा हुए हर किसी के चार्ट में कम से कम एक 2 होगा। यह कुंभ राशि के आने के संकेत के रूप में लिया जा सकता है क्योंकि सभी के पास देखभाल, संवेदनशील और सहज गुण होंगे। कैसे और अगर वे इन लक्षणों का उपयोग करते हैं, तो यह एक और मामला है। लिडा, आपके चार्ट में एक 2 होते हैं ... उनके चार्ट में एक 2 वाले लोग संवेदनशील और सहज होते हैं। दुर्भाग्य से, वे भी आसानी से आहत होते हैं। वे एक नज़र में अन्य लोगों को योग करने में सक्षम हैं, और पागलपन का पता लगाने में एक अलौकिक क्षमता है। नास्त्रेदमस, प्रसिद्ध सोलहवीं सदी के मानसिक, जो 14 दिसंबर, 1503 को पैदा हुए थे, उनके चार्ट में एक 2 था (चित्र 3 एन)।

नंबर 3

पृष्ठ ९ of of का

मेंटल प्लेन की शुरुआत में चार्ट के ऊपरी बाएँ हाथ की स्थिति में तीन पाए जाते हैं। यह थॉट रो की अंतिम संख्या और मानसिक फलक की पहली संख्या है। नतीजतन, यह काफी हद तक बौद्धिक क्षमता से संबंधित है। यह एक सकारात्मक, खुशहाल संख्या है। तीन भी स्मृति और स्पष्ट रूप से और तार्किक रूप से सोचने की क्षमता से संबंधित हैं।  लिडा, आपके चार्ट में दो 3 के होते हैं ... उनके चार्ट में दो 3s वाले लोगों के पास अच्छी कल्पनाएँ होती हैं। वे मानसिक रूप से सतर्क हैं और आमतौर पर रचनात्मक हैं। वे फड़फड़ा सम्मेलन का आनंद लेते हैं और थोड़ा सनकी प्रतीत हो सकते हैं। इस संयोजन वाले कई लोग लेखक बन जाते हैं, क्योंकि वे अपनी रचनात्मक कल्पना को चैनल करने और अपने विचारों को शब्दों में व्यक्त करने की क्षमता रखते हैं। मिखाइल गोर्बाचेव (जन्म 2 मार्च, 1931) अपने चार्ट (चित्रा 3 एस) में दो 3s के साथ किसी का उदाहरण है।

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रत्न धारण कैसे करें?

Jyotishgurumk बृहद संहिता पुराणों पर आधारित आचार्य वाराहमिहिर द्वारा स्वरचित सुन्दर ग्रन्थ है। वाराहमिहिर के इस ग्रन्थ में रत्नों की उत्पत्...